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Tuesday, March 31, 2026
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‘कोई रैली, सेमिनार नहीं, सिर्फ पढ़ाइए’ जानें योगी सरकार का फरमान कैसे बदल देगा 5 लाख शिक्षकों की जिंदगी

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने बेसिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए कमर कस ली है। दरअसल सरकार को प्रदेश भर के स्कूलों की जांच के दौरान पता चला कि विद्यालयों में शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि एवं कार्य निर्धारण को लेकर की जा रही कार्यवाही संतोषजनक नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसमें तेजी से सुधार के निर्देश दिए, जिसके बाद अब महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन दिशा-निर्देशों में शिक्षकों की ड्यूटी से लेकर उनके ट्रांसफर और जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया गया है। खास बात ये है कि खुद शिक्षक सरकार के इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं। दरअसल योगी सरकार के निर्देशों में कई ऐसी सुधार की अहम बातें हैं, जिनकी मांग खुद शिक्षक वर्षों से कर रहे थे।

पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति समझिए यहां बेसिक स्कूलों में 5 लाख 80 हजार 84 टीचरों के पद हैं। हाल ही में विधानसभा में योगी सरकार ने बताया कि इनमें सीधी भर्ती के ग्रामीण क्षेत्र में 51,112 पद और नगर क्षेत्र में 12,149 पद खाली है। यानी करीब सवा 5 लाख शिक्षक हैं। इन 5 लाख से ज्यादा शिक्षकों को विद्यालय में शिक्षण कार्य के अलावा भी कई अन्य कार्य करने होते हैं। इनमें विद्यालय से जुड़े मिड डे मील और छात्रों की कॉपी-किताब, स्कूल ड्रेस आदि की व्यवस्था कराना भी शामिल है। यही नहीं इन शिक्षकों की ड्यूटी समय-समय पर होने वाले विधानसभा, लोकसभा चुनावों से लेकर पल्स पोलियो, मतदाता सर्वेक्षण सहित तमाम अन्य दूसरे विभागीय कार्यों में भी लगाई जाती थी। यूपी में शिक्षक लगातार इसकी मांग कर रहे थे। अब योगी सरकार के दिशा-निर्देश आने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली है।

पहले योगी सरकार के दिशा-निर्देशों पर नजर डाल लेते हैं।

1. सभी टीचर शिक्षण अवधि से 15 मिनट पहले विद्यालय में उपस्थित होंगे एवं शिक्षण अवधि के बाद कम से कम 30 मिनट उपस्थित रहकर पंजिका तथा अन्य अभिलेख अपडेट करेंगे और अगले दिन की कक्षा शिक्षण की रूपरेखा तैयार करेंगे।

2. विद्यालयों में शैक्षणिक कार्य की अवधि में रैली, प्रभात फेरी, मानव श्रृंखला और नवाचार गोष्ठी का आयोजन नहीं किया जाएगा। यही नहीं शिक्षक किसी भी विभाग का हाउस होल्ड सर्वे भी नहीं करेंगे। ये अहम है क्योंकि चुनाव, मतगणना, पल्स पोलियो अभियान जैसे तमाम ऐसे दूसरे विभागों के काम थे, जिनमें शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती थी। ऐसे में स्कूल में पढ़ाई ठप हो जाती थी।

3. इसके अलावा शिक्षकों की ट्रेनिंग को लेकर भी स्थितियां स्पष्ट कर दी गई हैं। साफ कहा गया है कि शिक्षकों को राज्य परियोजना कार्यालय और एससीईआरटी के प्रशिक्षणों में शामिल होना होगा लेकिन जिला या विकासखंड स्तर पर बीएसए प्रशिक्षण आयोजित नहीं करेंगे। हिदायत दी गई है कि अगर जिलों में इस तरह का कोई अनाधिकृत आयोजन होता है तो कार्रवाई भी की जाएगी।

4. शिक्षण कार्य सबसे ज्यादा प्रभावित कुछ ऐसे कार्यों के चलते भी होता था। जैसे नि:शुल्क पाठ्यपुस्तक सहित अन्य सामग्री का वितरण कराया जा रहा है आदि। निर्देश है कि ये काम भी अब शिक्षण अवधि के बाद किया जाएगा।

5. इसी तरह ट्रांसफर पोस्टिंग के खेल पर भी लगाम लगाने की कोशिश की गई है। इसकी तहत निर्देश दिया गया है कि परिषदीय शिक्षकों को जिला प्रशासन, बीएसए दफ्तर और खंड शिक्षा अधिकारी दफ्तर में संबद्ध नहीं किया जाएगा। यानी शिक्षक है तो स्कूल में ही तैनात होंगे।

6. यही नहीं शिक्षकों को वेतन, अवकाश, मेडिकल आदि से संबंधित समस्त कार्यों को भी ऑनलाइन ही करना होगा। इसके लिए एप्लीकेशन लेने या पैरवी करने के लिए उन्हें बीएसए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है।

7. गैरहाजिर मिलने पर शिक्षक पर एक्शन और वेतन भी कटेगा। इसके अलावा विद्यालय से संबंधित बैंकिंग कार्यों जैसे- पासबुक में एंट्री, ग्राम प्रधान से वार्ता/एमडीएम संबंधी आवश्यकताओं एवं समन्वय बताकर तमाम विद्यालयों में शिक्षक बाहर रहते थे। इसके लिए भी साफ निर्देश हैं कि बैंकिंग आदि काम ऑनलाइन कीजिए। कुल मिलाकर शिक्षण अवधि में टीचर स्कूल से बाहर नहीं जाएंगे।

8. यही नहीं सभी शिक्षकों को अपने काम पर ध्यान लगाने और विद्यालय का प्रदर्शन बेहतर करने पर जोर देना होगा। इसके तहत सप्ताह में कम से कम एक बार प्रधानाध्यापक की अध्यक्षता में विद्यालय के सभी शिक्षकों की बैठक होगी, जिसमें अगले सप्ताह की कार्ययोजना बनेगी साथ ही विकासखंड स्तर पर आयोजित मासिक समीक्षा बैठकों के निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की जाएगी।

इस संबंध में उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि ये शिक्षकों के लिए बड़ी राहत है। प्रदेश भर के शिक्षक लगातार मांग कर रहे थे। हमें तनख्वाह बेसिक शिक्षा विभाग देता था लेकिन नौकरी हमें दूसरे विभागों की करनी पड़ती थी। कभी कोरोना में ड्यूटी, पल्स पोलिया, मतदाता सर्वेक्षण की तरह तमाम दूसरे विभागों के काम शिक्षकों को ही करने पड़ते थे। जाहिर है इससे शिक्षण कार्य बुरी तरह प्रभावित होता था। अब सरकार ने जो फैसला किया है, वो स्वागत योग्य है। शिक्षक अब सही मायने में अपना काम यानी शिक्षण कर सकेंगे। वहीं स्कूल 15 मिनट पहले आने और बंद होने के 30 मिनट बाद जाने के आदेश पर अनिल कहते हैं इससे भी शिक्षकों को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी। आमतौर पर इतना समय तो शिक्षक रुकते ही हैं। अनिल साथ ही कहते हैं कि सरकार ने शिक्षण कार्य के दौरान स्कूल नहीं छोड़ने का निर्देश दिया है, अब अगर कोई आकस्मिक परिस्थिति बनती है तो क्या शिक्षक को अनुमति मिलेगी? ये देखने वाली बात है।

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