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मोदी सरकार के दबाव में ट्रैक पर लौटी चाइनीज कंपनिंयां, जिद छोड़ भारत में बनाएंगी Phone

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पीएम मोदी की लीडरशिप में केंद्र सरकार चाइनीज कंपनियों पर लगातार दबाव डालती रही है कि वो भारत में स्मार्टफोन प्रोडक्शन करें। कुछ चाइनीज कंपनियां पहले से भारत में स्मार्टफोन प्रोडक्शन करती रही है। वही कुछ चाइनीज कंपनियां अपने चुनिंदा स्मार्टफोन मॉडल का प्रोडक्शन भारत में करती रही है। हालांकि अब चाइनीज कंपनियां भारत में बड़े पैमाने पर स्मार्टफोन का प्रोडक्शन शूरू करने जा रही हैं।

स्मार्टफोन का घरेलू स्तर पर होगा प्रोडक्शन
चीन की सबसे बड़ी मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी बीबीके ग्रुप भारत में स्मार्टफोन प्रोडक्शन के लिए भारतीय स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों जैसे डिक्सन टेक्नोलॉजीज और कार्बन ग्रुप के साथ साझेदारी में है। इस साझेदारी के तहत BBK कंपनी ओप्पो, वीवो और रियलमी स्मार्टफोन का लोकल प्रोडक्शन करेगी। दरअसल चाइनीज कंपनियां लोकल पार्टनर के साथ स्मार्टफोन का निर्माण करेगी, जिससे प्रोडक्शन लिंक्ड इनिशिएटिव (पीएलआई) योजना का फायदा मिलेगा।

सीधे निवेश से बच रही चाइनीज कंपनियां
चाइनीज कंपनियां जैसे ओप्पो और वीवो का भारत में पहले से एक बड़ा स्मार्टफोन प्लांट है। इसके बावजूद वो लोकल स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर रही है। ऐसे में भारत में ओप्पो, वीवो, रियलमी, वनप्लस और आईक्यू ब्रांड के स्मार्टफोन बनाए जाएंगे। रिपोर्ट की मानें, तो चाइनीज स्मार्टफोन कंपनियां पिछले कुछ सालों से सीमा शुल्क और आयकर चोरी से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग की वजह से अपने प्लांट की बजाय सीधे निवेश करने से बच रही है। साथ ही चाइनीज कंपनियों के खाते सीज कर दिए गए हैं।

10 लाख मंथली प्रोडक्शन
वीवो और रियलमी ने हाल ही में कार्बन प्लांट में कुछ हैंडसेट का निर्माण शुरू किया है। वही वीवो और ओप्पो डिक्सन के साथ साझेदारी कर सकता है। फिलहाल, कार्बन प्लांट में वीवो और रियलमी का मंथली प्रोडक्शन 10 लाख यूनिट है।

पीएलआई स्कीम का फायदा लेने की होड़
बता दें कि ओप्पो और वीवो ने पीएलआई स्कीम के लिए आवेदन नहीं किया था। ऐसे में पहले ऐसा कर चुके स्मार्टफोन निर्माताओं के साथ साझेदारी करके चाइनीज कंपनियों को फायदा मिलने की संभावना है, क्योंकि सैमसंग पहले से पीएलआई स्कीम के लिए आवेदन कर चुकी है। इस मामल में ओप्पो, वीवो, रियलमी, कार्बन और डिक्सन का जवाब नहीं आया है।

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