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सरकार का आया बयान, इस बैंक को बेचने के प्लान में कोई फेरबदल नहीं!

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नई दिल्ली,

पब्लिक सेक्टर के बैंक आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) के विनिवेश को लेकर प्रक्रिया सही ट्रैक पर है. डिपार्टमेंट ऑफ इन्वेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने कहा कि ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि सरकार आईडीबीआई बैंक के चार अरब डॉलर के विनिवेश को टाल सकती है. लेकिन ये अटकलें भ्रामक हैं, क्योंकि निजीकरण की डील सही रास्ते पर है.

चार अरब डॉलर की विनिवेश योजना
कुछ समाचार रिपोर्टों ने दावा किया गया कि केंद्र सरकार चार अरब डॉलर के आईडीबीआई बैंक के निजीकरण की योजना टाल सकती है. इसके पीछे की वजह मार्केट के उतार-चढ़ाव को बताया गया. रिपोर्ट में कहा गया कि बाजार में अभूतपूर्व उतार-चढ़ाव संभावित खरीदारों को प्रभावित कर सकता है. इस वजह से सरकार IDBI Bank विनिवेश को टाल सकती है.

मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि बाजार में अस्थिरता और आईडीबीआई बैंक के शेयर प्राइस में गिरावट के कारण, सरकार डील को क्लोज करने से पहले मार्केट के स्थिर होने की प्रतीक्षा कर सकती है. इसमें कहा गया था कि सरकार योजना को टालने के बारे में सोच रही है, क्योंकि 60.72 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री से उसे अनुमानित मूल्य से कम कीमत मिल सकती है.

कितनी है सरकार की हिस्सेदारी?
सरकार और जीवन बीमा निगम (LIC) दोनों के पास आईडीबीआई बैंक में 94.71 फीसदी की हिस्सेदारी है. इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 45.48 फीसदी है, तो वहीं LIC का हिस्सा 49.24 फीसदी है. सरकार ने सात अक्टूबर 2022 को आईडीबीआई बैंक के एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के लिए बोलियां आमंत्रित की थीं. कुल मिलाकर सरकार और जीवन बीमा निगम (LIC) मिलकर आईडीबीआई बैंक में 60.72 फीसदी की हिस्सेदारी बेच रही है.

DIPAM ने ट्वीट कर दी जानकारी
DIPAM ने ट्वीट कर कहा कि आईडीबीआई बैंक के विनिवेश को टालने को लेकर मीडिया के एक वर्ग से आ रही है खबरें भ्रामक, काल्पनिक और निराधार हैं. आईडीबीआई बैंक का निजीकरण भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के लिए अपनी तरह का पहला सौदा होगा, क्योंकि सरकार को उम्मीद है कि यह दो सरकारी बैंकों की बिक्री के लिए मंच तैयार करेगा. सेबी ने IDBI Bank की शेयरहोल्डिंग रिक्लासिफिकेशन को मंजूरी दे दी थी.

वित्त मंत्री किया था ऐलान
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी 2021 में बजट पेश करते हुए IDBI बैंक के अलावा दो और सरकारी बैंकों के निजीकरण का ऐलान किया था. लेकिन कोरोना संकट की वजह से मामला अटक गया था. सरकार ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए 65 हजार करोड़ रुपये के विनिवेश का टारगेट सेट किया था.

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