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‘सेलिब्रिटीज से जलते हैं लोग..?’ रणवीर- समय रैना के विरोध के बीच रफ्तार ने ये क्यों ल‍िखा

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समय रैना के शो में यूट्यूबर रणवीर इलाहबाद‍िया ने ऐसा कमेंट कर दिया कि देश भर में बवाल मच गया. रणवीर को पसंद करने वाले भी अब उनसे नफरत करने लगे हैं, उनको अनफॉलो करने लगे हैं. उनके खिलाफ कई राज्यों में एफआईआर तक दर्ज हो गया. सोशल मीडिया से शुरू हुआ मामला संसद तक जा पहुंचा है.

लोग उनकी गिरफ्तारी की भी मांग कर रहे हैं. इन यूट्यूबर्स को हर तरफ से तिरस्कार, गालियां और नफरत भरे कमेंट का सामना करना पड़ रहा है. इन सारी कंट्रोवर्सी के बीच मशहूर रैपर रफ्तार ने इंस्टा स्टोरी पर अपने ऐसे विचार रखे, जिसे लोग समय रैना और रणवीर से जोड़कर देख रहे हैं. रैपर ने ‘शैडेनफ्रॉयड’ शब्द के जरिये इंसानी सोच का एक ऐसा पक्ष रखा है, जिस पर हम सभी को एक बार गंभीरता से विचार जरूर करना चाहिए.

रफ्तार ने पोस्ट में क्या ल‍िखा ?
लोग अक्सर सफल व्यक्तियों को असफल होते देखना पसंद करते हैं.

1. ससांस्कृतिक आकर्षण: हम मशहूर हस्तियों और उच्च उपलब्धि हासिल करने वालों की प्रशंसा करते हैं, लेकिन उनकी गलतियों पर जल्दी से उन्हें जज करते हैं. यह पैटर्न प्राचीन कथाओं से लेकर आधुनिक मीडिया तक देखा गया है.

2. मीडिया का प्रभाव: मीडिया स्कैंडल्स को सनसनीखेज बनाकर इस प्रवृत्त‍ि को बढ़ाता है, जिससे हमारी जिज्ञासा और ड्रामा देखने की इच्छा को हवा मिलती है.

3. शाडेनफ्रॉयड की मनोविज्ञान (दूसरों की दुर्दशा से सुख): इसका मतलब है दूसरों की असफलताओं से आनंद पाना. इसके पीछे कुछ कारण हैं- सामाजिक तुलना: सफल लोगों को असफल होते देखकर हमें अपनी कम‍ियों के प्रति बेहतर महसूस होता है.

ईर्ष्या और राहत: जब वे लोग असफल होते हैं, जिनसे हम ईर्ष्या करते हैं, तो यह अस्थायी रूप से हमारे मन की जलन को कम कर देता है.

न्याय की भावना: जब घमंडी या नैतिक रूप से गलत लोगों को परिणाम भुगतते हुए देखते हैं, तो संतोष महसूस होता है.

4. नकारात्मक प्रभाव: यह चक्र ‘कैंसल कल्चर’ और नकारात्मकता को बढ़ावा दे सकता है, जिससे बड़े सामाजिक मुद्दों से ध्यान भटकता है और लोगों को उच्च लक्ष्यों की ओर बढ़ने से हतोत्साहित करता है.

5. निष्कर्ष: यह सोचने लायक है कि हमें ऐसा क्यों महसूस होता है और यह वास्तव में न्याय की चाहत है या फिर हमारी अपनी असुरक्षाओं को शांत करने का तरीका..

आख‍िर ये शैडेनफ्रॉयड है क्या?

शैडेनफ्रॉयड असल में एक जर्मन शब्द है, जिसे इंग्लिश में schaden यानी नुकसान (Damage) और freude यानी जॉय (Joy) यानी हिंदी में इसे किसी के नुकसान से मिलने वाली खुशी कहा जा सकता है. मनोवैज्ञान‍िक इस धारणा को मानव व्यवहार से जोड़कर अध्ययन करते हैं. उदाहरण से समझ‍िए अगर किसी फिसलन भरी जगह में जहां मिट्टी और कीचड़ है. एक के बाद एक दो तीन लोग लगातार फ‍िसल जाते हैं, तो उनके दोस्त या वहां आसपास खड़े बच्चे भी हंसने लगते हैं. लेकिन, यह स्लैपस्ट‍िक यानी हास्य बोध है. इस धारणा में दुर्भावनापूर्ण खुशी में एक ऐसी जटिल भावना छुपी होती है, जो एकदम अप्रत्यक्ष होती है. यद‍ि ठोकर मारकर पेनल्टी शॉट को गोल में बदल द‍िया जाता है तो यह दुर्भावनापूर्ण खुशी नहीं है, क्योंकि इसमें प्रयास शामिल है. लेकिन अगर आनंद तब होता है जब हम किसी दूसरे के दुर्भाग्य में शामिल नहीं होते हैं तो इसे शैडेनफ्रॉयड कहा जाएगा.

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