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Tuesday, March 24, 2026
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6G की तैयारी के लिए साथ आए भारत और अमेरिका, मिलकर करेंगे काम, साइन हुआ MoU

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ई दिल्ली,

5G के बाद अब दुनिया 6G की तरफ बढ़ रही है. भारत में भी 6G की तैयार शुरू हो चुकी है. दुनियाभर में तमाम देशों ने 6G पर रिसर्च शुरू कर दिया है. टेलीकॉम सेक्टर में भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण साझेदारी हुई है. ATIS’ Next G Alliance और Bharat 6G Alliance के बीच एक MoU साइन हुआ है. इस MoU के तहत दोनों ही एलायंस 6G वायरलेस टेक्नोलॉजी से क्षेत्र में एक दूसरे का सहयोग करेंगे और नए मौकों को तलाशेंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस समझौते का स्वागत किया है.

क्या है Next G Alliance?
ATIS’ Next G Alliance या फिर Next G Alliance का उद्देश्य 6G और उसके आगे की टेलीकम्युनिकेशन इंडस्ट्री में अमेरिका को मजबूत करना है. खासकर इसका फोकस नॉर्थ अमेरिका है. ये एलायंस 5G की अगली पीढ़ी पर भी काम कर रहा है.इस एलायंस में विभिन्न अमेरिकी कंपनियां, सरकारी एजेंसी और एकेडमिक इंस्टीट्यूट शामिल हैं, जो एक दूसरे के साथ मिलकर टेलीकम्युनिकेशन की फील्ड में काम कर रहे हैं.

अमेरिका और भारत के बीच हुई साझेदारी
PMO की ओर से जारी बयान में बताया गया है, ‘ये एलायंस 5G और 6G टेक्नोलॉजी के विकास और रिसर्च में एक दूसरे का सहयोग करेंगे.’ इस साझेदारी के तहत एक प्रमुख भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर अमेरिकी मैन्युफैक्चर्र के 5G ओपन रेडियो एक्सेस सिस्टम के पायलेट प्रोजेक्ट में हिस्सा ले सकेगा.

ये बैठक शुक्रवार को हुई है, जब G20 में हिस्सा लेने अमेरिका राष्ट्रपति नई दिल्ली पहुंचे हैं. इस बैठक में सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर भी बातचीत हुई है. साझा बयान में दोनों नेताओं ने US रिप एंड रिप्लेस प्रोग्राम में भारतीय कंपनियों की भागीदारी के लिए उत्‍सुकता प्रकट की है. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने संयुक्त राज्य अमेरिका में रिप एंड रिप्लेस पायलट के लिए भारत के समर्थन का स्वागत भी किया.

क्या है US रिप एंड रिप्लेस प्रोग्राम?
US रिप एंड रिप्लेस प्रोग्राम साल 2020 में लागू किया गया था. इस प्रोग्राम के तहत सभी अमेरिकी कंपनियों ने चीनी कंपनियों Huawei और ZTE के बनाए टेलीकॉम इक्विपमेंट्स को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर से बाहर निकाल दिया. उस वक्त अमेरिका ने चीन पर कॉमर्शियल सीक्रेट चुराने का आरोप लगाया था. इसी दौरान अमेरिका में इन चीनी कंपनियों को ब्लॉक भी किया गया.

इसके साथ ही अमेरिका ने क्वांटम क्षेत्र में भारत के साथ द्विपक्षीय रूप से और अंतरराष्ट्रीय क्वांटम अदान-प्रदान अवसरों को सुविधाजनक बनाने के मंच ‘क्वांटम एंटैंगमेंट एक्सचेंज’ के माध्यम से मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है.‘क्वांटम इकोनॉमिक डेवलपमेंट कंसोर्टियम’ के सदस्य के रूप में भारत के एस एन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज, कोलकाता की भागीदारी का स्वागत किया है.

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