नई दिल्ली,
भारतीय बाजारों पर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों का भरोसा कायम है और उनकी ओर से लगातार निवेश किया जा रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एफपीआई (FPI) ने जुलाई महीने में अब तक शेयर बाजारों में 33,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इन्वेस्टमेंट किया है. इससे पिछले महीने यानी जून 2024 में इन निवेशकों ने जमकर निवेश किया था, जबकि मई महीने में इनकी बेरुखी देखने को मिली थी और जमकर निकासी की गई थी.
26 जुलाई तक विदेश से आया इतना निवेश
भारत के लिए विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार गुड न्यूज आ रही है और उनका भारतीय बाजारों में निवेश बढ़ता जा रहा है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशकों या FPI ने जुलाई महीने में अब तक (26 जुलाई 2024) 33,688 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया है. देश में पॉलिसी रिफॉर्म्स की उम्मीद से लेकर कंपनियों के शानदार तिमाही नतीजों ने विदेशी निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाला है और ये उनके द्वारा किए जा रहे निवेश में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई दे रहा है.
बजट में हुए ऐलान से सेंटिमेंट पर ये असर
रिपोर्ट के मुताबिक, फॉरेन इन्वेस्टर्स के सेंटिमेंट पर बीते 23 जुलाई 2024 को संसद में पेश किए गए मोदी 3.0 के पहले बजट (Union Budget 2024) में किए गए ऐलानों का हालांकि, नकारात्मक असर दिखाई दिया है. दरअसल, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान फ्यूचर एंड ऑप्शंस ट्रेड (F&O) पर और इक्विटी इन्वेस्टमेंट से कैपिटल गेन्स पर टैक्स में बढ़ोतरी जैसे कुछ ऐलान किए थे. इसके अगले दिन यानी 24 जुलाई से बीते सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन 26 जुलाई तक महज तीन कारोबारी दिनों में ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से 7,200 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है.
Bond मार्केट में भी आया निवेश
डिपॉजिटरी के आंकड़ों पर गौर करें तो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने जुलाई महीने में एक ओर जहां शेयरों में अपने निवेश को तेज किया, तो वहीं डेट या बॉन्ड मार्केट में भी खूब इन्वेस्टमेंट किया है. यहां 26 जुलाई तक 19,223 करोड़ रुपये का निवेश आया है. बॉन्ड बाजार में FPI का निवेश साल 2024 में अब तक 87,847 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है.
मई में निकासी, तो जून में दनादन निवेश
इससे पहले विदेशी निवेशकों का रुख जून महीने में भी बुलिश नजर आया था और FPI की ओर से जून में 26,565 करोड़ रुपये का निवेश शेयरों में किया गया था. हालांकि, इससे पिछले मई महीने में FPI की बेरुखी देखने को मिली थी और देश में उस समय लोकसभा चुनाव के नतीजों पर असमंजस की स्थिति और मॉरीशस के साथ भारत की कर संधि में बदलाव समेत अन्य कारणों के चलते जमकर निकासी की गई थी. रिपोर्ट की मानें तो मई में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 25,586 करोड़ रुपये निकाले थे.
