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अखिलेश पर तंज या रिटायरमेंट का मन? यूपी की राजनीति की चर्चा में क्यों आया शिवपाल यादव का ये ट्वीट

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लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर शिवपाल यादव का ट्वीट कई बड़े सवाल खड़े कर रहा है। इसमें वे नया विहान न होने और अवसान की बात करते दिख रहे हैं। हाल के दिनों में जिस प्रकार से उन्होंने सपा को घेरना शुरू कर दिया है, उसके बाद उनके ट्वीट के कई मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक पंडिंतों का दावा है कि यह ट्वीट समाजवादी पार्टी को निशाना बनाकर किया गया है। सपा के अवसान की बात कर रहे हैं। सपा से जुड़े विशेषज्ञों का दावा है कि शिवपाल यादव अब रिटायरमेंट की बात कर रहे हैं। शिवपाल यादव ने अपने ट्वीट में कहा है कि पहले साल 2014, फिर साल 2017, फिर साल 2019 और इसके बाद साल 2022…। अब आज के बाद आगे नया विहान नहीं, मार्ग अवसान की तरफ जाता दिख रहा है।

शिवपाल यादव के ट्वीट का सीधा अर्थ समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महाधिवेशन से जुड़ता दिखता है। समाजवादी पार्टी का प्रदेश में लगातार प्रदर्शन खराब हुआ है। यूपी में वर्ष 2012 का विधानसभा चुनाव शिवपाल यादव के प्रदेश अध्यक्ष के रहते लड़ा गया था। इस चुनाव में सपा ने 224 सीटों पर जीत दर्ज पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई गई थी। भले ही इस पूरे चुनाव का क्रेडिट अखिलेश यादव ले उड़े। मुलायम और शिवपाल की जोड़ी और उनकी रणनीति का बड़ा योगदान था।

यूपी चुनाव 2012 में जीत के बाद मुलायम ने अखिलेश को सत्ता सौंप दी। शिवपाल हाशिए पर चले गए। इसके बाद पार्टी में भी उनकी हनक कम होती गई। अखिलेश पूरे मामले में निर्णय लेने वाले नेता के रूप में खुद को स्थापित करते चले गए। शिवपाल के ट्वीट का अर्थ यह दिखता है कि 2012 के बाद वर्ष 2014 के चुनाव में सपा को महज 5 लोकसभा सीटों पर जीत मिली। वहीं, यूपी चुनाव 2017 में शिवपाल पूरी तरह अलग-थलग हो गए। सपा 47 सीटों पर सिमटी। इसके बाद आम चुनाव 2019 में सपा और बसपा का गठबंधन हुआ। इसके बाद भी पार्टी केवल 5 सीटों पर जीत पाई और गठबंधन को 15 सीटें मिली।

शिवपाल ने अपने ट्वीट में 2022 की भी चर्चा की है। इसमें अखिलेश ने चाचा को अपने साथ मिलाया। हालांकि, उन्हें पार्टी का टिकट थमाकर इटावा और यादवलैंड में सीमित कर दिया गया। सपा को इस चुनाव में 111 सीटों पर जीत मिली। लेकिन, चुनाव के बाद ही शिवपाल को नजरअंदाज किया जाना शुरू किया गया। आजमगढ़ और रामपुर में लोकसभा का उप चुनाव हुआ। इसमें पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक पंडितों का मत है, इस ट्वीट के जरिए शिवपाल सपा के अवसान की बात कर रहे हैं। खुद के अवसान की तरफ जाने की बात नहीं कर रहे। शिवपाल तो अब अपनी पार्टी को मजबूत करने के लिए पुराने दिग्गजों को जोड़ रहे हैं।

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