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Monday, April 27, 2026
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इस बार उल्टी चाल क्यों चल रहा है सोना! महंगाई और यूक्रेन युद्ध के बावजूद आ रही है गिरावट

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नई दिल्ली

सोने (Gold) को सुरक्षित निवेश का सबसे बेहतर साधन माना जाता रहा है। यही वजह है कि जब भी जब भी आर्थिक हालात डगमगाने लगते हैं, निवेशक सोने का रुख करते रहे हैं। इससे सोने की मांग बढ़ जाती है। मांग बढ़ने से इसकी कीमत भी बढ़ जाती है। लेकिन इस बार सोना उल्टी चाल चल रहा है। इससे जानकार भी हैरान हैं। इस साल की शुरुआत में जब यूक्रेन की सीमा पर रूसी सैनिकों का जमावड़ा लगा था तो निवेशकों ने सोने का रुख किया था। इसकी वजह यह थी कि सोना हमेशा ही मुसीबत की घड़ी में खूब चमका है। फरवरी में जब रूसी सैनिक यूक्रेन में घुसे तो सोने में उछाल आ गया। यानी तब तक सबकुछ सोने को लेकर परंपरागत सोच के हिसाब से चल रहा था। लेकिन इसके बाद स्थिति बदल गई। सितंबर में लगातार छठे महीने सोने की कीमत में गिरावट आई।

दुनिया पर मंदी का खतरा मंडरा रहा है, रूस और यूक्रेन के बीच जंग खत्म होने का नाम नहीं ले रही है, महंगाई चरम पर है। यह सोने के लिए कुलांचे मारने का समय था लेकिन इस बार उल्टी गंगा बह रही है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के मैनेजिंग डायरेक्टर (इंडिया ऑफिस) सोमसुंदरम पीआर भी मानते हैं कि इस बार सोना चौंका रहा है। WGC के रिसर्च के मुताबिक मॉडर्न सेंट्रल बैंक्स सोने को लेकर परंपरागत सोच को ज्यादा तरजीह नहीं देते हैं। यूक्रेन में युद्ध और महंगाई से शुरुआत में सोने की कीमत में तेजी आई। लेकिन महंगाई को थामने के लिए केंद्रीय बैंकों ने हाल में जिस तरह ब्याज दरों में बढ़ोतरी की है, उससे डॉलर इंडेक्स कई साल के टॉप पर पहुंच गया है।

गिरावट में भी फायदा
डॉलर की कीमत में बढ़ोतरी और सरकारी बॉन्ड्स पर यील्ड बढ़ने से सोने की चमक फीकी पड़ी है। सोमसुंदरम ने कहा, ‘आज के सीनेरियो में सोना ज्यादा रेलेवेंट हो गया है और अपना काम बखूबी कर रहा है। लेकिन दूसरे फैक्टर्स का शॉर्ट टर्म में ज्यादा असर दिख रहा है।’ सोने का अधिकांश कारोबार डॉलर में होता है। इसका सकारात्मक पहलू यह है कि डॉलर के मुकाबले दूसरे देशों की करेंसी में गिरावट आई है। इससे उन देशों के ग्राहकों को नुकसान नहीं हुआ है। बल्कि कई देशों के ग्राहकों को तो पॉजिटिव रिटर्न मिला है। उदाहरण के लिए सोने की कीमत में गिरावट के बावजूद तुर्की के ग्राहकों को सोने पर रिटर्न मिला है। इसकी वजह यह है कि तुर्की की करेंसी में सोने की कीमत से ज्यादा गिरावट आई है।

चीन के बाद भारत में सोने की सबसे ज्यादा खपत होती है। देश में सालाना 800 से 900 टन सोना खप जाता है। महंगाई के कारण मांग प्रभावित हो सकती है। देश में सोने की 80 फीसदी खपत ज्वेलरी में होती है। देश में सोने की सबसे ज्यादा खपत दिवाली के आसपास फेस्टिव सीजन में होती है। लेकिन इस साल महंगाई के कारण सोने की मांग पर असर पड़ सकता है। सोमसुंदरम ने कहा कि मांग अच्छी है लेकिन महंगाई इस पर असर डाल सकती है।

क्यों गिर रहा है सोना
जानकारों का कहना है कि जियोपॉलिटिकल तनाव और मंदी की आशंका के बावजूद सोने की चमक नहीं बढ़ी है। इसकी वजह यह है कि ज्यादातर निवेशक डॉलर में निवेश कर रहे हैं। डॉलर इंडेक्स करीब दो दशक के टॉप पर है और निवेशक इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहते हैं। साथ ही अमेरिका में 10 साल की मैच्योरिटी वाले बॉन्ड पर यील्ड भी चार फीसदी के करीब है। इन वजहों से सोने की कीमत में गिरावट आ रही है।

Emkay Wealth Management ने एक नोट में कहा है कि ऐतिहासिक रूप से सोने को महंगाई के खिलाफ हेज के रूप में देखा जाता है। अनिश्चितता के दौर में इसे सुरक्षित दांव माना जाता है। लेकिन इस बार उल्टा हो रहा है। कई देशों में महंगाई चरम पर है। लेकिन सोना पिछले एक महीने से एक सीमित रेंज में ट्रेड कर रहा है। आगे भी यही स्थिति रहने की संभावना है। एक एसेट क्लास के रूप में सोने की प्रॉपर्टी कमजोर हुई है। इसे इस बात से समझा जा सकता है कि अमेरिका, ब्रिटेन और दूसरे कई देशों में महंगाई के चरम पर पहुंचने के बाद भी निवेशक सोने को भाव नहीं दे रहे हैं।

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