विशाखापत्तनम
यह घटना किसी रील लाइफ जैसी है। ट्रेन में सफर कर रही एक महिला को प्रसव का दर्द हुआ। चलती ट्रेन में मौजूद अंतिम वर्ष की एक मेडिकल छात्रा ने उसकी मदद की और महिला की डिलीवरी ट्रेन में करवाई गई। मामला सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम दुरंतो एक्सप्रेस का है। हालांकि प्रसव समय से पहले हुआ था, लेकिन बच्ची और उसकी मां की हालत ठीक है। श्रीकाकुलम की 28 वर्षीय महिला की यह पहली डिलीवरी है।
आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले के नरसरावपेट की 23 वर्षीय के स्वाति रेड्डी एमबीबीएस के अंतिम वर्ष में हैं। वह अभी तक एक योग्य डॉक्टर नहीं है, लेकिन उन्होंने डिलीवरी करवाकर महिला और उसकी बच्ची की जान बचाई। स्वाति ने बताया कि घटना एसी की थर्ड बोगी में हुई जिसमें वह यात्रा कर रही थीं।
’45 मिनट बेहत खतरे वाले रहे’
स्वाती ने बताया, ‘मैं बहुत चिंतित और डरी हुई थी क्योंकि मैंने इससे पहले कोई डिलीवरी नहीं करवाई थी। महिला की भी यह पहली डिलीवरी थी। फिर भी महिला के दर्द को देखते हुए मैंने रिस्क लेना बेहतर समझा। इससे पहले, मैंने अस्पताल में प्रोफेसरों की डिलीवरी करवाने में सहायता की थी, मुझे वही अनुभव काम आया। शुरुआत में मैं चिंतित थी क्योंकि 45 मिनट तक प्लेसेंटा बाहर नहीं आया था। जब बच्चा बाहर आया तो मुझे राहत मिली।’
प्रसव के लिए घर जा रहा था कपल
गर्भवती महिला और उसका पति हैदराबाद के रहने वाले हैं। दोनों हैदराबाद में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। दोनों प्रसव की तारीख नजदीक आते ही अपने पैतृक स्थान श्रीकाकुलम जा रहे थे। महिला को प्रसव पीड़ा तड़के करीब साढ़े तीन बजे शुरू हुई। यात्रियों ने मदद के लिए गुहार लगानी शुरू की। डॉक्टर ने सुबह 4.40 बजे आवाज सुनी। उन्होंने डिलीवरी करवाई और बच्चे का जन्म सुबह 5.35 बजे हुआ था।
डिलीवरी के डेढ़ घंटे बाद अस्पताल पहुंची बच्ची और मां
स्वाति ने कहा कि हालांकि अन्नावरम के पास सुबह 5.35 बजे प्रसव हुआ, लेकिन उन्हें अस्पताल खोजने में डेढ़ घंटे लग गए क्योंकि विजयवाड़ा और विशाखापत्तनम के बीच कोई स्टॉपओवर नहीं था। अनाकापल्ली स्टेशन पर एक ‘108’ एम्बुलेंस तैयार रखी गई थी। मां और नवजात को एनटीआर सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया जहां बच्ची को इनक्यूबेटर में रखा गया। मेडिकल छात्र मां और बच्चे के साथ अस्पताल पहुंची।
