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Tuesday, March 3, 2026
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मंत्री कह रहे पर्याप्त है कोयला तो क्यों हो रहा आयात? पावर इंजीनियर्स ने उठाए सवाल,

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नई दिल्ली

ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने उत्पादन कंपनियों द्वारा अनिवार्य कोयला आयात पर सवाल उठाया है। फेडरेशन ने इस अनिवार्यता को खत्म करने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) से हस्तक्षेप की मांग की है। फेडरेशन चाहता है कि बिजली मंत्रालय द्वारा पावर प्लांट्स को कोयले के आयात में तेजी लाने का निर्देश वापस हो। फेडरेशन ने पीएम को एक पत्र लिखकर अपनी मांग रखी है। फेडरेशन का कहना है कि अब कोयला आयात में तेजी लाने की कोई आवश्यकता नहीं है। फेडेरेशन ने कहा कि 25 जुलाई को संसद में कोयला मंत्रालय के जवाब को देखते हुए यह आयात जरूरी नहीं है।

कोयला मंत्री ने कहा था देश में नहीं है कोयले की कमी
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष शैलेन्द्र दुबे ने पीएम को एक पत्र भेजकर प्रभावी हस्तक्षेप करने की अपील की है। फेडरेशन चाहता है कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा राज्यों के बिजलीघरों को 10 फीसदी कोयला आयात करने के लिए जारी सभी निर्देश तत्काल निरस्त हों। फेडरेशन ने पीएम को यह पत्र केंद्रीय कोयला मंत्री द्वारा 25 जुलाई को राज्यसभा में दिए गए एक लिखित उत्तर के बाद लिखा है। इसमें कोयला मंत्री ने कहा कि देश में कोयले की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कोयले का उत्पादन 31 फीसदी बढ़ा है। एआईपीईएफ ने कहा कि बिजली मंत्रालय के निदेर्शो के परिप्रेक्ष्य में आयातित कोयले की अतिरिक्त लागत का बोझ विद्युत मंत्रालय को वहन करना चाहिए।

पर्याप्त घरेलू आपूर्ति ना होने पर लिया था फैसला
पत्र में लिखा गया है कि सात दिसंबर, 2021 को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने 10 फीसदी कोयला आयात करने का फैसला लिया। यह फैसला घरेलू आपूर्ति पर्याप्त नहीं होने के चलते लिया गया। इसके बाद 28 अप्रैल, 2022 को केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने राज्यों को कोयला आयात से जुड़ा एक समयबद्ध निर्देश दिया। इसमें कहा गया कि कोयला आयात तुरंत शुरू किया जाए। इस निर्देश में यह भी लिखा गया कि जो राज्य 15 जून, 2022 तक कोयला आयात करना शुरू नहीं करेंगे, इनका घरेलू कोयले का आवंटन पांच फीसदी कम कर दिया जाएगा।

राज्यों को मजबूरी में देनी पड़ी सहमति
पत्र में कहा गया, ‘‘बिजली मंत्रालय द्वारा प्रशासनिक दबाव के तहत अधिकांश राज्यों को बिजली उत्पादक कंपनियों, ताप विद्युत केन्द्रों के साथ-साथ केंद्रीय क्षेत्र के ताप विद्युत केन्द्रों को कोयले के आयात के लिए सहमति देने के लिए मजबूर किया गया था।’’

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