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Tuesday, December 9, 2025
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राजस्थान: नरेश मीणा के तरह जैसलमेर में अड़े निर्दलीय रवींद्र सिंह भाटी! जानें क्यों बढ़ा रखी सरकार की टेंशन

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जैसलमेर

जिले के बईया क्षेत्र में ओरण भूमि को निजी कंपनी से बचाने की मांग को लेकर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी इन कई दिनों चर्चाओं में चल रहे हैं। दरअसल, पिछले 16 दिनों से भाटी ग्रामीणों के समर्थन में धरना का नेतृत्व कर रहे हैं। जैसे- जैसे दिन बीत रहे हैं, भाटी के तेवर सख्त होते दिखाई दे रहे हैं। इसकी बानगी बीते शुक्रवार 15 नवबंर को देखने को मिली, जब पुलिस धरना स्थल से ग्रामीणों हटाने पहुंची और दो ग्रामीणों को हिरासत में ले लिया। तभी निर्दलीय विधायक रवींद्र सिंह भाटी मौके पर पहुंचे और पुलिस को चैलेंज करते हुए उन्होंने हिरासत में लिए गए ग्रामीणों को छुड़ाकर दोबारा धरनास्थल पर बैठा था। इस मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए एसपी के निर्देश पर राजकाज में बाधा डालने का केस दर्ज कर लिया है।

सूत्रों से मानें तो पुलिस जल्द ही फिर से धरना स्थल पर पहुंच कर ग्रामीणों को वहां से हटाने की कोशिश करेगी। इधर, इस केस में पुलिस प्रशासन ने रवींद्र सिंह भाटी की ओर से ग्रामीणों को फिर से धरनास्थल पर बैठाने के प्रयास में मामला सीआईडी सीबी को दिया। ऐसे में इस पूरे क्षेत्र में ग्रामीण और प्रशासन के बीच तनातनी का माहौल दिख रहा है। पूरे मामले में रवींद्र सिंह भाटी साफ कह चुके हैं कि वो पीछे नहीं हटेंगे, जब तक ही उन्हें ग्रामीणों की मांग पूरे होने का लिखित आश्वासन नहीं मिलता।

जानिए क्या है मामला
जैसलमेर जिले के बईया गांव स्थित रोहिड़ाला राय ओरण क्षेत्र में अडानी सोलर कंपनी अपना प्लांट शुरू करने शुरू करना चाह रही है। इस पर ग्रामीणों का आरोप है कि जिस जमीन पर कंपनी काम शुरू करवा रही है। वह औरण की जमीन (गौचर भूमि) है। जब तक हमारी ओरण को रेवेन्यू रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया जाता। तब तक हम कंपनी को अलॉट स्थान पर काम शुरू नहीं करने देंगे। इस मामले को लेकर शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी बीते कई दिनों से बईया गांव में डेरा डाले हुए हैं।

जानिए सोलर प्लांट को लेकर क्या है नाराजगी
इस दौरान वे जैसलमेर जिला कलेक्टर कार्यालय भी पहुंचे। यहां उन्होंने जिला कलेक्टर से भी वार्ता की। उनकी एक ही मांग है कि जब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिलता। तब तक वे वहां कंपनी को काम शुरू नहीं करने देंगे। लेकिन जिला कलेक्टर से भाटी की वार्ता भी विफल रही है। ऐसे में उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि जैसलमेर का प्रशासन राजधानी जयपुर से नहीं, बल्कि अहमदाबाद से संचालित होता है। यह कहा जा रहा है कि अडानी के इस प्लांट के जरिए गुजरात और अन्य राज्य को देने के लिए बिजली जनरेट की जाएगी। पूरे मामले में भाटी यह भी कह चुके हैं कि राजस्थान के बॉर्डर जिले बाड़मेर- जैसलमेर और बीकानेर में कई कंपनियों के सोलर प्लांट लगे हैं, फिर भी यहां लोगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलती। यहां दीया तले अंधेरा है।

भाटी ने इस दौरान जैसलमेर जिला प्रशासन पर भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि जैसलमेर के कई अधिकारियों के अडाणी कंपनी में शेयर लगे हुए हैं। लिहाजा वो उन्हें फेवर करने में जुटे हैं। भले ही इसमें ग्रामीणों और जैसलमेर – बाड़मेर का नुकसान हो जाए।

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