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इम्पोर्ट ड्यूटी में कटौती कर सकता है भारत लेकिन… फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने रख दी शर्त

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नई दिल्ली

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि भारत इम्पोर्ट टैरिफ में कुछ ढील देने पर विचार कर सकता है बशर्ते इससे घरेलू कंपनियों को नुकसान न पहुंचे। उनकी इस टिप्पणी से भारत की व्यापार नीतियों में संभावित नरमी का संकेत मिलता है। सीतारमण का बयान अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस टिप्पणी के बाद आया है जिसमें उन्होंने भारत को सबसे ज्यादा टैरिफ वसूलने वाला बताया था। ब्लूमबर्ग के मुताबिक सीतारमण ने मंगलवार को नई दिल्ली में रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही।

वित्त मंत्री ने कहा कि ‘हमने जो भी टैरिफ लगाया है, उसे समझाना संभव है।’ सीतारमण ने कहा कि भारतीय कंपनियों की सुरक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है। सरकार आयात पर टैरिफ हटा सकती है, बशर्ते कि इससे देश की विनिर्माण क्षमता में बाधा न आए। उन्होंने कहा, ‘मुझे दोनों में संतुलन बनाना है।’ ट्रंप ने अमेरिकी वस्तुओं पर ज्यादा इम्पोर्ट ड्यूटी लगाने के लिए भारत जैसे देशों पर ज्यादा टैरिफ लगाने की बात कही है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ी ट्रेडिंग पार्टनर है। पिछले वित्त वर्ष में दोनों के बीच दोतरफा व्यापार $119.7 अरब रहा। पांच साल में इसमें एक तिहाई से अधिक बढ़ोतरी हुई है।

ट्रंप के आने का फायदा-नुकसान
इस बीच भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा बढ़ रहा है जो प्रतिबंधात्मक शुल्कों के बावजूद भारत की निर्यात शक्ति को दर्शाता है। अमेरिकी बाजार में भारत की बढ़ती उपस्थिति कुछ क्षेत्रों में उसकी प्रतिस्पर्धी बढ़त को उजागर करती है। यह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के विकसित होने और व्यापार नीतियों में बदलाव के कारण देश को लाभ होने की अच्छी स्थिति में रखती है। एलारा कैपिटल की एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप का दूसरा कार्यकाल में भारत की इकॉनमी पर मिलाजुला असर देखने को मिल सकता है।

ट्रंप की नीतियों का भारतीय के कुछ निर्यातों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव संभव है। लेकिन आईटी, फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज और डिफेंस जैसे क्षेत्रों को ट्रंप की अपेक्षित आर्थिक और विदेशी नीतियों से लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही चीन पर ट्रंप का सख्त रुख भी भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है। चीन से अमेरिकी निवेश भारत आ सकता है। यह भारतीय बाजारों को सपोर्ट करेगा और विनिर्माण को बढ़ावा देगा। सप्लाई चेन पहले ही भारत की ओर आने लगी हैं और ट्रंप 2.0 में इस प्रवृत्ति में तेजी आ सकती है।

टैरिफ विवाद
ट्रंप के पिछले कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका संबंधों में उल्लेखनीय प्रगति हुई। ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छी केमिस्ट्री है। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने भारत को ‘टैरिफ किंग’ करार दिया था। अगस्त में एक इंटरव्यू में उन्होंने भारत में उच्च आयात शुल्क की आलोचना की थी। 2019 में अमेरिका ने स्टील और एल्युमीनियम आयात पर बढ़े टैरिफ से भारत को छूट देने का अनुरोध किया था। लेकिन अमेरिका ने इससे इन्कार कर दिया था। इसके जवाब में भारत ने कई अमेरिकी वस्तुओं पर जवाबी टैरिफ लगाया। ट्रंप ने टैरिफ विवादों के बीच भारत का प्रीफेरेंशियल ट्रेड स्टेटस भी हटा दिया था।

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