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महाराष्ट्र को 1.72 लाख करोड़ का झटका, वेदांत के बाद टाटा का प्रोजेक्ट भी हाथ से निकला

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मुंबई:

महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे सरकार को डेढ़ महीने में दूसरा झटका लगा है। पिछले महीने 1.5 लाख करोड़ रुपये का वेदांत-फॉक्सकॉन प्रोजेक्ट उसके हाथ से निकल गया था। अब 22,000 करोड़ रुपये का टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट भी महाराष्ट्र के हाथ से निकल गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को गुजरात के वडोदरा में टाटा-एयरबस के प्रोजेक्ट की आधारशिला रखेंगे। इस प्लांट में सी-295 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बनाए जाएंगे। इसके लिए इंडियन एयरफोर्स ने 2021 में 21,935 करोड़ रुपये की डील की थी। इसके लिए टाटा की अगुवाई वाला एक कंसोर्टियम वडोदरा में प्लांट लगा रहा है। एयरफोर्स को 56 ऐसे एयरक्राफ्ट देने के लिए टाटा ने एयरबस डिफेंस एंड प्रोजेक्ट के साथ हाथ मिलाया है। ये विमान पुराने पड़ चुके एवरो विमानों की जगह लेंगे।

इस प्रोजेक्ट को घरेलू एयरोस्पेस क्षेत्र को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना के तहत पहली बार कोई प्राइवेट कंपनी देश में मिलिट्री एयरक्राफ्टा बनाने जा रही है। इस विमान का इस्तेमाल सिविल कामों उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। समझौते के तहत एयरबस चार साल के भीतर स्पेन में अपनी अंतिम असेंबली लाइन से 16 विमानों की आपूर्ति करेगी। इसके बाद 40 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। एयरक्राफ्ट में 96 फीसदी स्वदेशी कलपुर्जे लगाए जाएंगे। वडोदरा में शिलान्यास समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सिविल एविएशन मिनिस्टर ज्योतिरादित्य सिंधिया और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल भी शामिल होंगे।

कब बनेगा पहला विमान
पहला मेड-इन-इंडिया विमान सितंबर 2026 में मिलने की उम्मीद है। वायु सेना के अधिकारियों के मुताबिक यह विमान एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड्स (एएलजी) और यहां तक कि बिना तैयार रनवे से भी ऑपरेट हो सकेगा। विमान लगभग 40-45 पैराट्रूपर्स या लगभग 70 यात्रियों को ले जा सकता है। यह पहली मौका है जब सी-295 विमान का निर्माण यूरोप के बाहर किया जाएगा। सी-295एमडब्ल्यू 5-10 टन क्षमता का एक परिवहन विमान है जो भारतीय वायु सेना के पुराने एवरो विमान की जगह लेगा। इसमें फास्ट रिस्पांस के लिए एक ‘रियर रैंप’ दरवाजा और सैनिकों और सामान के पैरा ड्रॉपिंग की सुविधा होगी है।

इस प्रोजेक्ट से गुजरात में हजारों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। लेकिन महाराष्ट्र के लिए इसे झटका माना जा रहा है। महाराष्ट्र के इंडस्ट्रीज मिनिस्टर उदय सामंत ने 15 सितंबर को दावा किया था कि भले ही वेदांत प्रोजेक्ट राज्य के हाथ से निकल गया लेकिन टाटा-एयरबस प्रोजेक्ट नागपुर में स्थापित होगा। लेकिन गुरुवार को उन्होंने कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है। महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के एक अधिकारी के मुताबिक तीन साल पहले टाटा के अधिकारियों ने नागपुर में इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन की जानकारी मांगी थी।

महाराष्ट्र को दोहरा झटका
पिछले महीने वेदांत-फॉक्सकॉन का प्रोजेक्ट भी महाराष्ट्र के हाथ से निकल गया था। इसे पुणे में लगाया जाना था और इस बारे में बातचीत अंतिम चरण में थी। इस प्रोजेक्ट से गुजरात में करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। कंपनी ने पुणे में सेमीकंडक्टर यूनिट लगाने के लिए राज्य सरकार से बातचीत शुरू की थी। लेकिन 13 सितंबर को इस प्रोजेक्ट के गुजरात में लगने की आधिकारिक घोषणा हो गई।

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