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Tuesday, May 5, 2026
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महाराष्ट्र में क्या किसी उद्योगपति के इशारे पर फिर होगा खेला? सियासी अटकलें तेज, जानें क्या चल रहा है

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मुंबई

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में महायुति की प्रचंड जीत के बाद देवेंद्र फडणवीस के फिर से सीएम बनने के बाद राज्य की राजनीति तेजी से बदल रही है। उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र सामना में ‘अभिनंदन देवाभाऊ’ के बाद महाराष्ट्र की राजनीतिक गरमाई हुई है। चर्चा है कि समंदर की तरह फिर लौटकर आए देवेंद्र फडणवीस के लिए 2025 का साल काफी नई संभावनाओं वाला है। चर्चा है कि राज्य में अगर सबकुछ ठीक रहा तो एक बार फिर से बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। फडणवीस के सिर पर जहां महायुति की जीत का सेहरा बंधा है तो अब विपक्षी दलों की तारीफ ने उनके आत्मविश्वास को दोगुना कर दिया है।

‘सामना’ के बाद सुले ने की तारीफ
देवेंद्र फडणवीस को सीएम बने अभी सिर्फ एक महीना हुआ है। शिवसेना यूबीटी के मुखपत्र सामना मे जिस तरह से उनकी तारीफ हुई। उसने राजनीतिक पंडितों के कान खड़े कर दिए हैं। सवाल है क्या अंदरखाने कुछ चल रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले विश्लेषक दयानंद नेने कहते हैं। राजनीति में कोई स्थायी शत्रु और मित्र नहीं होता है बल्कि परिस्थितियां सबकुछ तय करती हैं। आने वाले दिनों में अगर को बड़ा घटनाक्रम हो जाए तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

उद्योगपति की तरफ से पहल
शीर्ष सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र में पर्दे के पीछे राजनीतिक घटनाक्रम चल रहा है। एक प्रमुख उद्योगपति कथित तौर पर एक ही राजनीतिक परिवार की दो प्रतिद्वंद्वी पार्टियों को एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही बीजेपी के पूर्व सहयोगी पार्टी फिर से एकजुट होने की संभावना तलाश रही है। यदि ऐसा होता है, तो निश्चित तौर पर नया खेला होगा, ऐसी स्थिति सरकार में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के आने भी लेकर चर्चा हो रही है। बीच में जब राज ठाकरे से उद्धव की पत्नी रश्मि ठाकरे मिली थीं तो सवाल खड़ा हुआ कि भाभी होकर दो भाईयों के टूटे रिश्ते के धागों को वह जोड़ पाएंगी?

मुश्किल है पर असंभव नहीं
पिछले दिनों अजित पवार की मां ने खुद ही पूरे परिवार के एकजुट होने से जुड़ा बयान दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि उन्होंने इसके लिए भगवान से प्रार्थना की है। इसके बाद प्रफुल्ल पटेल ने शरद पवार के बारे में कहा था कि वे हमारे लिए देवता जैसे हैं। इसके बाद सुप्रिया सुले ने जो भी बयान दिया था उसमें उन्होंने कहा था कि परिवार के तौर पर कोई संघर्ष नहीं है, विचारधारा की चुनौती है। राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि महाराष्ट्र की राजनीति के चाचा-भतीजे का एक साथ आना मुश्किल हैं लेकिन असंभव नहीं है।

क्या है आशा पवार की इच्छा?
महाराष्ट्र चुनावों के दौरान आशा पवार का कहना था कि एक मां होने के कारण मुझे ऐसा लगता है कि मेरे बेटे अजित को मुख्यमंत्री होना चाहिए। लोगों की तरह मैं भी अजित पवार को मुख्यमंत्री बनते हुए देखना चाहती हूं। आगे क्या होगा, ये तो मैं नहीं बता सकते। देखते हैं। बारामती के सभी लोग हमारे अपने हैं। हर कोई अजित से प्यार करता है। अब देखना यह है सामना में तारीफ के बाद जो सियासत गरमाई है वहां कहां तक पहुंचती है।

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