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Tuesday, April 28, 2026
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IMF ने तो डरा दिया… खाने पीने की चीजों की महंगाई भारत को पड़ सकती है भारी

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नई दिल्ली

इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड का कहना है कि वैश्विक कारणों से भारतीय इकॉनमी को आने वाले दिनों में जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें दुनियाभर के बैकों के ब्याज दरों में बढ़ोतरी और यूक्रेन में जारी जंग का प्रभाव जारी है। साथ ही खाने पीने की चीजों की महंगाई भी भारत को भारी पड़ सकती है। आईएमएफ इंडिया की मिशन चीफ Nada Choueiri ने कहा कि आने वाले दिनों में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी हो सकती है। साथ ही यूक्रेन में जारी जंग समाप्त होने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इनका भारत पर ब्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।

Choueiri ने ब्लूमबर्ग टीवी के साथ एक इंटरव्यू में यह बात कही। इससे पहले आईएमएफ ने हाल ही में इस फाइनेंशियल ईयर के लिए भारत की जीडीपी ग्रोथ के अनुमान को 06 फीसदी घटाकर 6.8 फीसदी कर दिया था। यह अमेरिका के बाद किसी भी बड़े देश के जीडीपी अनुमान में की गई सबसे बड़ी कटौती की है। आईएमएफ का कहना है कि भारत में इस साल महंगाई की औसत दर 6.9 फीसदी रह सकती है। दुनियाभर में कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आई है लेकिन खाने पीने की चीजें महंगी हुई है।

महंगाई से निपटना चुनौती
Choueiri ने कहा कि भारत के लिए खाने पीने की चीजों की महंगाई से निपटना एक बड़ी चुनौती है। इसने आरबीआई के काम को मुश्किल बना दिया है। उन्होंने कहा कि महंगाई को कम करने के लिए और उपाय किए जाने की जरूरत है। उम्मीद है कि अगले साल से महंगाई में कमी आनी शुरू होगी।देश में सितंबर में खुदरा महंगाई 7.41 फीसदी पहुंच गई जो पांच महीने में इसका उच्चतम स्तर है। यह लगातार नौवां महीना है जब महंगाई आरबीआई के संतोषजनक स्तर से ऊपर बनी हुई है। नियम के मुताबिक अब आरबीआई को इस बारे में सरकार को जवाब देना पड़ेगा।

महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक मई से ब्याज दरों में 190 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर चुका है। दिसंबर में इसमें फिर 50 बेसिस अंक की बढ़ोतरी के कयास लगाए जा रहे हैं। Choueiri ने कहा कि डिमांड को कम करने और महंगाई को रोकने लिए फिर ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने की जरूरत है। लेकिन साथ ही आपको इकॉनमी का भी ध्यान रखना है। यह एक मुश्किल प्रक्रिया है क्योंकि एक तरफ आपको ग्रोथ बनाए रखनी है और दूसरी तरफ महंगाई को काबू में लाना है। इसमें संतुलन कायम करना आसान नहीं है।

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