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ब्रह्मोस का जखीरा बढ़ेगा, सरकार ने 1,700 करोड़ की डील फाइनल की, क्‍या हैं भारत के इरादे

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नई दिल्‍ली

ब्रह्मोस मिसाइलों के टेरर के बारे में दुनिया जानती है। ये मिसाइलें भारतीय सेना की ताकत हैं। ऐसी और मिसाइलों के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक करार पर हस्ताक्षर किए हैं। यह डील 1700 करोड़ की है। यह अतिरिक्‍त ब्रह्मोस मिसाइलों की सप्‍लाई के लिए है। इससे नौसेना की जरूरत पूरी की जाएगी। इन मिसाइलों को युद्ध पोतों से हमले के लिए रखा जाएगा। इनकी मार करने की क्षमता 290 किमी है। इस बाबत रक्षा मंत्रालय की इकाई और ब्रह्मोस एयरोस्‍पेस प्राइवेट लिमिटेड के बीच समझौते पर हस्‍ताक्षर हुए हैं। ब्रह्मोस एयरोस्‍पेस प्राइवेट भारत और रूस के बीच ज्‍वाइंट वेंचर है। इसका मुख्‍यालय दिल्‍ली में है। यह कॉन्‍ट्रैक्‍ट डुअल रोल वाली मिसाइलों के लिए हुआ है। ये मिसाइलें जमीन और युद्धपोतों से छोड़ी जा सकती हैं।

रक्षा मंत्रालय के अधिकार ने बताया कि इन मिसाइलों से नौसेना की क्षमता में इजाफा होगा। कॉन्‍ट्रैक्‍ट से घरेलू उत्‍पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसमें घरेलू उद्योग सक्रिय हिस्‍सेदार बन सकेंगे। ब्रह्मोस मिसाइलें आवाज की गति से तीन गुना तेज उड़ती हैं। इसका निशाना अचूक है। भारतीय सशस्‍त्रों बलों में सालों से है। अब तक 38 हजार करोड़ रुपये से ज्‍यादा के कॉन्‍ट्रैक्‍ट हो चुके हैं।

पहले से कई गुना बढ़ चुकी है रेंज
शुरू में ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 290 किमी तक थी। अब इसे बढ़ाकर 350-400 किमी तक बढ़ाया गया है। 800 किमी के वैरिएंट पर भी काम चल रहा है। पिछले साल नवंबर में भारतीय नौसेना ने आईएनएस विशाखापटनम से बढ़ाई गई रेंज वाली मिसाइलों का सफल परीक्षण किया गया था। दस फ्रंटलाइन युद्धपोतों को पहले ही मिसाइलों से लैस किया जा जा चुका है। अन्‍य चांच युद्धपोतों पर वर्टिकल लॉन्‍च सिस्‍टम्‍स को लगाया गया है।

एक्‍सपोर्ट के बारे में भी किया जा रहा है विचार
आर्मी की ब्रह्ममोस मिसाइलों को लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश में तैनात किया गया है। चीन के साथ 28 महीने से बॉर्डर पर तनातनती है। इसके बाद से ही ब्रह्मोस मिसाइलों को तैनात कर दिया गया था। मिसाइलों के साथ टैंक, होविट्जर, सतह से सतह मार करने वाली मिसाइलों को भी लगाया गया है।

भारत फिलिपींस को भी ब्रह्मोस मिसाइलों की सप्‍लाई के बारे में सोच रहा है। इसे लेकर इस साल जनवरी में डील साइन हुई थी। यह 2,770 करोड़ रुपये की है। यह इस तरह का पहला एक्‍सपोर्ट ऑर्डर होगा। इससे अन्‍य आसियान देशों के साथ ही ऐसी डील का रास्‍ता खुलेगा। इनमें इंडोनेशिया और वियतनाम शामिल हैं।

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