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निर्भया कांड से हो रही थी गाजियाबाद में महिला से गैंगरेप की तुलना, अब IG ने कहा- रेप हुआ ही नहीं

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गाजियाबाद

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में 38 साल की महिला के साथ गैंगरेप की जिस घटना को निर्भया कांड से कंपेयर किया जा रहा था, उस मामले में गुरुवार को पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। आईजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया है कि महिला के साथ कोई गैंगरेप नहीं हुआ था। उन्होंने बताया कि यह मामला संपत्ति विवाद को लेकर एक साजिश का हिस्सा था। जिन लोगों पर गैंगरेप के आरोप लगे थे, उन लोगों के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। मामले में अभी महिला के मित्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि बीते दिनों खबर सामने आई थी कि गाजियाबाद से दिल्ली जाने के लिए ऑटो का इंतजार कर रही महिला का स्कॉर्पियो सवार चार लोगों ने अपहरण कर लिया था। वे महिला को सुनसान जगह पर ले गए, जहां पांचवा आरोपी था। उन लोगों ने महिला को दो दिनों तक अपने कैद में रखा और इस दौरान उसके साथ गैंगरेप किया। यह भी खबर आई थी कि आरोपियों ने महिला के साथ हैवानियत की हद पार कर दी थी। महिला के प्राइवेट पार्ट में एक वस्तु भी निकाली गई थी। मामले की तुलना 2012 के निर्भया गैंगरेप से किया जाने लगा था।

मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी हस्तक्षेप किया था और कथित गैंगरेप के इस मामले में जांच के लिए दो सदस्यीय जांच दल भेजने की तैयारी में था। हालांकि, अब घटना को लेकर आईजी के दावे से मामले में ट्विस्ट आ गया है। आईजी ने महिला के साथ गैंगरेप जैसी वारदात होने से ही इनकार किया है। उल्टे महिला पर संपत्ति विवाद को लेकर यह साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। महिला के मित्र समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

मामले को लेकर क्या बोले आईजी
मीडिया से बात करते हुए आईजी ने बताया कि ऐसे मामले संवेदनशील होते हैं। सूचना मिलते ही तत्परता से महिला सिपाही के साथ पुलिस की टीम हॉस्पिटल गई। वहां महिला डॉक्टर के सामने महिला ने विरोध किया कि यहां मेडिकल नहीं कराएंगे। जब हम समझाने में विफल रहे तो उन्हें मेरठ मेडिकल कॉलेज या अन्य किसी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। महिला चूंकि जीटीबी अस्पताल को लेकर पहले से परिचित थी, इसलिए वहां उनका उपचार किया गया।

आईजी ने आगे कहा कि एसपी क्राइम और फरेंसिक टीम ने मामले में तत्परता से जांच की तो कुछ और ही बात निकलकर आई। जिस समय कथित पीड़िता लापता थी और उनका फोन बंद था, उसी समय उनका एक परिचित दिल्ली के रहने वाले आजाद का भी मोबाइल ऑफ था। जांच के दौरान हम लोगों को यह भी पता लगा कि इस मुद्दे में जो भी नामजद आरोपी हैं, उनके वाद कड़कड़डूमा कोर्ट में विचाराधीन हैं। हालांकि, ये सारी चीजें निर्णायक नहीं थी लेकिन पूरी टीम ने आगे काम किया तो साफ हुआ कि इन लोगों ने एक षड्यंत्र रचा है।

गैंगरेप की खबर को बढ़ा-चढ़ाकर फैलाने के लिए दिए पैसे
आईजी ने बताया कि आजाद के मोबाइल और अन्य सारे साक्ष्यों का विश्लेषण किया गया, तो पता लगा कि कथित गैंगरेप की खबर को प्रसारित करने के लिए विभिन्न लोगों से संपर्क करने की चेष्टा की गई थी और कहीं-कहीं पर पेटीएम आदि से भुगतान की स्थिति भी दिखी। जहां पर महिला मिली थी, पूरी टीम ने उस जगह तथा उसके आसपास के लोकेशन को ट्रेस किया। पता चला कि महिला के मिलने के समय पर आजाद वहीं आसपास घूमता रहा।

इतना ही नहीं, आजाद के बारे में एक और चीज पता लगी कि वह लोगों के फर्जी आधार कार्ड भी बनवाता था। महिला के पति का भी उसने आधार कार्ड बनवाया था। जब उससे गहराई से पूछताछ की गई तो उसने आरोप कबूल करते हुए बताया कि उसके दो अन्य साथी भी इस षड्यंत्र में शामिल थे। इनके नाम गौरव और अफजाल हैं, जिनके माध्यम से ये सब प्लानिंग की गई थी।

कोई किडनैपिंग नहीं, कोई रेप नहींः आईजी
आईजी ने मीडिया को बताया कि कथित पीड़िता जिस वाहन से लाई गईं, उसकी जीपीआरएस लोकेशन के आधार पर ये चीजें पुष्ट हुई हैं कि किस रूट से कब आईं। आईजी ने साफतौर पर कहा कि मामले में कोई किडनैपिंग नहीं हुई है और कोई रेप नहीं हुआ है। महिला अपनी स्वेच्छा से नियत स्थान पर गई थीं। इसमें मुख्य भूमिका आजाद की है। वाहन गौरव का है, जिसका प्रयोग किया गया है। अफजाल उनके साथी के रूप में है।

आईजी ने बताया कि एक विवादित छोटी-सी प्रॉपर्टी है। साल 2021 में एक समीना नाम की महिला ने उसे आजाद को दिया था। इसके बाद आजाद ने उसकी पावर ऑफ अटॉर्नी दीपक जोशी को दी। जोशी ने कथित पीड़िता को पावर ऑफ अटॉर्नी देने की बात की। इसे लेकर सिविल कोर्ट में भी प्रॉसेस चल रहा है। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में भी प्रॉसेस चल रहा है। आईजी ने कहा कि इस प्रॉपर्टी को लेने के लिए पहले भी प्रयास हुए हैं लेकिन आरोपियों ने सोचा कि इस तरीके से वो कामयाब हो जाएंगे।

षड्यंत्र रचने पर दर्ज हुआ केस
आईजी ने कहा कि पूरा मामला एक प्रकार से इन लोगों का षड्यंत्र था। पुलिस की जांच से जो कबूलनामा आया, उसके बेसिस पर वैज्ञानिरक साक्ष्य संगत मिले तो स्थिति स्पष्ट हुई। आजाद नाम के व्यक्ति का रेकॉर्ड चेक हुआ तो पता चला कि विभिन्न प्रकार के आधार कार्ड इसके द्वारा बनवाए गए हैं। महिला के पति के नाम पर भी आधार कार्ड बनवाया है। इन सबको लेकर एक अलग मुकदमा दर्ज किया गया है। षड्यंत्र पर केस दर्ज किया जा रहा है। जो भी दोषी हैं, उन पर साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करेंगे।

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