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MUDA मामले में लोकायुक्त पुलिस ने सीएम सिद्धारमैया से 2 घंटे की पूछताछ, बोले- मैंने सभी सवालों का दिया जवाब

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बेंगलुरु,

लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से उनकी पत्नी बीएम पार्वती को MUDA द्वारा कथित अवैध भूमि आवंटन के संबंध में दो घंटे तक पूछताछ की. पूछताछ के बाद कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने सभी सवालों का जवाब दे दिया है और ‘सच्चाई’ बताई है. वहीं, बीजेपी ने उनका विरोध करते हुए सिद्धारमैया के इस्तीफे की मांग की है और लोकायुक्त पुलिस की पूछताछ को मैच फिक्सिंग करार दिया है.

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया एक समन के जवाब में लोकायुक्त पुलिस के सामने पेश हुए थे, जहां लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक (एसपी) टीजे उदेश के नेतृत्व में एक टीम ने पूछताछ की. लोकायुक्त के एक अधिकारी ने कहा, “पूछताछ करीब दो घंटे तक चली.”पूछताछ के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि उन्होंने उनसे पूछे गए सभी सवालों के जवाब दे दिए हैं और उन्होंने उन्हें ‘सच्चाई’ बता दी है.

उन्होंने कहा कि जब तक (किसी भी गलत काम के बारे में) अदालत द्वारा निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक मेरी छवि पर कोई काला धब्बा नहीं है. मेरे खिलाफ जो है वह सिर्फ आरोप हैं. मेरे खिलाफ झूठे आरोप लगाए गए हैं. मैं ऐसे आरोपों का जवाब अदालत और पुलिस को दूंगा.”

सीएम ने नहीं की कोई गलती डीके शिवकुमार
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री कानून का सम्मान करते हुए लोकायुक्त पुलिस के सामने पेश हुए. उन्होंने कोई गलती नहीं की है. सिद्धारमैया वरिष्ठ वकील और मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार ए एस पोनन्ना के साथ एक निजी कार से लोकायुक्त कार्यालय पहुंचे. पूछताछ के बाद वह चन्नापटना में विधानसभा उपचुनाव के लिए कांग्रेस के प्रचार अभियान में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो गए.

सीएम सिद्धारमैया को लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज की एफआईआर में आरोपी नंबर एक के रूप में नामित किया गया है. उन पर मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (MUDA) द्वारा उनकी पत्नी पार्वती बीएम को 14 साइटों के आवंटन में अवैध होने का आरोप है. उन्होंने 25 अक्टूबर को उन्होंने अपनी पत्नी से पूछताछ की थी, जिसे आरोपी नंबर 2 के रूप में नामित किया गया था.

वहीं, 27 सितंबर को मैसूर स्थित लोकायुक्त पुलिस द्वारा दर्ज की एफआईआर में सीएम सिद्धारमैया, उनकी पत्नी और जीजा मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू का नाम है. जिनके मालिकाना हक में जमीन खरीदी थी और उनकी पत्नी को कई गिफ्ट दी थे. इस मामले में मल्लिकार्जुन स्वामी और देवराजू पहले ही लोकायुक्त पुलिस के सामने पेश हो चुके हैं.

बीजेपी ने किया विरोध
भाजपा विधायक टी एस श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने सिद्धारमैया की आलोचना की और उनसे मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और जांच का सामना करने को कहा. उन्होंने एक मौजूदा मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की निष्पक्षता पर भी संदेह जताया.

भाजपा के वरिष्ठ नेताओं बी एस येदियुरप्पा और आर अशोक ने सिद्धारमैया से पूछताछ करने वाली लोकायुक्त पुलिस को ‘स्टेज मैनेज’ और ‘मैच फिक्सिंग’ करार दिया है. उन्होंने सिद्धारमैया को चुनौती दी कि अगर वह ईमानदार हैं तो मामले को सीबीआई को सौंप दें.

बीजेपी नेता अशोक ने कहा कि सीएम के दौरे के कार्यक्रम में कहा गया है कि वह सुबह 10 बजे पूछताछ के लिए लोकायुक्त कार्यालय में प्रवेश करेंगे और दोपहर 12 बजे चन्नपटना के लिए रवाना होंगे. वह उनसे पूछताछ के लिए समय कैसे तय कर सकते हैं? क्या यह मैच फिक्सिंग है? उन्हें कैसे पता चल सकता है कि जांच अधिकारी किस समय पर हैं अपनी जांच पूरी करेंगे? जांच कैसी हो रही है?.

बीजेपी के लोकसभा सदस्य और पूर्व सीएम बसवराज बोम्मई ने कहा, “कर्नाटक के इतिहास में पहली बार, एक मौजूदा मुख्यमंत्री अपने अधीन काम करने वाले पुलिस अधिकारियों के सामने आरोपी के रूप में पेश हो रहा है. इससे मुख्यमंत्री पद की गरिमा कम हुई है.”

मामला सीबीआई को ट्रांसफर करने की मांग
वहीं, मंगलवार को कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक आरटीआई कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्ण द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सिद्धारमैया और अन्य को नोटिस जारी किया है. जिसमें मामले को सीबीआई को ट्रांसफर करने का निर्देश देने की मांग की गई है.

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना, सीएम की पत्नी पार्वती, स्वामी, केंद्र सरकार, राज्य सरकार, सीबीआई, लोकायुक्त और अन्य को नोटिस भी जारी किया है. लोकायुक्त को मामले में अब तक की गई जांच को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया. अदालत ने अगली सुनवाई 26 नवंबर को मुकर्रर की है.

वहीं, 24 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष एक अपील दायर की, जिसमें MUDA साइट आवंटन मामले के संबंध में एकल न्यायाधीश पीठ के फैसले को चुनौती दी गई. जो उनके लिए एक झटका था.

न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की पीठ ने 24 सितंबर को मामले में उनके खिलाफ जांच के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत की मंजूरी को चुनौती देने वाली मुख्यमंत्री की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें कहा गया था कि राज्यपाल का आदेश कहीं भी दिमाग के प्रयोग की कमी से ग्रस्त नहीं है. सिद्धारमैया ने अपने खिलाफ जांच के लिए गहलोत की मंजूरी की वैधता को चुनौती दी थी.

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