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ब्रिटेन में नौकरी पाना होगा मुश्किल, विदेशी वर्कर्स की आबादी कम करने का प्लान, जानें क्या होगा असर

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ब्रिटेन में नौकरी और पढ़ाई के लिए जाने की तैयारी कर रहे भारतीयों की परेशानी बढ़ने वाली है। ब्रिटेन में विदेशी लोगों की आबादी बढ़ती जा रही है और अब सरकार इसे कम करने का प्लान कर रही है। दरअसल, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने देश में आने वाले लोगों की संख्या कम करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा है कि वह पॉइंट्स-बेस्ड इमिग्रेशन सिस्टम में बदलाव करेंगे। पीएम ने ब्रिटिश वर्कर्स को ट्रेनिंग देने और विदेशी कामगारों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री की तरफ से नए इमिग्रेशन प्लान का ऐलान ऐसे समय पर किया गया है, जब हाल ही में विदेशी लोगों की संख्या को लेकर एक नया आंकड़ा सामने आया है। इसमें बताया गया है कि जून 2023 तक नेट माइग्रेशन 9,06,000 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। नेट माइग्रेशन का मतलब है कि देश छोड़ने वालों की तुलना में देश में आने वालों की संख्या कितनी ज्यादा है। ये दिखाता है कि ब्रिटेन में लाखों की संख्या में विदेशी नागरिक हैं, जो यहां की कंपनियों में नौकरी कर रहे हैं।

कंजर्वेटिव सरकार पर लगाया इमिग्रेशन बढ़ाने का आरोप
स्टारमर ने पिछली कंजर्वेटिव सरकार की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पुरानी सरकार की नीतियों की वजह से विदेशी लोगों की संख्या बढ़ी है। पीएम ने इस बढ़ोतरी के लिए कुप्रबंधन और ब्रेक्जिट से जुड़े फैसलों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा, “इस पैमाने पर विफलता सिर्फ दुर्भाग्य नहीं है, ब्रेक्जिट का इस्तेमाल ब्रिटेन को खुली सीमाओं वाले ‘एक राष्ट्र के प्रयोग’ में बदलने के लिए किया गया था।” मतलब ब्रेक्जिट के बाद बहुत से लोग ब्रिटेन आने लगे, जिससे समस्याएं बढ़ीं।

इमिग्रेशन को लेकर क्या सुधार होंगे?
प्रधानमंत्री ने पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम के तहत वीजा नियमों में बदलाव के कदम बताए। यह सिस्टम कंजर्वेटिव सरकार ने 2021 में शुरू किया था। इस सिस्टम में लोगों को उनकी स्किल और क्वालिफिकेशन के आधार पर वीजा मिलता है। स्टारमर ने कहा कि बदलाव उन इंडस्ट्रीज को टारगेट करेंगे जो इमिग्रेशन पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। उन इंडस्ट्रीज को स्थानीय वर्कर्स को ट्रेंड करने में निवेश करना होगा।

स्टारमर ने कहा, “स्किल्ड वर्कर रूट या शॉर्टेज ऑक्यूपेशन लिस्ट के लिए आवेदनों के साथ अब हमारे देश में लोगों को ट्रेनिंग करने की नई उम्मीदें जुड़ी होंगी।” मतलब, अगर कंपनियां विदेशी कामगार रखना चाहती हैं, तो उन्हें पहले ब्रिटिश लोगों को ट्रेनिंग देनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न करने वाली कंपनियों पर विदेशी कामगारों को रखने पर प्रतिबंध लग सकता है। इस वजह से अब विदेशी लोगों के लिए नौकरी ढूंढना मुश्किल हो जाएगा।

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