पटना
बिहार में नीतीश कुमार ने 8वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। नीतीश कुमार ने एक बार फिर तेजस्वी यादव के साथ सरकार बना ली है। इसके साध ही बिहार में दूसरी बार महागठबंधन की सरकार बन गई है। बिहार के डेप्युटी सीएम बनकर सत्ता में दूसरी बार काबिज हुए तेजस्वी यादव की लोकप्रियता में काफी इजाफा हो गया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से तेजस्वी यादव ज्यादा लोकप्रिय हो गए हैं। यह आजतक सी-वोटर का स्नैप सर्वे का अनुमान है।
सीएम पद की पसंद में नीतीश से आगे निकले तेजस्वी
सर्वे में शामिल लोगों से सवाल किया गया था कि बिहार में बेहतर मुख्यमंत्री कौन हो सकता है? इस सवाल के जवाब में 43 प्रतिशत लोगों ने तेजस्वी यादव को बिहार के लिए बेहतर मुख्यमंत्री माना है। जबकि नीतीश कुमार की लोकप्रियता में गिरावट देखने को मिली है। केवल 24 प्रतिशत लोगों ने नीतीश कुमार को बिहार के लिए बेहतर सीएम माना और 19 प्रतिशत लोगों ने बीजेपी नेता को।
NDA के वोट प्रतिशत में गिरावट का अनुमान
सी-वोटर के सर्वे में नीतीश कुमार के महागठबंधन के साथ जाने पर महागठबंध को फायदा होता दिख रहा है। लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को 54 प्रतिशत वोट बिहार में मिले थे। लेकिन आज 10 अगस्त को अगर चुनाव होते हैं तो एनडीए को 13 प्रतिशत वोट का नुकसान होने का अनुमान है। एनडीए को आज की तारीख में बिहार में केवल 41 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है। अगर महागठबंधन की बात करें तो 2019 में महागठबंधन को लोकसभा चुनाव में 31 प्रतिशत वोट मिले थे। लेकिन आज की तारीख में नीतीश कुमार के तेजस्वी के साथ जाने से 15 प्रतिशत का फायदा होता दिख रहा है। आज अगर चुनाव होता है तो महागठबंधन को 46 प्रतिशत वोट मिलने का अनुमान है।
मुस्लिम समाज कहां जाने वाला है?
अगर लोकप्रियता को जातियों के आधार पर बांट दिया जाए, तो यहां भी तेजस्वी, नीतीश कुमार से आगे निकलते दिख रहे हैं. ओबीसी वर्ग में जब मुख्यमंत्री को लेकर सवाल पूछे गए तो पहली पसंद तेजस्वी यादव बने. उन्हें 44.6 फीसदी लोगों ने सीएम की पहली पसंद बताया. वहीं नीतीश को सिर्फ 24.7 फीसदी लोगों ने पसंद किया है. ओबीसी वर्ग में बीजेपी सीएम को 18.4 फीसदी लोगों की स्वीकृति मिल सकती है. बात जब मुस्लिम समुदाय की आती है, तो ये वर्ग भी खुलकर तेजस्वी के पक्ष में जाता दिख रहा है. सी वोटर के मुताबिक वर्तमान में 54 प्रतिशत मुस्लिम तेजस्वी को बेहतर सीएम मान रहे हैं, नीतीश को सिर्फ 30 फीसदी पसंद कर रहे हैं और बीजेपी तो इस रेस से ही बाहर चल रही है और वो 3.3 फीसदी पर सिमटती दिख रही है.
आज हुए चुनाव तो बिहार में घट जाएंगी बीजेपी की लोकसभा सीटें
अब मुख्यमंत्री रेस में तो तेजस्वी भारी पड़े, बात अगर सीटों के आधार पर की जाए तो भी दिलचस्प आंकड़े निकलकर सामने आते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार ने एनडीए के पक्ष में जमकर वोटिंग की थी. तब एनडीए को 54 प्रतिशत वोट मिले थे. लेकिन 2022 अगस्त में ये आंकड़ा घटकर 41 फीसदी पर पहुंच गया है. मतलब तीन साल के अंदर में एनडीए को 13 फीसदी का नुकसान होता दिख रहा है. वहीं जो नुकसान एनडीए को हो रहा है, उसका सीधा फायदा महागठबंधन उठा रहा है. इस गठबंधन को 2019 के लोकसभा चुनाव में 31 प्रतिशत वोट मिले थे.
लेकिन अब जब जमीन पर समीकरण बदले हैं तो इसका फायदा भी महागठबंधन को होता दिख रहा है. इन्हें इस समय 46 फीसदी वोट मिलते दिख रहे हैं. यानी कि सीधे-सीधे 16 फीसदी का उछाल आ रहा है. जब इसी वोट प्रतिशत को सीटों के आधार पर देखते हैं, तो सी वोटर के मुताबिक एनडीए की टैली 14 पर आकर सिमट सकती है. ये पार्टी के लिए बहुत बड़ा झटका साबित हो सकता है क्योंकि 2019 में क्लीन स्वीप करते हुए 39 सीटों पर जीत दर्ज हुई थी. लेकिन नीतीश कुमार के पाला बदलते ही एनडीए को बड़ा नुकसान हो रहा है. वहीं अगर महागठबंधन की बात करें तो उसकी सीटों में उछाल हो सकता है. उसके खाते में 26 सीटें तक आ सकती हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में ये आंकड़ा सिर्फ एक सीट था, लिहाजा नीतीश के आते ही जमीन पर समीकरण पूरी तरह बदल रहे हैं.
