नई दिल्ली,
अमेरिका की रेटिंग में गिरावट और चीन की अर्थव्यवस्था में सुस्ती के पुख्ता संकेत मिलने के बावजूद भारत की इकोनॉमी इस सबसे बेअसर फुल स्पीड से दौड़ने में लगी है. इस दावे की वजह है जुलाई में आर्थिक संकेतकों का प्रदर्शन जो भारतीय अर्थव्यवस्था में दमखम को बयान कर रहा है. जुलाई में जिस तरह से GST कलेकशन बढ़ा है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी क्षेत्रों में डिमांड बनी हुई है.
कारों की बिक्री में हुआ इजाफा इसका गवाह बन गया है. इसके साथ ही जुलाई में नई नौकरियों के मौकों में हुई ग्रोथ बढ़कर 2 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है. वहीं UPI ट्रांजेक्शंस का आंकड़ा लगातार हर महीने रिकॉर्ड तोड़ रहा है जिसका सिलसिला जुलाई में भी जारी रहा. उधर बिजली की खपत में हुई बढ़ोतरी और रेलवे की फ्रेट लोडिंग में हुआ इजाफा भी इस बात का सबूत है कि भविष्य केवल भारत का है और अब इस रफ्तार को थामने का किसी में साहस नहीं है.
GST कलेक्शन की बड़ी छलांग
GST कलेक्शन में बीते साल के जुलाई से 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और ये पिछले महीने 1.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है. जुलाई 2022 में 1.49 लाख करोड़ रुपये का GST कलेक्शन हुआ था. जुलाई 2017 में GST की शुरुआत के बाद से ये केवल पांचवां मौका है जब GST संग्रह 1.6 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है. इसको बढ़ाने में डिमांड के साथ साथ सरकार की GST रोकने के लिए की गई सख्ती भी शामिल है. ऐसे में अब GST चोरी पर काफी हद तक लगाम लगी है जिसकी वजह से ये कलेक्शन लगातार बढ़ता जा रहा है. इसे बढ़ाने में सबसे बड़ा रोल सर्विसेज का है जो लोगों की बढ़ती खपत का संकेत है.
जुलाई में कारों की बिक्री का बना रिकॉर्ड
ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने अब तक के सबसे अच्छे डिस्पैच जुलाई में किए हैं. कार कंपनियों की डीलर्स को भेजे जाने वाली कारें 3,52,500 के साथ अबतक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं. ये आंकड़ा जुलाई 2022 के मुकाबले 3.1 फीसदी ज्यादा है. इससे पता चलता है कि भारत में कारों की डिमांड में मजबूती बनी हुई है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत में इस साल की पहली छमाही में करीब 47 हजार सुपरलग्जरी कारों की बिक्री हुई है जो एक नया रिकॉर्ड है. इसी तरह SUV और दूसरी लग्जरी कारों के खरीदारों में भी नई गाड़ियों को खरीदने के लिए होड़ लगी है. इसकी वजह से कारों को खरीदने पर वेटिंग कम होने के लिए तैयार नहीं है.
मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी बरकरार!
जुलाई में एसएंडपी ग्लोबल इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स वैसे तो जून के मुकाबले 0.1 प्वाइंट कम हो गया है. लेकिन PMI अभी भी 57.7 पर है जो मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में तेजी का मजबूत संकेत है. किसी भी परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स में 50 से ऊपर का आंकड़ा विस्तार का संकेत देता है. कारों की बिक्री के रिकॉर्ड से भी देश में मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में हो रही बढ़ोतरी का आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है. PMI डेटा के मुताबिक जुलाई में नए ऑर्डर की डिमांड बढ़ने से प्रॉडक्शन लाइनें चालू रहीं. मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटीज में मजबूती बने रहने से रोजगार में भी बढ़ोतरी हुई है.
जुलाई में रोजगार में 2 साल की सबसे तेज छलांग
भारत में हायरिंग गतिविधियों ने जुलाई ने जबरदस्त उछाल दर्ज किया है. बीते महीने नौकरियों की ऐसी बाढ़ आई कि 2 साल की सबसे ज्यादा ग्रोथ जुलाई में दर्ज की गई. जुलाई में हायरिंग में 18 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया. एक्सफेनो के मुताबिक जुलाई में ओपनिंग की संख्या 2.72 लाख पर पहुंच गई जबकि जून में ये 2.3 लाख थी. हायरिंग गतिविधियों में तेजी आने की वजह मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में आई तेजी, महंगाई दर में आई कमी, खपत में हुई बढोतरी और कैपिटल एक्सपेंडीचर में हुआ इजाफा है.
किन सेक्टर्स में मिल रही हैं सबसे ज्यादा नौकरियां?
