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रूस को नसीहत और दूसरी बार यूक्रेन का ‘समर्थन’…क्या भारत के रुख में आ रहा बड़ा बदलाव?

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नई दिल्ली

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भारत ने पिछले 2 महीने में दूसरी बार यूक्रेनी राष्ट्रपति के संयुक्त राष्ट्र की बैठक को वर्चुअली संबोधित करने के पक्ष में वोट दिया है। अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा की उच्च स्तरीय बैठक है। बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का पहले से रेकॉर्ड किया हुआ स्टेटमेंट चलाया जाए, इसके पक्ष में भारत समेत 100 से अधिक देशों ने वोट दिया है।

पिछले 2 महीने में दूसरी बार यूक्रेन का ‘समर्थन’
भारत ने पिछले महीने भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में जेलेंस्की के वर्चुअल भाषण के पक्ष में वोट दिया था। उसे पहली बार रूस के खिलाफ नई दिल्ली के वोट के तौर पर देखा गया था। खास बात ये है कि दोनों ही मौकों पर चीन वोटिंग से दूर रहा।यूक्रेन के समर्थन में भारत ने ऐसे समय वोट दिया जब उसके कुछ ही घंटे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समरकंद में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को द्विपक्षीय बातचीत में दो-टूक कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’

इन देशों ने रूस का किया समर्थन
जेलेंस्की के संबोधन के पक्ष में भारत समेत 101 देशों ने वोट दिया। बेलारूस, क्यूबा, इरीट्रिया, सीरिया और रूस समेत 7 देशों ने विरोध में वोट दिया। यानी 6 देशों ने रूस का समर्थन किया। चीन समेत 19 देश वोटिंग से दूर रहे।

भारत की कूटनीति
रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत से लेकर अबतक भारत की कूटनीति बहुत ही सधी हुई रही है। शुरुआत में युद्ध की वजह से हजारों भारतीय सैनिक यूक्रेन में फंसे थे। तब भारत का कूटनीतिक कौशल ही था जो रूस और यूक्रेन दोनों ने भारतीय छात्रों के वहां से सुरक्षित निकाले जाने में सहयोग किया। अमेरिका समेत पश्चिमी देशों के दबाव के बावजूद भारत ने तब अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का मुजाहिरा किया जब उसने रूस से सस्ता तेल खरीदने का फैसला किया। इसे लेकर यूरोप के विरोध पर उन्हें आईना दिखाते हुए उनके पाखंड को भी बेपर्दा किया।

अमेरिकी मीडिया में छाया पीएम मोदी का बयान
समरकंद में इसी हफ्ते शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की शिखर बैठक से इतर पुतिन के साथ द्विपक्षीय बातचीत में पीएम मोदी ने उन्हें दो टूक कहा कि यह दौर युद्ध का नहीं है और वह चाहते हैं कि जंग खत्म हो। अमेरिकी मीडिया में पीएम मोदी का यह बयान छाया रहा। वहां के बड़े-बड़े अखबारों ने भारत के रुख की तारीफ करते हुए लिखा कि मोदी ने पुतिन को यूक्रेन युद्ध को लेकर सार्वजनिक तौर पर ‘फटकार’ लगाई है। अमेरिकी विदेश मंत्री ब्लिंकेन ने भी भारत के रुख की तारीफ की।

‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ ने शीर्षक दिया, ‘मोदी ने यूक्रेन में युद्ध के लिए पुतिन को फटकार लगाई।’ एक और अखबार ने लिखा, ‘मोदी ने पुतिन को आश्चर्यजनक रूप से सार्वजनिक फटकार लगाते हुए कहा, ‘आधुनिक दौर युद्ध का युग नहीं है और मैंने आपसे इस बारे में फोन पर बात की है।’ पुतिन से युद्ध रोकने की पीएम मोदी की अपील ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के वेबपेज की लीड थी। ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने शीर्षक दिया, ‘भारत के नेता ने पुतिन को बताया कि यह युद्ध का दौर नहीं है।’ उसने लिखा, ‘बैठक का लहजा मित्रवत था और दोनों नेताओं ने अपने पुराने साझा इतिहास का जिक्र किया। मोदी की टिप्पणी से पहले पुतिन ने कहा कि वह यूक्रेन में युद्ध को लेकर भारत की चिंताओं को समझते हैं।’

भारत के रुख को समझता है रूस
प्रधानमंत्री मोदी ने जब पुतिन से युद्ध खत्म करने की अपील की उससे पहले रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि वह भारत की चिंताओं से वाकिफ हैं। हालांकि, उन्होंने युद्ध जारी रहने की ठीकरा यूक्रेन पर फोड़ दिया। पुतिन ने पीएम मोदी से कहा, ‘मैं यूक्रेन के साथ संघर्ष में आपके रुख को समझता हूं। मैं आपकी चिंताओं से वाकिफ हूं जिसे आप लगातार जाहिर करते आए हैं। हम चाहते हैं कि ये सब जल्द से जल्द खत्म हो, इसके लिए हम अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।। लेकिन दुर्भाग्य से यूक्रेनी नेतृत्व बातचीत की प्रक्रिया में शामिल होने से मना कर रहा है। दूसरा पक्ष सैन्य साधनों के जरिए अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है। फिर भी, वहां जो भी हो रहा है, हम आपको उस बारे में जानकारी देते रहेंगे’

क्या रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के रुख में आ रहा बदलाव?
पहले पुतिन से युद्ध खत्म करने की सार्वजनिक अपील और उसके कुछ घंटे बाद ही यूएन में यूक्रेन का ‘समर्थन’। क्या रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के रुख में बदलाव आ रहा है? ऐसा नहीं है। आधिकारिक सूत्रों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि भारत के वोट को रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर उसके रुख में बदलाव के तौर नहीं देखा जाना चाहिए। जेलेंस्की पहले भी यूएनएससी को वर्चुअली संबोधित कर चुके हैं।

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