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‘शादी से पहले करवानी पड़ती है नसबंदी’, पूर्व माओवादी ने अमित शाह को सुनाई हैरान करने वाली कहानी

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जगदलपुर

माओवादियों की शब्दावली में नसबंदी एक बहुत ही आम शब्द है। काडर के जो सदस्य शादी करना चाहते हैं, उसे भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के वरिष्ठ आकाओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर किया जाता है। एक पूर्व माओवादी को शादी से पहले इस प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था। सालों बाद, जब उसने सरेंडर किया तो उसने नसबंदी तोड़ने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई। अभी वह एक लड़के का पिता है। यह बात रविवार को सरेंडर करे चुके एक नक्सली ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से बताई। उसने कहा कि मैं अकेला नहीं हूं जिसकी नसबंदी की गई बहुत से लोग हैं।

नक्सली ने कहा कि बहुत से लोग हैं जो सरेंडर करने के बाद मुख्यधारा में लौटते हैं और परिवार शुरू करने के लिए नसबंदी के उलट दूसरी सर्जरी करवाते हैं। शाह से बातचीत करते हुए कहा पूर्व नक्सली ने कहा, ‘‘जब मैं भाकपा (माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे नसबंदी करानी पड़ी थी। लेकिन जब मैंने हथियार छोड़ दिए और मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक और ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं। दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बना।’’

संगठन में नसंबदी करना अनिवार्य
उसने बताया कि प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों के बीच यह धारणा है कि बच्चों की देखभाल से उनका ध्यान भटकेगा और इससे उनके आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा। यह भी आशंका है कि शादी करने वाले कार्यकर्ता आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं। इसकी वजह से विवाह करने वाली किसी भी काडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है। सुकमा जिले के आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली मरकम दुला ने बताया, ‘‘नक्सली कार्यकर्ताओं के लिए शादी करने से पहले नसबंदी करवाना अनिवार्य है। नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य अपनी संतानों के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े। इसलिए आगे का रास्ता केवल नसबंदी है।’’ पूर्व नक्सली सुकांति मारी ने बताया, ‘‘मेरे साथी काडर से विवाह करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करानी पड़ी।’’ मारी का पति पुलिस मुठभेड़ में मारा गया जिसके बाद उसने अधिकारियों के सामने सरेंडर कर दिया।

सरेंडर कर चुके नक्सलियों को शाह ने दिलाया भरोसा
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के साथ बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि उन्हें इस बात से बेहद संतोष है कि देश के युवाओं को हिंसा की निरर्थकता का एहसास हो गया है और उन्होंने हथियार डाल दिए हैं। उन्होंने शेष नक्सलियों से हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है।

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