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निकालने वाले वो कौन… किन्नर अखाड़े से निष्कासन पर भड़कीं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, ममता कुलकर्णी पर दो टूक जवाब

Published on

प्रयागराज

किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया है। उन्हें अखाड़े से भी बाहर कर दिया गया है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास के आरोपों पर भी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने जवाब दिया है। वहीं बॉलीवुड एक्ट्रेस ममता कुलकर्णी जिन्हें महामंडलेश्वर बनाने के कारण विवाद शुरू हुआ था, उन पर भी उन्होंने जवाब दिया है।

आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बताया कि मेरा पद किसी एक व्यक्ति की नियुक्ति या सहमति पर आधारित नहीं था। 2015-16 उज्जैन कुंभ में 22 प्रदेशों से किन्नरों को बुलाकर अखाड़ा बनाया था। मुझे आचार्य महामंडलेश्वर चुना गया। उस वक्त ऋषि अजय दास हमारे साथ थे। 2017 में वे शादी कर उज्जैन आश्रम बेचकर, पैसा लेकर मुंबई चले गए। उनके कर्मों की वजह से उन्हें बर्खास्त कर दिया था। अगर वह संस्थापक रहते तो किन्नर अखाड़े में रहते। कंप्यूटर बाबा के आश्रम में क्या कर रहे हैं। अब ऋषि अजय दास से हमारे वकील बात करेंगे। उन पर कानूनी कार्रवाई भी करेंगे।

चरित्र को कलंकित करने की कोशिश-लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी
ममता कुलकर्णी से जुड़े आरोपों के संदर्भ में, मैं स्पष्ट रूप से इनकार करती हूँ कि मैंने किसी भी धार्मिक उपाधि या सम्मान को बिना उचित परंपराओं का पालन किए प्रदान किया हो। किन्नर अखाड़े की कोई भी वैध परंपरा बिना उचित प्रक्रिया के किसी को राष्ट्र-विरोधी ठहराने या केवल पृष्ठभूमि के आधार पर बाहर करने का समर्थन नहीं करती। सनातन धर्म करुणा, परिष्कार और आध्यात्मिक एकीकरण को महत्व देता है। यह कहना कि मैंने देशहित के विपरीत काम किया या किन्नर अखाड़े के सिद्धांतों से भटककर अनुचित व्यक्तियों को उपाधियाँ दीं, नितांत भ्रामक है और मेरे चरित्र को कलंकित करने का प्रयास मात्र है।

लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी कौन हैं?
किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया गया। अब इस मामले की चर्चा है। उनका जन्म 13 दिसंबर 1980 को महाराष्ट्र के ठाणे में हुआ था। उन्होंने मुंबई के मीठीबाई कॉलेज से स्नातक और भरतनाट्यम में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 2002 में उन्होंने ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए एक गैर-लाभकारी संगठन शुरू किया। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की कोशिशों के चलते सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर को ‘तीसरे लिंग’ के रूप में मान्यता दी। वर्ष 2015 में उन्हें किन्नर अखाड़े की पहली महामंडलेश्वर बनाया गया।

ममता को लेकर उठा सवाल
ममता कुलकर्णी के महामंडलेश्वर बनने के बाद काफी सवाल उठ रहे हैं। ममता को लेकर संत समाज की ओर से कई प्रकार के सवाल उठाए जा रहे थे। किन्नर अखाड़े में इस फैसले को लेकर भीतरखाने विरोध की भी खबरें आने लगी थी। लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी वर्ष 2008 में संयुक्त राष्ट्र में एशिया प्रशांत का प्रतिनिधित्व करने वाली पहली ट्रांसजेंडर व्यक्ति हैं।

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