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ये मनमानी नहीं तो क्या है… सतलुज-यमुना लिंक नहर विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को जमकर सुनाया

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को हरियाणा और पंजाब के बीच एसवाईएल यानी सतलुज-यमुना लिंक कैनाल विवाद को लेकर सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत ने पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि पंजाब सरकार सतलुज-यमुना लिंक (SYL) नहर बनाने के आदेश का पालन नहीं कर रही। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने पंजाब और हरियाणा सरकार को मिलकर इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर वे ऐसा नहीं करते हैं, तो कोर्ट 13 अगस्त को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

जस्टिस गवई ने क्या कहा
जस्टिस गवई ने सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि यह मनमानी नहीं तो क्या है। नहर बनाने का आदेश पारित होने के बाद, इसके निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन को गैर-अधिसूचित कर दिया गया? यह कोर्ट के आदेश की अवहेलना करने की कोशिश है। यह मनमानी का स्पष्ट मामला है। इससे तीन राज्यों को मदद मिलनी चाहिए थी। परियोजना के लिए भूमि का अधिग्रहण किया गया था और फिर उसे गैर-अधिसूचित कर दिया।

क्या है पूरा मामला
यह मामला 1996 में हरियाणा की ओर से पंजाब के खिलाफ दायर किया गया था। यह SYL नहर विवाद से जुड़ा है। यह मामला 1981 का है, जब पंजाब, राजस्थान और हरियाणा ने पानी के बंटवारे पर समझौता किया था। इस समझौते में यह भी कहा गया था कि सतलुज यमुना लिंक नहर दो साल के भीतर पूरी हो जाएगी। लेकिन, नहर के निर्माण को लेकर हिंसा हुई और पंजाब ने काम रोक दिया।

कैसे सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा नहर विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में पंजाब सरकार को हरियाणा के साथ नदी के पानी को साझा करने के लिए नहर बनाने का आदेश दिया। फिर पंजाब सरकार ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट, 2004 बनाया। इस एक्ट के तहत 1981 के समझौते से पंजाब सरकार को मुक्त कर दिया गया। भारत के राष्ट्रपति ने इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट से सलाह मांगी। नवंबर 2016 में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पंजाब एकतरफा रूप से पानी के बंटवारे के समझौते को समाप्त नहीं कर सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट, 2004 असंवैधानिक था।

पंजाब सरकार के वकील ने क्या कहा
हालांकि, पंजाब सरकार ने अभी तक 2002 के आदेश का पालन नहीं किया है। यह मुद्दा अभी भी अलग-अलग मंचों पर लंबित है। पंजाब सरकार के वकील गुरमिंदर सिंह ने कहा कि नहर बनाने के प्रस्ताव से पंजाब में अशांति फैल गई। उन्होंने कहा कि यह राज्य में एक भावनात्मक मुद्दा है। उधर सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा कि दोनों राज्य सौहार्दपूर्ण समाधान तक पहुंचने के लिए केंद्र का सहयोग करें। अगर समाधान नहीं निकला तो पीठ इस मामले पर 13 अगस्त को सर्वोच्च अदालत फिर सुनवाई करेगी।

हरियाणा सरकार के वकील ने कही ये बात
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से एएसजी ने कहा कि जल शक्ति मंत्री ने बैठक की और जल बंटवारे पर विचार करने के लिए समिति गठित की गई है। दोनों राज्यों के मुख्य सचिव समिति के अध्यक्ष हैं और 1 अप्रैल 2025 को इस मामले में एक अतिरिक्त हलफनामा दाखिल किया गया है। इस पर हरियाणा सरकार के वकील श्याम दीवान ने कहा कि बातचीत से कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। जहां तक नहर के निर्माण की बात है, तो हरियाणा ने अपने इलाके का काम पूरा कर लिया है। एक अहम मुद्दा है कि पानी नहीं छोड़ा जा रहा है।

13 अगस्त को फिर हो सकती है सुनवाई
पंजाब सरकार के एडवोकेट जनरल गुरमिंदर सिंह ने कहा कि डिक्री अतिरिक्त पानी के लिए थी, लेकिन नहर का निर्माण अभी होना बाकी है। हरियाणा को अतिरिक्त पानी मिलना चाहिए या नहीं, यह मुद्दा ट्रिब्यूनल के समक्ष लंबित है। इसके अलावा, केंद्र सरकार की तरफ से एएसजी ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हमने मध्यस्थता के लिए प्रयास किए थे।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में कहा गया है कि दोनों मध्यस्थता के लिए सहमत हो गए हैं। वहीं, हरियाणा के वकील ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि हम सहयोग नहीं करने जा रहे हैं, इसलिए वार्ता विफल हो गई है। साल 2016 से हम प्रयास कर रहे हैं, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ।

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