चंडीगढ़/अमृतसर। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने प्रदेश के निजी स्कूलों की मनमानी और वीआईपी ढर्रे पर लगाम लगाने के लिए एक बेहद सख्त कानून लाने की घोषणा की है। बुधवार को चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीएम भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से फीस नहीं बढ़ा पाएगा और न ही अभिभावकों को किसी विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर कर सकेगा।
अमृतसर में फीस के दबाव और मानसिक प्रताड़ना के चलते 12वीं की होनहार छात्रा अमजोत कौर द्वारा आत्महत्या किए जाने की दुखद घटना से आहत होकर सरकार ने यह बड़ा फैसला लिया है। नए प्रावधानों के तहत अब पंजाब के सभी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्कूलों पर ‘पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 2026’ लागू होगा, जिसके तहत स्कूल सालाना अधिकतम 5 प्रतिशत ही फीस बढ़ा सकेंगे। इतना ही नहीं, जिन स्कूलों ने पिछले 3 सालों में 15 फीसदी से अधिक फीस वसूली है, उन्हें वह अतिरिक्त राशि अभिभावकों को हर हाल में वापस करनी होगी।
इसके लिए सरकार जल्द ही एक अध्यादेश (ऑर्डिनेंस) जारी करेगी, जिसे आगामी मानसून सत्र में कानून के रूप में पारित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने पूर्ववर्ती कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2019 में स्कूलों को असीमित फीस बढ़ाने की छूट दी गई थी, जिसे अब पूरी तरह रद्द किया जा रहा है और पारदर्शी व्यवस्था के लिए हर साल स्कूलों का सरकारी ऑडिट कराया जाएगा। सीएम ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ‘नो ड्यूज’ या बकाया फीस के नाम पर बच्चों को रोल नंबर न देना, डिग्री रोकना या क्लास के कोने में खड़ा कर प्रताड़ित करने वाले स्कूल मैनेजमेंट के खिलाफ हत्या के प्रयास जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और डीईओ (DEO) कार्यालय में लंबित सभी पुरानी शिकायतों की दोबारा जांच कर दोषियों को सजा दी जाएगी।
