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Tuesday, May 5, 2026
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बारिश में डूबे लखनऊ से आपबीती: ‘सुबह आंख खुली तो बेड पानी में घिरा हुआ था’

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लखनऊ

लखनऊ में शुक्रवार को दिन भर रुक-रुककर हुई बारिश से मौसम सुहाना हो गया। बारिश के चलते रात में नींद तो अच्छी आई लेकिन सुबह क्या हालात होंगे इसका अंदाजा नहीं था। किसी ने सोचा नहीं था कि कुछ घंटे की बारिश से हालात ऐसे हो जाएंगे। आंख खुली तो बेड पानी से घिरा था। बच्चों की कॉपी-किताबों से लेकर कपड़े, चार्जर और यहां तक कि मोबाइल भी पानी भीग गए। रातभर हुई बारिश ने ‘स्मार्ट सिटी’ की पोल खोल दी। क्या पॉश कॉलोनियां, क्या छोटी बस्तियां, सब पानी में सराबोर। एक तरफ जलभराव की समस्या दूसरी तरफ बिजली गुल। कुछ घंटे की बारिश ने राजधानी की नींद गायब कर दी। आंख मलते हुए उठकर लोग अपने घरों पानी उलीचते हुए नजर आए।

यहां तक कि अधिकारियों को भी नींद तोड़ते हुए रात 3 बजे सड़क पर निकलना पड़ा। कमिश्नर रौशन जैकब भारी बारिश के बीच सड़क पर निकलीं और कमर तक भरे पानी में पैदल चलकर जायजा लिया। इस बीच हजरतगंज के पास दीवार गिरने के दर्दनाक हादसे में 9 लोगों की मौत हो गई। मौसम विभाग ने अभी और बारिश होने का अनुमान जताया है। प्रशासन की ओर से अलर्ट जारी कर दिया गया है। सोशल मीडिया पर लोग बारिश की तस्वीरें और वीडियो शेयर कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर शिकायतों का अंबार
लखनऊ के दिल हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर और इंदिरानगर तक की सड़कें स्वीमिंग पूल बनी हुई हैं। इन सबके बीच कई इलाकों की बिजली भी गुल है, इन्वर्टर ठप है, सबस्टेशन में फोन लाइन बिजी आ रही है। सोशल मीडिया पर शिकायतों का अंबार है। नगर निगम से लेकर बिजली विभाग और प्रशासन पर लोगों का गुस्सा उबल रहा है। इन सबके बीच सवाल यह है कि क्या वाकई सिर्फ सरकारी मशीनरी ही इन हालातों के लिए जिम्मेदार हैं या फिर क्या वाकई लखनऊ में इससे पहले इतनी भीषण बारिश नहीं हुई जैसा कि लोग दावा कर रहे हैं?

पिछले साल भी हुई थी ऐसी बारिश
अमौसी स्थित आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, गुरुवार सुबह साढ़े 8 बजे से लेकर शुक्रवार सुबह साढ़े पांच बजे तक 155.2 एमएम बारिश हुई। जबकि बीते साल भी सितंबर महीने में मॉनसून ने जाते-जाते ऐसे ही रुलाया था। जब लखनऊ ने सितंबर में 36 साल बाद ऐसी बारिश देखी थी। कहीं सड़क तालाब नजर आई तो कहीं लोगों के घरों में घुटने तक पानी भरा था। तब 15 से 16 सितंबर को 24 घंटे के अंतराल में 225 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गई थी। इससे पहले 14 सितंबर 1985 को 177.1 मिमी बारिश रेकॉर्ड हुई थी।

कौन है जिम्मेदार?
लखनऊ में हर साल बारिश में न सिर्फ सड़कें-गलियां बल्कि मुख्य मार्ग में भी खूब पानी भरता है। सड़कों पर दोनों तरफ नाले बने हैं लेकिन कब्जे इतने हैं कि पानी निकलने के लिए जगह नहीं। इनमें बड़े-बड़े कॉम्प्लेक्स, होटल और अस्पताल बने हैं। चौड़े कच्चे फुटपाथ भी कब्जा कर उसे पक्का कर इतना ऊंचा कर दिया कि पानी सीधे सड़क पर आता है। ऐसे में तेज बारिश में पानी सड़क पर भरा रहता है। शहर के ज्यादातर प्रमुख मार्गों और कॉलोनियों का यही हाल है। कई बार नगर आयुक्त लोगों से अपील कर चुके हैं कि अवैध कब्जा न किया जाए लेकिन फिर भी लोग हैं कि मानते नहीं।

तालाब पाटकर बना दीं इमारतें
इसके अलावा नालों की ठीक से सफाई न होने से जलभराव की शिकायत हो जाती है। इन सबके लिए नगर निगम पर गुस्सा जाहिर करना ठीक है लेकिन दूसरा पहलू यह भी है कि घरों का कूड़ा सड़क पर फेंकते समय अक्सर लोग भूल जाते हैं कि बाहर की गंदगी एक दिन घरों में घुसेगी ही। जब पानी की निकासी के लिए ही रास्ता नहीं होगा तो पानी गली-मोहल्ले से होता हुआ आशियानों में जाएगा ही।

आधुनिकता और विकास की दौड़ में हमने ऊंची-ऊंची इमारतें खड़ी कर दीं लेकिन जमीनी हकीकत से दूर हो गए। तालाब पाटकर बिल्डिंग बनाते समय तमाम स्टडी की गई होंगी लेकिन शायद ही किसी ने तब सोचा होगा कि एक दिन पानी अपने इलाके में वापस आएगा। बेंगलुरु में बारिश से बदतर हालात हम देख चुके हैं, अब वहां अवैध निर्माण गिराए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अब यूपी और राजधानी के लोग भी जागेंगे।

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