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राजस्थान सरकार की नई योजना, मोबाइल उठाओ और कॉल लगाकर दो सूचना, मिलेगा 10 हजार का इनाम

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सीकर

राजस्थान में भजनलाल सरकार की ओर से एक ऐसी योजना शुरू की गई है, जिसमें भागीदारी देकर संबधित विभाग को सूचना देने वाले नागरिकों को 10,000 रुपये का इनाम मिलेगा। जी हां, यह सच है, ऐसी घोषणा सरकार के एक महकमें राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल की ओर से नगरपरिषद-नगरपालिका आदि निकाय संस्थाओं के माध्यम से की गई है। इस कवायद का उद्देश्य बढ़ते प्लास्टिक पदार्थो के उपयोग एवं बिक्री पर लगी पाबंदी को प्रभावी बनाना तो ही साथ ही पर्यावरण व वन गतिविधियों के संतुलन को कायम रखना है। प्लास्टिक का उत्पादन, भंडारण एवं विक्रय की चेन श्रृंखला को तोडऩा है। योजना के तहत प्लास्टिक में प्रतिबंधित वस्तुओं की सूचना देने वाले को दस हजार का इनाम दिया जाएगा।

प्रतिबंधित प्लास्टिक वस्तुएं और कार्रवाई की योजना
सीकर नगर परिषद आयुक्त शशिकांत शर्मा ने बताया कि पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के आदेशानुसार कई प्रकार की प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। इनमें शामिल हैं:

  • प्लास्टिक की डंडियां, झंडे, कैंडी स्टिक, आइसक्रीम स्टिक
  • पॉलिस्टायरीन और थर्माकॉल के सजावटी सामान
  • प्लेट, कप, गिलास, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, और ट्रे जैसे कटलरी आइटम
  • मिठाई के डिब्बे और निमंत्रण पत्र की पैकेजिंग फिल्म
  • 100 माइक्रॉन से कम मोटाई के प्लास्टिक पीवीसी बैनर

राजस्थान सरकार ने इन वस्तुओं के निर्माण, भंडारण, विक्रय और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नागरिकों को इनका उपयोग और बिक्री करने से मना किया गया है।

गुप्त सूचना देने वालों को मिलेगा इनाम
राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने प्लास्टिक प्रदूषण की रोकथाम के लिए गुप्त सूचना देने वाले नागरिकों को वित्तीय प्रोत्साहन देने की योजना बनाई है। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा, और उन्हें ₹10,000 तक का इनाम दिया जाएगा। प्रतिबंधित प्लास्टिक के निर्माण, भंडारण, विक्रय, और परिवहन की जानकारी नगर परिषद में दी जा सकती है।

प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता
हालांकि, इस योजना के बावजूद, प्लास्टिक के उपयोग पर पूरी तरह से नियंत्रण पाने के लिए बड़ी स्तर की कार्रवाई की जरूरत है। सरकार की ओर से जब्ती अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन अक्सर यह कार्रवाई छोटे दुकानदारों तक सीमित रहती है। प्लास्टिक उत्पादन करने वाली फैक्ट्रियों और प्रदेश स्तरीय स्टॉकिस्ट पर छापेमारी की कमी के कारण प्रतिबंध पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाता।

प्लास्टिक प्रदूषण की मूल जड़ को समाप्त करने के लिए बड़े स्तर पर औद्योगिक इकाइयों और बड़े वितरकों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई से समस्या का समाधान नहीं होगा।

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