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सिद्धार्थ साहब! देख रहे हैं, औरंगाबाद के DEO ने सरकारी गाड़ी से की शादी में शिरकत, एक दिन में 600 km का सफर

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औरंगाबाद:

औरंगाबाद के जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) सुरेंद्र कुमार एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। उन्होंने सरकारी पद और संसाधनों का दुरुपयोग करते हुए विभागीय स्कॉर्पियो गाड़ी से लगभग 300 किलोमीटर दूर दरभंगा में एक शादी समारोह में हिस्सा लिया। यह मामला तब तूल पकड़ गया जब उनकी इस यात्रा की वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। जानकारी के अनुसार, मामला 18 अप्रैल 2025 (शुक्रवार) का है, जिसमें डीईओ साहब दरभंगा में डीपीओ भोला कर्ण की शादी में शामिल होते नजर आ रहे हैं। उनके साथ सरकारी स्कॉर्पियो (रजिस्ट्रेशन संख्या BR 26 PA 6207) भी साफ दिख रही है, जो विभागीय जांच व निरीक्षण कार्यों के लिए मुहैया कराई गई थी।

सरकारी गाड़ी के रेंट एग्रीमेंट और खर्च पर सवाल
मिली जानकारी के मुताबिक, यह गाड़ी रेंट कॉन्ट्रैक्ट पर पवन कुमार सिंह नामक व्यक्ति के नाम रजिस्टर्ड है। विभाग और गाड़ी मालिक के बीच प्रति माह 1400 किलोमीटर के उपयोग का अनुबंध होता है, जिसके एवज में 50-60 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है। अब डीईओ साहब एक यात्रा में ही करीब 600 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं, ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बाकी किलोमीटर के लिए क्या वह ईंधन का खर्च निजी तौर पर उठाएंगे या इसे भी विभागीय भ्रमण बताकर भरपाई की जाएगी?

गाड़ी के कागजात भी पाए गए अमान्य, गंभीर सुरक्षा सवाल
एम परिवहन ऐप से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस स्कॉर्पियो गाड़ी का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट, बीमा और फिटनेस प्रमाणपत्र तीनों ही खत्म हो चुके हैं। इसका मतलब है कि यह गाड़ी किसी भी तरह से सड़क पर चलने के योग्य नहीं है। अगर इस दौरान कोई हादसा होता, तो जिम्मेदार कौन होता?

बिना अनुमति मुख्यालय से बाहर निकले डीईओ, क्या ली थी परमिशन?
नियम के अनुसार, किसी भी जिला स्तरीय अधिकारी को मुख्यालय से बाहर जाने के लिए जिलाधिकारी और संबंधित विभाग से पूर्व अनुमति लेनी होती है। अब सवाल है कि क्या डीईओ सुरेंद्र कुमार ने दरभंगा जाने से पहले यह अनुमति ली थी? यदि नहीं, तो यह स्पष्ट रूप से नियम उल्लंघन है।

जब संपर्क किया गया, डीईओ साहब ने कॉल रिसीव नहीं किया
डीईओ सुरेंद्र कुमार से उनका पक्ष जानने के लिए उनके सरकारी मोबाइल नंबर +91 85444 11020 पर संपर्क किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। सरकारी प्रावधानों के अनुसार, किसी भी अधिकारी को छुट्टी के दिन भी सरकारी कॉल उठाना या बाद में कॉल बैक करना अनिवार्य होता है। लेकिन डीईओ साहब की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

शिक्षा विभाग की साख पर सवाल, शीर्ष अधिकारी साधे हुए हैं चुप्पी
दिलचस्प बात यह है कि विभाग के एसीएस एस. सिद्धार्थ खुद व्यवस्था सुधारने में जुटे हैं- कभी ट्रेन, कभी टेम्पो से स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं, वहीं उनके अधीनस्थ अधिकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना कर रहे हैं। डीईओ की यह हरकत न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि विभागीय साख पर भी सीधा हमला है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या एसीएस और जिलाधिकारी डीईओ सुरेंद्र कुमार के खिलाफ कोई कार्रवाई करेंगे, या फिर मामला यूं ही ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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