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भारत की ‘शहजादी’ को अबू धाबी की जेल में हो गई फांसी? जानें- क्यों बाकी है उम्मीद की किरण

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दिल्ली/बांदा,

उस लड़की पर एक चार साल के बच्चे की हत्या का इल्जाम है. यूपी की वो लड़की पिछले कई महीनों से अबू धाबी की जेल में बंद है. मगर अब उस लड़की को फांसी दिए जाने की खबरें आ रही है. हम बात कर रहे हैं यूपी के बांदा जिले की रहने वाली शहजादी की. जिसने बीते शुक्रवार की रात अपने माता-पिता को फोन किया था और उसने अपने घरवालों को एक ऐसी बात बताई, जिसे सुनकर उनके होश उड़ गए. असल में ऐसा लग रहा है कि वो कॉल शहजादी की आखिरी कॉल थी.

अबू धाबी जेल से शहजादी की आखिरी कॉल!
क्या यूपी के बांदा जिले की शहजादी को अबू धाबी की जेल में 15 फरवरी की सुबह 5.30 बजे फांसी दी जा चुकी है? शहजादी की फांसी को लेकर अचानक ये खबर इसलिए सुर्खियों में आई क्योंकि शुक्रवार की रात करीब 12 बजे शहजादी ने अबू धाबी जेल से बांदा में रहने वाले अपने मां-बाप को एक आखिरी कॉल किया था. ये कहते हुए कि अब उसके पास टाइम नहीं बचा है. जिस वक्त शहजादी ने ये फोन किया था तब अबू धाबी में रात के साढ़े नौ बजे थे.

घरवालों से बात करने के लिए महज 10 मिनट
शहजादी के मुताबिक, जेल के कैप्टन ने उससे उसकी आखिरी ख्वाहिश पूछी थी. इसी के बाद शहजादी ने अपनी ये आखिरी ख्वाहिश जताई थी कि वो आखिरी बार अपने मां-बाप से फोन पर बात करना चाहती है. इसी के बाद जेल के कैप्टन ने फोन मिलाकर शहजादी को दिया. शहजादी के पास अपने घरवालों से बात करने के लिए सिर्फ 10 मिनट थे. इसी कॉल के जरिए शहजादी ने जानकारी दी कि उसे फांसी से पहले एक अलग कमरे में शिफ्ट कर दिया गया है.

उज़ैर के खिलाफ FIR वापस लेने को कहा
पूरी बातचीत के दौरान शहजादी के मां-बाप लगातार रोते रहे. लेकिन इस आखिरी बातचीत के दौरान शहजादी अपने मां-बाप से कहती है कि जिस उज़ैर के खिलाफ उन लोगों ने यूपी में एफआईआर दर्ज कराई है, उसे वापस ले लें. दरअसल, शहजादी को धोखे से अबू धाबी भेजने के मामले में शहजादी के मां-बाप ने उजैर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा रखा है.

बातचीत के दौरान फैज का जिक्र
मौत से पहले की इस आखिरी कॉल में शहजादी बताती है कि कुछ देर पहले ही जेल के कैप्टन ने उसे इसकी जानकारी दी है. साथ ही वो ये भी कहती है कि फांसी वाली सुबह फैज़ भी शायद जेल आएगा. दरअसल, फैज़ चार महीने के उसी बच्चे का पिता है, जिस बच्चे के कत्ल के इल्जाम में शहजादी को अबू धाबी की कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी. अभी शहजादी और उसके मां-बाप के बीच ये बातचीत जारी ही थी कि तभी कोई अफसर बीच में अरबी में कुछ कहता है. शायद वो ये बता रहा था कि इस आखिरी कॉल की मियाद खत्म होने वाली है. इसके बाद बीप की आवाज सुनाई देती है और फिर फोन कट जाता है.

क्या शहजादी को हो गई फांसी?
शहजादी की ये आखिरी बातचीत उसके वालिद ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर ली थी, जो बाद में उन्होंने मीडिया को शेयर की. शहजादी का ये फोन शुक्रवार यानि 14 फरवरी की रात आया था. बातचीत के हिसाब से 15 फरवरी की सुबह शहजादी को फांसी दी जानी थी. तो क्या शहजादी को फांसी दे दी गई? या फांसी दिए जाना अभी बाकी हैं? इस सवाल के जवाब की तह तक पहुंचने के लिए ‘आज तक’ की टीम ने भारत से लेकर अबू धाबी तक कई लोगों से बातचीत की.

