18.4 C
London
Monday, May 4, 2026
Homeराजनीतिशरद पवार से मिलते इतना कॉन्फिडेंट क्यों दिख रहे नीतीश कुमार?

शरद पवार से मिलते इतना कॉन्फिडेंट क्यों दिख रहे नीतीश कुमार?

Published on

नई दिल्ली

देश में आम चुनाव होने में अभी दो साल का वक्त है लेकिन सियासी हवा अभी से जोर पकड़ने लगी है। भाजपा से नाता तोड़ आरजेडी संग सरकार बनाने के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार दिल्ली में संभावनाएं टटोल रहे हैं। उधर, दक्षिण से कांग्रेस के ‘सिपाही’ राहुल गांधी के नेतृत्व में 3500 किमी की यात्रा पर निकल पड़े हैं। भाजपा ने तो 2024 के लिए बाकायदे ताल ठोक दी है। उसने एजेंडा भी सेट कर दिया है कि किन सीटों पर अभी से काम करना होगा और सांसदों के लिए निर्देश जारी हो गए हैं। कोई 2024 की बात करे ना करे, पब्लिक को सियासी दलों का मिशन पता है। फिलहाल बात नीतीश कुमार की, जो तीन दिन के तूफानी दौरे पर आए और धड़ाधड़ विपक्ष के नेताओं के साथ मुलाकात की उनकी तस्वीरें आने लगीं। मीडिया उनसे सवाल करता तो वह मुस्कुराकर कहते कि प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की उनकी कोई इच्छा नहीं है। बुधवार को उन्होंने देश की सियासी नब्ज भांपने वाले महाराष्ट्र के ‘चाणक्य’ NCP प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पवार 2024 के लिए नीतीश को सपोर्ट करेंगे?

गठबंधन के नेता पर फैसला बाद में
पवार के साथ 30 मिनट की बैठक के बाद नीतीश कुमार ने कहा, ‘पवार और मैं दोनों उन विपक्षी ताकतों को एकजुट करना चाहते हैं, जो भाजपा के साथ नहीं हैं। गठबंधन के नेता का फैसला बाद में किया जा सकता है। पहले एक साथ आना जरूरी है।’

राहुल, केजरीवाल से ज्यादा आस नहीं लेकिन…
सियासत में बहुत कुछ नतीजों पर निर्भर करता है। नीतीश ने दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, वामपंथी नेताओं सीताराम येचुरी और डी राजा, समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव और उनके बेटे अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेताओं से मुलाकात की है। हर मुलाकात के बाद वह कहते रहे कि इस भेंट का मकसद विपक्षी दलों को भाजपा के खिलाफ एकजुट करना है और विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनने की उनकी कोई इच्छा नहीं है।

पिछले दिनों तेलंगाना के सीएम केसीआर उनसे मिलने पटना पहुंच गए थे। राहुल गांधी और केजरीवाल खुद अपनी पार्टी को आगे ले जाने की सोच रहे हैं। कांग्रेस पार्टी घोर संकट के दौर से गुजर रही है। पार्टी में बिखराव है और ऐसे में राहुल गांधी से ‘चमत्कार’ की ही उम्मीद बची है। उधर, केजरीवाल के बयानों को देखिए तो वह अपने लिए राष्ट्रीय मंच तैयार करने में अभी से जुट गए हैं। वैसे भी आम आदमी पार्टी का दिल्ली से निकलकर देश में प्रसार उन्हें एक उत्साहजनक माहौल प्रदान कर रहा है। ऐसे में नीतीश को पवार से काफी उम्मीदें हैं। वह गांधी परिवार के भी करीबी हैं।

पवार किंगमेकर रहे हैं…
ऐसे में नीतीश की पवार से मुलाकात का महत्व बढ़ जाता है जिनकी पार्टी महाराष्ट्र में खुद को प्रासंगिक बनाए रखना चाहती है। वह किंगमेकर बनने की ख्वाहिश तो रखते हैं लेकिन राष्ट्रीय पटल पर बड़ी भूमिका की महत्वाकांक्षा नहीं है। कांग्रेस के साथ मिलकर उद्धव सरकार में शामिल रही पवार की पार्टी नीतीश कुमार की पीएम उम्मीदवारी को किस तरह से लेगी, इसे समझने के लिए छह साल पहले 2016 में चलते हैं। हमारे सहयोगी अखबार इकनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में शरद पवार ने तब अपनी भावनाएं खुलकर व्यक्त की थीं।

