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सूख गया रूस का कुआं! नवंबर में कच्चे तेल के आयात में 55% गिरावट, जानिए क्या है वजह

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नई दिल्ली

यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस के भारी मात्रा में कच्चे तेल का आयात किया। लेकिन नवंबर में भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात घटकर जून, 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया है। एक यूरोपीय शोध संस्थान की मासिक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। हालांकि, इसके बावजूद रूस अब भी भारत के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था और उसके बाद भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया। उससे पहले रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद 1% से कम थी, जो बढ़कर 40 प्रतिशत पर पहुंच गई। भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है।

यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से इसलिए हुई क्योंकि रूसी कच्चा तेल डिस्काउंट पर उपलब्ध था। प्राइस लिमिट और यूरोपीय देशों के रूस से कच्चा तेल खरीदने से बचने की वजह से रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध दूसरे देशों के कच्चे तेल से कम कीमत पर मिल रहा था। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा कि नवंबर में भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात में 55% की भारी गिरावट आई। यह जून, 2022 के बाद का सबसे निचला आंकड़ा है।

रूस से खरीदारी
हालांकि, रूस अब भी भारत के लिए सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। रूस के बाद इराक और सऊदी अरब का स्थान है। सीआरईए ने बिना कोई सटीक आंकड़े दिए कहा कि रूस के कच्चे तेल निर्यात का 47% चीन ने खरीदा है। उसके बाद भारत (37%), यूरोपीय संघ (6%) और तुर्की (6%) का स्थान है। नवंबर में ब्रेंट क्रूड की तुलना में रूस के यूराल ग्रेड वाले कच्चे तेल पर डिस्काउंट में पिछले महीने के मुकाबले 17% की वृद्धि हुई और यह औसतन 6.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई। ईएसपीओ ग्रेड पर छूट में 15% की भारी कमी आई और यह औसतन 3.88 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर कारोबार कर रहा था, जबकि सोकोल मिश्रण पर यह दो प्रतिशत घटकर 6.65 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया।

रूस द्वारा भारत को मुख्य रूप से ईएसपीओ और सोकोल ग्रेड का कच्चा तेल बेचा जाता है। कच्चे तेल के अलावा भारत ने रूस से कोयला की भी सीमित खरीदारी की। सीआरईए के अनुसार 5 दिसंबर 2022 से नवंबर 2024 के अंत तक चीन ने रूस के कुल कोयला निर्यात का 46% खरीदा। उसके बाद भारत (17 प्रतिशत), तुर्की (11 प्रतिशत), दक्षिण कोरिया (10 प्रतिशत) और ताइवान (पांच प्रतिशत) शीर्ष पांच खरीदारों की सूची में शामिल हैं। सभी फॉसिल फ्यूल को एक साथ लिया जाए, तो भारत नवंबर में रूसी जीवाश्म ईंधन के सबसे बड़े खरीदारों की सूची में तीसरे स्थान पर आ गया।

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