जिन सेक्टर्स में हायरिंग बढ़ी हैं उनमें इंफ्रास्ट्रक्चर, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस के साथ ही मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर शामिल हैं. अनुमान है कि अगले 6 से 8 महीनों के दौरान शहरी इलाकों में डिमांड बढ़ेगी इससे अक्टूबर-नवंबर में हायरिंग गतिविधियों में तेज उछाल आ सकता है. हायरिंग के मामले में काफी समय से सुस्त प्रदर्शन कर रहे आईटी सेक्टर ने जुलाई में जोरदार इजाफा दर्ज किया है और बीते महीने आईटी सेक्टर में वैकेंसीज 32 फीसदी बढ़ी हैं, लेकिन ये आंकड़ा अभी भी जुलाई 2022 के मुकाबले 40 फीसदी कम है. इसकी वजह है कि ग्लोबल सुस्ती के बीच कंपनियां फूंक फूंक कर कदम रखी रही हैं. कुछ यही हाल आईटी सर्विसेज सेक्टर में भी देखने को मिल रहा है जहां पर जुलाई में वैकेंसीज 27 फीसदी बढ़ी हैं लेकिन ये आंकड़ा भी जुलाई 2022 के मुकाबले 33 परसेंट कम है.
7 लाख नौकरियों के मौके आएंगे!
2023 की दूसरी छमाही में ई-कामर्स उद्योग में 7 लाख गिग नौकरियों के मौके पैदा हो सकते हैं. गिग नौकरियां उन्हें कहा जाता है जो अस्थाई जॉब्स होती हैं और डिलीवरी वगैरह की नौकरियां इसी कैटेगरी में शामिल हैं. फेस्टिव सीजन में डिमांड बढ़ने के असर से कंपनियां ग्राहकों को बेहतर सेवा मुहैया कराने के लिए इन अस्थायी कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी करेंगी. स्टाफिंग कंपनी टीमलीज सर्विसेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ई-कामर्स कंपनियां ग्राहकों की डिमांड्स को पूरा करने के लिए कमर कस रही हैं. इस साल त्योहारी सीजन में पिछले साल के मुकाबले गिग नौकरियों की संख्या में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की संभावना है. ई-कामर्स उद्योग का ये भरोसा भारत की ग्रोथ स्टोरी को बयान करने के लिए काफी है. फेस्टिव सीजन के दौरान बेंगलुरु, दिल्ली, मुंबई जैसे टियर-1 शहरों में गिग वर्कर्स की मांग तो बढ़ेगी ही इसके साथ ही वड़ोदरा, पुणे और कोयंबटूर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी इनकी संख्या में इजाफा होगा.
पेट्रोल-बिजली की डिमांड बढ़ी
मानसून की वजह से जुलाई में डीजल की डिमांड में तो कमी आई है. लेकिन बीते महीने पेट्रोल की बिक्री में उछाल दर्ज किया गया है. जुलाई में पेट्रोल की बिक्री 3.8 फीसदी बढ़कर 2.76 मिलियन टन पर पहुंच गई. जबकि इस दौरान डीजल की डिमांड 4.3 फीसदी घटकर 6.15 मिलियन टन पर पहुंच गई. वहीं जुलाई में जेट ईंधन की बिक्री 10.3 फीसदी बढ़ी है. इसी तरह जुलाई में बिजली की खपत बढ़कर 139 अरब यूनिट हो गई जो पिछले साल के इसी महीने में 128.4 अरब यूनिट थी. रेलवे ने जुलाई में 123.98 मिलियन टन फ्रेड लोडिंग की है जो एक साल पहले के 122.15 एमटी से 2 फीसदी अधिक है.
जुलाई में बढ़ गए UPI लेनदेन
जुलाई में UPI लेनदेन की संख्या 9.96 अरब तक पहुंच गई जो एक साल पहले के मुकाबले 58 प्रतिशत अधिक है. कुल लेन देन 15.34 लाख करोड़ रुपए का हुआ है जो पिछले साल जुलाई की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक है. इसके पहले सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों से पता चला कि जून में कोर सेक्टर का ग्रोथ रेट 5 महीने के उच्चतम स्तर 8.2 प्रतिशत पर रहा था. RBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार 14 जुलाई तक बैंक क्रेडिट ग्रोथ एक साल पहले की तुलना में 20.2 फीसदी अधिक थी. ऐसे में समझा जा सकता है कि जुलाई के इन आंकड़ों ने 2023-24 की दूसरी तिमाही में तेज रफ्तार से दौड़ने का एक्सप्रेसवे तैयार कर दिया है जो फेस्टिव सीजन के सहारे अक्टूबर-दिसंबर में फुल स्पीड पकड़ने के लिए तैयार है. हालांकि महंगाई, घटता एक्सपोर्ट और ग्लोबल फ्यूल प्राइस इस रफ्तार के सामने ब्रेकर बनने के लिए भी तैयार खड़े हैं.
