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लालू के समधियाने से भी नीतीश को नहीं मिला रहा भाव, अखिलेश को तो कोई और पसंद

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लखनऊ

नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे! बकौल जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह, नीतीश कुमार तो प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए सबसे फिट कैंडिडेट हैं। हां, पूर्व अध्यक्ष और अब भाजपा में अपनी जगह तलाश रहे आरसीपी सिंह की मानें तो नीतीश कुमार सातो जनम में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। राजद की ओर से बिहार में तेजस्वी के लिए ओपन स्पेस चाहिए। यह तभी संभव है, जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली करें। अगर वे खाली करेंगे तो तेजस्वी यादव का नंबर लग सकता है। इसके लिए राजद का एक वर्ग बिना कुछ सोचे-विचारे नीतीश कुमार की पीएम उम्मीदवारी के समर्थन में उतरा हुआ है। हालांकि, राजद के शीर्ष नेतृत्व की ओर से अब तक इस संबंध में कोई स्पष्ट मत सामने नहीं आया है। अखिलेश यादव ने जरूर इस मामले में अपनी स्थिति साफ कर दी है। उन्होंने संकेतों में साफ कर दिया है कि उन्हें नीतीश का नेतृत्व स्वीकार नहीं है।

नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद माना जा रहा था कि विपक्ष की ओर से उन्हें एक मत से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जा सकता है। लालू प्रसाद यादव के जेल से बाहर आने के बाद से बदल रहे समीकरण और दिल्ली में उनके बीमार होने के बाद भी नेताओं से मुलाकातों को इससे जोड़ा जा रहा है। लालू की ओर से इस प्रकार का कोई भरोसा नीतीश को दिया गया होगा। पिछले दिनों लालू जब दिल्ली से पटना पहुंचे तो उनके स्वागत में नीतीश कुमार भी पहुंचे। दो पुराने साथियों की मुलाकात की तस्वीरें इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हैं। हाथों में हाथ और बिहार की राजनीति में फिर से साथ के बाद इस मुलाकात की कशिश ही कुछ अलग दिखी। इन तमाम बातों के बाद भी लालू के ही समधियाने से नीतीश कुमार के लिए बुरी खबर आई है।

अखिलेश ने नहीं दिया भाव
अखिलेश ने नीतीश कुमार को पीएम पद के उम्मीदवार के तौर पर पेश किए जाने को लेकर भाव ही नहीं दिया। उन्होंने बिहार के राजनीतिक बदलाव को एक सकारात्मक संदेश के रूप में लिया। साथ ही, कहा भी कि इससे यूपी में भाजपा के समर्थक दलों में भी विकल्प की तलाश की गतिविधि शुरू होगी। लेकिन, पीएम उम्मीदवार या केंद्र की राजनीति को लेकर उनका स्पष्ट कहना है। केंद्र की रणनीति तो एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष एवं पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी और तेलंगाना के सीएम एवं टीआरएस प्रमुख के. चंद्रशेखर राव ही तय करेंगे। मतलब, 2024 में विपक्ष के पीएम का चेहरा कौन हो? यह तीनों ही तय करेंगे या फिर इन तीनों में से कोई बन सकता है। वैसे, अखिलेश यादव की पार्टी की ओर से भी उनके नाम को उछाला जा रहा है।

यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। बिहार की 40 लोकसभा सीटों के मुकाबले दोगुनी। अखिलेश यादव की तैयारी सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की है। नीतीश कुमार अगर गठबंधन के तहत चुनावी मैदान में उतरते हैं तो 15-16 सीटों से अधिक लोकसभा चुनाव 2024 में जदयू के पाले में नहीं आएगा। पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को ही आधार मानें और जदयू की 16 सीटों पर जीत को तय मान कर चलें तो भी विपक्ष के बहुमत के 273 के आंकड़े के पार करने के बाद नीतीश कुमार की 16 सीटों के दम पर उनकी पीएम पद पर उम्मीदवारी की संभावना कम ही है।

अखिलेश के पीएम की दावेदारी की चर्चा क्यों?
समाजवादी पार्टी के सूत्रों का कहना है कि पार्टी अपने दम पर सहयोगियों के साथ सभी 80 सीटों पर चुनावी मैदान में उतरेगी। पीएम नरेंद्र मोदी का एक बार फिर वाराणसी से चुनावी मैदान में उतरना तय माना जा रहा है। ऐसे में सपा का मानना है कि एक पीएम उम्मीदवार घोषित होकर चुनावी मैदान में उतरने का असर देखा जा चुका है। वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा को इसका सीधा फायदा मिला है। आजमगढ़ और रामपुर लोकसभा उप चुनाव में समाजवादी पार्टी की हार के बाद स्थापित वोट बैंक यादव+मुस्लिम में भी टूट देखने को मिली। अगर अखिलेश विपक्ष या तीसरा मोर्चा के पीएम उम्मीदवार घोषित होते हैं तो इस वोट बैंक को एकजुट करना संभव होगा। साथ ही, भाजपा से नाराज वोट बैंक को भी सपा अपने पाले में लाने में कामयाब हो सकती है।

सपा की रणनीति के कारण मुलायम सिंह यादव के समधी लालू प्रसाद यादव की नीतीश कुमार के सामने स्थिति कमजोर हो सकती है। दरअसल, मैनपुरी से पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव से लालू की छोटी बेटी राजलक्ष्मी यादव की शादी हुई है। रिश्ते में तेज प्रताप अखिलेश यादव के भतीजा लगते हैं। वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में वे नीतीश कुमार पीएम उम्मीदवारी के साथ रिश्तेदारी को निभाने के लिहाज से भी खड़े नहीं दिख रहे हैं।

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