क्वेटा
पाकिस्तान में आर्थिक मंदी इस कदर हावी हो गई है कि बलूचिस्तान प्रांत में लोगों को ठीक से दो वक्त की रोटी भी नहीं मिल पा रही है। पाकिस्तान में बाढ़ के बाद स्थिति में धीरे-धीरे सुधार जरूर हो रहा है लेकिन आर्थिक मंदी और महंगाई ने कई प्रांतीय सरकारों की कमर तोड़ दी है। अकेल बलूचिस्तान प्रांत की बात करें तो यहां पर पिछले तीन हफ्तों से लोगों को आटा के लिए संकट का सामना करना पड़ रहा है। आटा संकट के लिए मिल मालिकों ने प्रांत की सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि सरकार ने इस साल आवश्यक गेहूं की खरीद में विफल रही है।
एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन (PFMA) के बलूचिस्तान चैप्टर के प्रतिनिधियों ने कहा कि मांग और आपूर्ति के बीच बहुत बड़ा अंतर है, जिससे संकट पैदा हुआ है। एसोसिएसन ने कहा है कि संकट के लिए आटा मिल मालिकों को दोषी ठहराया जा रहा है, जबकि वास्तविकता ये है कि प्रांतीय सरकार ने कटाई के सीजन में अंतर प्रांतीय और अंतर जिला परिवहन पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसकी वजह से इस आवश्यकता के अनुसार गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।
बलूचिस्तान की अधिकांश दुकानों पर आटा खत्म
गौरतलब है कि पाकिस्तान में गेहूं और आटे की कीमतों में 10-20 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। बलूचिस्तान में आटे का 20 किलो का एक बैग 2380 से 2500 रुपए में बिक रहा था। इसके अलावा, आसमान छूती कीमतों के कारण, प्रांत भर की अधिकांश दुकानों में आटा उपलब्ध नहीं थी।
एक हफ्ते में ही दामों में बेतहासा बढ़ोतरी
शुक्रवार को पाकिस्तान ब्यूरो ऑफ स्टैटिक्स (PBS) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 15 सितंबर को समाप्त हुए सप्ताह में गेहूं के आटे की कीमत औसतन 7.51 प्रतिशत बढ़कर 106.38 रुपए किलो हो गई है। पिछले सप्ताह यह आंकड़ा 98.95 था। कराची में आटे की कीमत 120-125 रुपए प्रति किलो हो गई है। गेहूं की बात करें तो 14 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 88 रुपए किलो हो गया है। पिछले सप्ताह 77.42 रुपए किलो बिक रहा था।
तीन दशक की सबसे भयावह बाढ़
पाकिस्तान में करीब तीन दशक बाद खतरनाक बाढ़ की वजह से लाखों एकड़ की फसलें बर्बाद हो गई हैं। बाढ़ की वजह से पूरे देश में सब्जियों की कमी हो गई है। बाढ़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पाकिस्तान का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो गया था। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा दक्षिण में बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध प्रांत है।