जब पवार ने कहा था, नीतीश नंबर वन
भाजपा के उत्थान, कांग्रेस के पतन की बात करते हुए जब पवार से पूछा गया था कि क्या वह नीतीश कुमार को आगे राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी भूमिका में देखते हैं? उनका जवाब था, ‘वह मुख्यमंत्री हैं और उन्होंने सफलतापूर्वक राज्य को संभाला है। इससे एक सिग्नल गया है कि जो कांग्रेस और भाजपा से नाखुश हैं वे कंसोलिडेशन चाहते हैं। सिग्नल साफ है कि यही वो शख्स है। दूसरा, उनके बारे में आम धारणा यह बनी है कि वह ईमानदार, मेहनती और गरीबों के हितैषी हैं।’ पवार ने कहा था कि मैं उन्हें पिछले कई सालों से जानता हूं। पवार ने तब मोदी की तरह ही नीतीश को भी बताया था। क्या आपको लगता है कि नीतीश सीएम से पीएम बनने में सक्षम होंगे? इस पर पवार ने कहा था कि अगर विपक्ष को एक साथ आना है और विकल्प तैयार करना है तो उनका नाम पहले नंबर पर है।

जो सवाल आज खड़ा हुआ है, आज से 6 साल पहले भी पवार से यही सवाल किया गया था। क्या एनसीपी नीतीश कुमार को सपोर्ट करेगी? उन्होंने बड़ी साफगोई से कहा था कि आमतौर पर हमारा अप्रोच एक गैर-बीजेपी नेता को समर्थन करना होगा। आपको क्यों लगता है कि नीतीश सबसे प्रभावशाली विपक्षी नेता होंगे? पवार ने कहा था कि क्योंकि वह सीएम हैं और उनके पास अथॉरिटी है।हालांकि इस इंटरव्यू के बाद बिहार की सियासत में कई उतार-चढ़ाव आए। अब नीतीश कुमार को मौका दिख रहा है। बीजेपी के खिलाफ विपक्षी एकता की जो कश्मकश कई सालों से परवान नहीं चढ़ पा रही थी, अब नीतीश के बंधन तोड़ने से फीलगुड का एहसास कराने लगी है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली में इन मुलाकातों के बाद नीतीश का अगला कदम क्या होता है?

Latest articles

नये मध्यप्रदेश का मार्वलस माइलस्टोन साबित होगा इन्दौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 2360 करोड़ की लागत के इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के पहले...

किसके सिर सजेगा ताज : पांच राज्यों की विधानसभा 823 सीटों के लिए आज होगी मतगणना

नई दिल्ली। देश के पांच बड़े चुनावी मोर्चों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और...

जबलपुर बरगी डैम हादसा: राजधानी में बरपा युवा कांग्रेस का कहर

पर्यटन मंत्री के बंगले पर '11 अर्थियाँ' लेकर पहुँचे कार्यकर्ता भोपाल। जबलपुर के बरगी डैम...

8 करोड़ की लागत से बेहतर होगा सड़क परिवहन : राज्यमंत्री गौर

मिसरोद और बरखेड़ा पठानी में क्रमश: 2 करोड़ 68 लाख और 2 करोड़ 70...

More like this

एक जिला एक उत्पाद’ नीति से राजस्थान के स्थानीय उत्पादों को मिल रही वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने...

1 अप्रैल से भोपाल में प्रॉपर्टी खरीदना होगा महंगा, 740 लोकेशन पर बढ़ेगी कलेक्टर गाइड लाइन

भोपाल राजधानी भोपाल में 1 अप्रैल से प्रॉपर्टी खरीदना महंगा हो जाएगा। जिले की कुल...

इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी को बचाने के लिए कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन: पट्टा धारियों के घर तोड़ने की कार्रवाई का विरोध

भोपाल राजधानी के वार्ड 66 स्थित इंद्रपुरी लेबर कॉलोनी के निवासियों के आशियानों पर मंडरा...