जयपुर। भजनलाल शर्मा ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा देने का माध्यम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में संस्कार और नैतिक मूल्यों के बीज बोने के प्रमुख केंद्र होते हैं। शिक्षक विद्यार्थियों को विद्या प्रदान कर उनके व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को जयपुर के आदर्श विद्या मंदिर संस्थान के आदर्श विद्या मंदिर राजापार्क में बहुउद्देशीय सभागार के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने नवीन सभागार का फीता काटकर उद्घाटन किया और पट्टिका का अनावरण भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदर्श विद्या मंदिर केवल विद्यालय नहीं बल्कि समाज में निस्वार्थ सेवा, सहयोग और करुणा की भावना को भी बढ़ावा दे रहा है। यहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों और संस्कारों का भी पाठ पढ़ाया जाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उसके सुदृढ़ीकरण के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विद्यालयों का दायित्व है कि वे विद्यार्थियों में करुणा और “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना विकसित करें। जो देश अपनी विरासत और संस्कृति को समझता है, उसके विकास को कोई रोक नहीं सकता।
आदर्श विद्या मंदिर जैसे संस्थान धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में शांति, सद्भाव और मानवता का संदेश फैलाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा शक्ति होती है और भारत के पास दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी है। शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं और उनके जीवन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि शहर से लेकर गांव तक हर बच्चे तक शिक्षा की रोशनी पहुंचे। इसी दिशा में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार युवा नीति भी लेकर आई है।
