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शहीद की पत्नी की वो आखिरी इच्छा… बंद कमरे में आधे घंटे तक गुजारी वक्त, बाहर गूंजते रहे भारत माता की जय के नारे

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सिवान

भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान शहीद हुए बिहार के रहने वाले आर्मी जवान रामबाबू सिंह का पार्थिव शरीर उनके गांव पहुंचा। उनका गांव वसिलपुर सिवान जिले के बड़हरिया प्रखंड में है। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। छह महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी। अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग उमड़ पड़े। उनकी पत्नी और मां पार्थिव शरीर से लिपटकर रोती रहीं। अंतिम संस्कार से पहले सेना के जवानों ने उनकी पत्नी से आखिरी इच्छा पूछी, जिसे सुनकर सभी भावुक हो गए।

भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर रामबाबू की शहादत
रामबाबू सिंह भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान बॉर्डर पर तैनात थे। पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था। वे बिहार के सिवान जिले के रहने वाले थे। उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव वसिलपुर लाया गया। ये गांव बड़हरिया प्रखंड में है। रामबाबू सिंह की शादी को अभी छह महीने ही हुए थे। उनके अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग जमा हुए। जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचा, तो उनकी मां और पत्नी उससे लिपटकर रोने लगीं। वहां का माहौल बहुत ही गमगीन था। सेना के जवानों ने अंतिम संस्कार करने से पहले उनकी पत्नी से उनकी आखिरी इच्छा के बारे में पूछा। ये सुनकर वहां मौजूद सभी लोग भावुक हो गए।

अंतिम इच्छा सुनकर हर कोई हुआ भावुक
सेना के जवान रामबाबू के पार्थिव शरीर को लेकर उनके गांव पहुंचे। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। जैसे ही शहीद का पार्थिव शरीर उनके घर के दरवाजे पर पहुंचा, वहां मौजूद महिलाएं जोर-जोर से रोने लगीं। उनकी मां अपने बेटे के पार्थिव शरीर से लिपटकर विलाप कर रही थीं। उनकी पत्नी अंजली का रो-रोकर बुरा हाल था। उनकी मां उन्हें ढांढस बंधा रही थीं। शहीद की मां बार-बार अपने बेटे का नाम लेकर बेहोश हो जा रही थीं। लोग उनकी पत्नी और मां को संभालने की कोशिश कर रहे थे। जब सेना के अधिकारियों ने पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले शहीद की पत्नी से कोई आखिरी इच्छा पूछी, तो उनकी पत्नी ने ऐसा जवाब दिया कि हर कोई भावुक हो गया।

शहीद के शव के साथ आधे घंटे तक कमरे में रही पत्नी
शहीद की पत्नी अंजलि ने सेना के अफसरों से कहा, ‘वो चाहती हैं कि अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले रामबाबू के पार्थिव शरीर को उनके कमरे तक ले जाया जाए।’ ये सुनकर सेना के जवान तुरंत पार्थिव शरीर को उनके कमरे तक ले गए। लगभग आधे घंटे तक कमरा बंद रहा और रामबाबू के परिजन अंदर रहे। इसके बाद, रामबाबू का पार्थिव शरीर बाहर लाया गया और सभी ने नम आंखों से उन्हें विदाई दी। रामबाबू सिंह की शादी को सिर्फ छह महीने ही हुए थे। शादी के बाद वे ज्यादातर समय ड्यूटी पर ही रहे। जिस दिन वे शहीद हुए, उस दिन भी उन्होंने सुबह अपनी पत्नी से फोन पर बात की थी। उन्होंने शाम को फिर से कॉल करने का वादा किया था। लेकिन, अचानक ही उनके शहादत की खबर उनके परिवार को मिली।

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