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Thursday, March 12, 2026
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‘हीरो नहीं तो अंडरवर्ल्ड में होता’, नाना पाटेकर ने खुद को कहा हिंसक, बोले- इतने लोगों को पीटा कि नाम तक याद नहीं

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एक्टर नाना पाटेकर अपने गुस्सैल स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। ‘परिंदा’ और ‘खामोशी’ जैसी फिल्मों के सेट पर एक्टर की तीखी नोकझोंक की कई घटनाएं हुई हैं। हाल ही में, नाना पाटेकर ने खुद भी माना कि वह काफी हिंसक तरह के आदमी हैं और कहा कि अगर वह एक्टर नहीं होते, तो शायद ‘अंडरवर्ल्ड में’ होते। उन्होंने कहा कि अभिनय से उन्हें अपनी दबी हुई भावनाओं को बाहर निकालने का मौका मिलता है।

सिद्धार्थ कन्नन से बात करते हुए एक्टर ने कहा, ‘लोग मुझसे डरते थे। मैं बहुत हिंसक था। मैं ज्यादा नहीं बोलता था, मैं अपने काम से सबसे बात करता था। मैं अब कम हिंसक हूं लेकिन आज भी अगर कोई मुझे उकसाता है तो मैं उसकी पिटाई कर देता हूं। अगर मैं एक्टर नहीं बनता तो अंडरवर्ल्ड में होता। मैंने कोई मज़ाक नहीं किया। मैं इसे लेकर बेहद गंभीर हूं। एक्टिंग ने मुझे एक आउटलेट दिया। यह मेरे लिए अपनी हताशा दूर करने का एक तरीका बन गया। मैंने बहुत से लोगों को पीटा है। मुझे उनमें से कई के नाम याद नहीं हैं। मेरे बहुत सारे झगड़े हुए हैं।’

संजय लीला भंसाली से भी हुआ झगड़ा
उन्होंने ‘खामोशी’ के सेट पर फिल्म निर्माता संजय लीला भंसाली के साथ अपनी लड़ाई को भी याद किया और कहा, ‘संभावना है कि मैं संजय लीला भंसाली के साथ काम पर लौटूंगा लेकिन मुझे लगता है कि जिस तरह से मैंने उन पर चिल्लाया, उन्हें बुरा लगा होगा। उसके बाद हमने काम नहीं किया। ऐसा नहीं है कि इस लड़ाई से हमारे जीवन में कोई फर्क पड़ा।’

मैं असभ्य हूं, कुछ भी बोल दूंगा
उन्होंने कबूल किया, ‘मुझे संजय के साथ काम करने की याद आती है, लेकिन समस्या यह है कि मैं बहुत असभ्य हूं। मैं बहुत खराब बातें बोलता हूं। इससे वो परेशान हो गए होंगे। हालांकि मैंने कभी उनसे कुछ भी क्लियर करने की कोशिश नहीं की। इतने लंबे समय से एक-दूसरे को जानने का क्या फायदा, अगर हमें ये छोटी-छोटी बातें एक-दूसरे को समझानी ही पड़े? मैं इसे अपनी गलती के रूप में भी नहीं देखता। देखते हैं, समय आने पर हम इसे सुलझा लेंगे।’

भंसाली के साथ सीन को लेकर बहस
इससे पहले ‘द लल्लनटॉप’ से बात करते हुए नाना पाटेकर ने संजय लीला भंसाली के साथ अपनी लड़ाई पर बात की थी। उन्होंने कहा, ‘सीमा बिस्वास के किरदार में, मेरी पत्नी, को दिल का दौरा पड़ता है। हम दोनों मूक हैं और वह मेरे पीछे है। मैं ताश खेल रहा हूं। मुझे नहीं पता कि मेरे पीछे क्या हो रहा है। अब, संजय चाहते थे कि मैं पीछे मुड़कर देखूं। उन्होंने कहा कि वह मेरी पत्नी हैं और हमारे बीच नॉन-वर्बल कनेक्शन है। मुझे अंदर से महसूस होना चाहिए कि मेरे पीछे कुछ हो रहा है, इसलिए मुझे घूम जाना चाहिए। मैंने उनसे पूछा कि जब मैं नहीं जानता कि क्या हो रहा है तो मुझे पीछे क्यों मुड़ना चाहिए?’

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