अबू धाबी कोर्ट से फैज के पास आई थी कॉल
पूरी कहानी को समझने के लिए इस बातचीत के बाद जो सच्चाई सामने आई है वो कुछ यूं है. बात 25 जनवरी की है. अबू धाबी में रहने वाले फैज के पास अबू धाबी कोर्ट से एक फोन आता है. फैज वही हैं जिनके चार महीने के बच्चे के कत्ल का इल्जाम शहजादी पर था. फोन करने वाला फैज को एक लोकेशन भेजता है और वहां पहुंचने को कहता है. तय वक्त पर फैज उस लोकेशन पर पहुंच जाते है.

फैज के पास दोबारा नहीं आई कॉल
वहां पहली बार अबू धाबी की हायर अथॉरिटी फैज को बताती है कि शहजादी की फांसी के लिए 15 फरवरी की सुबह साढ़े पांच बजे का वक्त मुकर्रर किया गया है. साथ ही फैज से ये भी कहा जाता है कि अगर वो चाहें तो शहजादी की फांसी को अपनी आंखों से देखने के लिए 15 फरवरी की सुबह साढ़े पांच बजे जेल पहुंच जाएं. हालाकि फैज को ये भी कहा गया था कि फांसी से पहले उन्हें एक और बार फोन पर जानकारी दी जाएगी. लेकिन फैज अपनी आंखो के सामने किसी को मरता नहीं देख सकते थे इसलिए वो 15 फरवरी की सुबह जेल नहीं पहुंचे. हालांकि 25 जनवरी के बाद उन्हें दोबारा कभी कोई कॉल भी नहीं आया.

फांसी की खबर ऑफिशियली देना जरूरी
अबू धाबी में शनिवार और रविवार की छुट्टी होती है. इन दो दिनों में सभी सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं. सूत्रों के मुताबिक 17 फरवरी की शाम तक फैज को अबू धाबी की अथॉरिटी के जरिए इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई थी कि शहजादी को फांसी दे दी गई है. हालांकि, कानूनन शहजादी की फांसी की खबर फैज और उनके परिवार को ऑफिशियली देना जरूरी है. सूत्रों की मानें तो अगर शनिवार की सुबह शहजादी को फांसी दी जा चुकी है तो बहुत मुमकिन है कि दो दिनों की छुट्टी के बाद अब कभी भी फैज को इस बारे में जरूरी सूचना दे दी जाएगी.

शहज़ादी को फिलहाल फांसी नहीं- विदेश मंत्रालय
हालांकि, आजतक ने जब इस बारे में विदेश मंत्रालय से जानकारी ली तो विदेश मंत्रालय ने भी बताया कि यूएई सरकार ने वहां मौजूद भारतीय दूतावास को जानकारी दी है कि शहज़ादी को फिलहाल फांसी नहीं दी गई है. मंत्रालय का कहना था कि इस बारे में शहज़ादी की तरफ से एक रिव्यू पेटिशन दाखिल गई है और भारतीय दूतावास इस केस पर लगातार नज़र रखे हुए है.

क़िसास या लीवर?
सूत्रों के मुताबिक शहजादी का मुकदमा जब अबू धाबी की कोर्ट में था तब खुद फैज ने एक बार अदालत से पूछा था कि क्या शहजादी की सजा को उम्रकैद में तब्दील किया जा सकता है? तब अदालत ने कहा था कि अब इसमें काफी देरी हो चुकी है. सूत्रों के मुताबिक फैज और उसके परिवार के सामने कई बार इस सवाल को रखा गया था कि क्या वो शहजादी के लिए क़िसास की तरफ जाएंगे या लीवर की तरफ? असल में अरबी में किसास का मतलब बदला होता है और लीवर शब्द किसी को माफ करने या बख्स देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

शहजादी का फैसला कोर्ट पर छोड़ा
फैज का परिवार कभी भी किसास यानि बदला लेने के हक में नहीं था. पर सूत्रों के मुताबिक अबू धाबी में लीवर के लिए जाने का मतलब सीधे सीधे ये था कि शहजादी की सजा को माफ करते हुए उसे रिहा कर दिया जाता. पर फैज का परिवार बेशक बदला नहीं चाहता था लेकिन वो ये भी नहीं चाहता था कि बगैर सजा मिले चंद सालों में ही शहजादी को आजाद कर दिया जाए. इसलिए उन्होंने शहजादी की सजा का फैसला कोर्ट पर ही छोड़ दिया.

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