गुवाहाटी
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के बीच कई पुराने पन्ने भी खंगाले जा रहे हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने एक तस्वीर पोस्ट की है। इस तस्वीर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू हाफ पैंट में नजर आ रहे हैं। उनकी ड्रेस राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों से मिलती-जुलती दिख रही है। 7 सितंबर को कन्याकुमारी से राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा शुरू हुई। इस वक्त यात्रा केरल में है। भारत जोड़ो यात्रा के बीच कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से एक तस्वीर पोस्ट हुई थी। इसमें आरएसएस की खाकी निकर को जलता हुआ दिखाया गया था। इस तस्वीर पर सियासी तकरार बढ़ा और बीजेपी ने कहा कि ये भारत जोड़ो नहीं आग लगाओ यात्रा है। अब हिमंता बिस्व सरमा ने जो तस्वीर पोस्ट की है उसे कांग्रेस पर ताजा अटैक माना जा रहा है।
हिमंता बिस्व सरमा ने ट्वीट करते हुए जवाहर लाल नेहरू की एक तस्वीर शेयर की है। इसमें सवाल पूछा गया है कि क्या आप उनकी भी हाफ पैंट को जलाएंगे? नेहरू की यह तस्वीर आजादी से पहले की बताई जा रही है। 1939 में अब के प्रयागराज और तब के इलाहाबाद में कांग्रेस सेवा दल का एक सम्मेलन हुआ था। नैनी में हुए इस सम्मेलन में नेहरू भी शामिल हुए थे। आरएसएस की स्थापना से एक साल पहले कांग्रेस सेवा दल बनाया गया था। इसके पहले अध्यक्ष पंडित नेहरू थे। उस दौर मे खाकी रंग के कपड़ों का ही प्रचलन ज्यादा था। सेवादल के कार्यकर्ता श्रमदान करते वक्त हाफ पैंट ही पहनते थे। कई बार नेहरू की इस तस्वीर को आरएसएस की शाखा का बताकर भी सवाल उठाए जा चुके हैं। जब पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी चार साल पहले नागपुर में आरएसएस के मुख्यालय गए थे,
इस तस्वीर में नेहरू ने सफेद रंग की टोपी लगाई हुई है। इंटरनेट पर कांग्रेस सेवा दल और नेहरू की इस ड्रेस में कई तस्वीर उपलब्ध है। आरएसएस के स्वयंसेवक काली टोपी पहनते हैं और नेहरू के शाखा में जाने वाला दावा इस लिहाज से भी गलत साबित हुआ। वायरल तस्वीर में मराठी में लिखा गया था- पं जवाहरलाल नेहरू आणि इतर नैते। इसका मतलब है जवाहर लाल नेहरू दूसरे नेताओं के साथ। साथ ही दूसरी लाइन में लिखा गया- 1939 साली उत्तर प्रदेशयातील नैनी येथील। इसका अर्थ है कि साल 1939 में उत्तर प्रदेश के नैनी में हुआ कार्यक्रम।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नामचीन कार्यकर्ता एचवी शेषाद्री ने हेडगेवार की जीवनी लिखी है। शेषाद्री के अनुसार जनवरी 1920 में एलवी पराजंपे ने भारत स्वयंसेवक मंडल की स्थापना की थी। इसमें हेडगेवार उनके प्रमुख सहयोगी थे। जुलाई के महीने में कोशिश की गई कि स्वंयसेवक मंडल के 1000-1500 स्वयंसेवियों को तैयार किया जाए। इन्हें नागुपर में होने वाली कांग्रेस की सालाना बैठक में योगदान देने के लिए तैयार करना था। हेडगेवार चाहते थे कि कांग्रेस के अधिवेशन में मंडल के सदस्य दूर से ही पहचान में आएं। इसके साथ ही ड्रेस में अनुसाशन भी झलके। ऐसे में उन्होंने मंडल सदस्यों के लिए खाकी शर्ट, खाकी निकर, खाकी टोपी, लंबे मोजे और जूतों का ड्रेस कोड तैयार था।
हाफ निकर के पीछे वास्तविक मंशा क्या थी इस बात की कोई ठोस जानकारी नहीं है। माना जाता है कि निकर का चुनाव संभवत शारीरिक कसरत को ध्यान में रखकर किया गया हो। वजह चाहे जो भी लेकिन यह सच है कि संघ की स्थापना से 5 साल पहले ही हेडगेवार संघ की यूनिफार्म तय कर चुके हैं। ऐसे में हाफ पैंट आरएसएस का हिस्सा होगा यह 1920 में ही तय हो चुका था। उस समय यूनिफॉर्म में खाकी टोपी भी थी लेकिन पांच साल बाद ही 1930 में खाकी टोपी के बदले काली टोपी कर दिया गया। 1939 में संघ ने अपनी शर्ट का रंग खाकी से बदलकर सफेद कर दिया था। इसके पीछे ब्रिटिश सेना की तरफ से संघ की ड्रेस और उनकी ड्रिल पर लगाई गई पाबंदी थी। बाद में संघ के जूते से लेकर बेल्ट तक में भी बदलाव किया गया। धीरे-धीरे संघ से खाकी रंग काफी हद तक गायब हो गया। बताया जाता है कि संघ में यह बदलाव समय की मांग और परिस्थितियों के अनुसार किए गए थे।
