नई दिल्ली
भारत ने चीन से आने वाले दो उत्पादों पर डंपिंग रोधी जांच शुरू की है। ये उत्पाद रबर उद्योग में इस्तेमाल होने वाला एक रसायन और नायलॉन फिलामेंट यार्न हैं। वाणिज्य मंत्रालय की जांच शाखा डीजीटीआर इस मामले की जांच कर रही है। डीजीटीआर चीन और वियतनाम से आने वाले नायलॉन फिलामेंट यार्न की डंपिंग की जांच कर रहा है। साथ ही, टीडीक्यू (ट्राइमिथाइल डाइहाइड्रोक्विनोलिन) नाम के रसायन की भी जांच हो रही है। सेंचुरी एन्का, गुजरात पॉलीफिल्म्स और ओरिलॉन इंडिया ने यार्न पर डंपिंग रोधी जांच शुरू करने के लिए आवेदन दिया था। एनओसीआईएल लिमिटेड ने टीडीक्यू के लिए आवेदन दिया है।
डीजीटीआर यानी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमिडीज ने दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। इनमें बताया है कि आवेदकों के लिखित आवेदन पर जांच शुरू की गई है। अगर यह साबित होता है कि डंपिंग से घरेलू कंपनियों को नुकसान हुआ है तो डीजीटीआर इन आयातों पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाने की सिफारिश करेगा। शुल्क लगाने का अंतिम फैसला वित्त मंत्रालय लेता है।
क्या होता है डंपिंग का मतलब?
डंपिंग का मतलब है किसी उत्पाद को दूसरे देश में उसकी वास्तविक कीमत से कम दाम पर बेचना। ऐसा करके विदेशी कंपनियां उस देश के बाजार पर कब्जा करने की कोशिश करती हैं। डंपिंग रोधी जांच यह पता लगाने के लिए की जाती है कि क्या सस्ते आयात के कारण घरेलू उद्योगों को नुकसान हुआ है। इसके खिलाफ कदम उठाते हुए देश WTO के नियमों के तहत डंपिंग रोधी शुल्क लगाते हैं। यह शुल्क निष्पक्ष व्यापार सुनिश्चित करने और घरेलू उत्पादकों के लिए विदेशी उत्पादकों और निर्यातकों के मुकाबले समान अवसर पैदा करने के लिए है।
कहां होता है TDQ और नायलॉन फिलामेंट का इस्तेमाल?
भारत ने पहले ही कई उत्पादों पर चीन समेत कई देशों से सस्ते आयात पर लगाम लगाने के लिए डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। डीजीटीआर ने 2024 में अब तक अलग-अलग उत्पादों पर 43 डंपिंग रोधी जांच शुरू की हैं। इनमें से 34 चीन के खिलाफ हैं। जिन देशों के खिलाफ ये जांच शुरू की गई हैं, उनमें रूस, ताइवान और जापान शामिल हैं। नायलॉन फिलामेंट यार्न का इस्तेमाल कपड़े, टायर और अन्य उत्पाद बनाने में होता है। TDQ रबर उद्योग में इस्तेमाल होने वाला रसायन है।
जांच से क्या पता चलेगा?
यह कदम घरेलू उद्योगों को संरक्षण देने के लिए उठाया गया है। चीन से सस्ते आयात की वजह से भारतीय कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा था। इस जांच से पता चलेगा कि क्या वाकई डंपिंग हो रही है। अगर डंपिंग साबित होती है तो सरकार डंपिंग रोधी शुल्क लगा सकती है। यह शुल्क चीनी उत्पादों को महंगा बना देगा। इससे भारतीय कंपनियों को राहत मिलेगी। यह देखना होगा कि इस मामले में क्या नतीजा निकलता है।
