मुंबई
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी और भरोसेमंद मिलिंद नार्वेकर के फिलहाल नाराज होने की चर्चा राज्य की सियासत में जोर-शोर से शुरू है। कुछ दिनों पहले शिंदे गुट के कुछ नेताओं ने इस चिंगारी को हवा देने का काम किया था। दरअसल, मिलिंद नार्वेकर ने बीते दिनों बीजेपी नेता अमित शाह के बेटे जय शाह को शुभकामना दी थी। अब उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को उनके जन्मदिन पर बधाई दी है। नार्वेकर के इस शुभकामना संदेश के बाद से उनकी नाराजगी की खबरों ने जोर पकड़ लिया है। इन्हीं सबके बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीबी मंत्री गिरीश महाजन ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मिलिंद नार्वेकर फिलहाल शिवसेना में नाराज चल रहे हैं, इस तरह की खबरें मुझे सुनने को मिल रही है। फिलहाल महाराष्ट्र की सियासत में अब अफवाहों और अटकलों का बाजार गर्म हो गया है कि जल्द ही मिलिंद नार्वेकर उद्धव ठाकरे का दामन का छोड़ सकते हैं। बहरहाल अगर ऐसा हुआ तो यह उद्धव ठाकरे के लिए एक बड़ा झटका होगा।
गिरीश महाजन ने कहा कि मिलिंद नार्वेकर के अमित शाह से अच्छे संबंध हैं और जो कुछ मुझे सुनने को मिल रहा है। उसके मुताबिक मिलिंद नार्वेकर शिवसेना में नाराज चल रहे हैं। शिवसेना में अब कौन रहेगा और कौन जाएगा यह कहना मुश्किल है। गिरीश महाजन ने राज ठाकरे के दिवाली महोत्सव पर भी अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राज ठाकरे के साथ मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंच साझा किया। राजनीति में कभी भी कुछ भी हो सकता है। ऐसे में आगामी बीएमसी चुनाव (BMC Election) में भी तीनों दलों के एकजुट होकर चुनाव लड़ने की संभावना और भी बढ़ गई है।
कौन हैं मिलिंद नार्वेकर
मिलिंद नार्वेकर फिलहाल उद्धव गुट की शिवसेना के सचिव हैं। मिलिंद उद्धव ठाकरे के बेहद करीबी माने जाते हैं। शिवसेना में मिलिंद नार्वेकर के कद को इस बात से समझा जा सकता है कि टिकट बंटवारे में भी उनका अच्छा खासा दखल रहता था। यहां तक कि वो उद्धव और देवेंद्र फडणवीस के बीच मध्यस्था भी करते थे। हालांकि, साल 2019 में महाविकास अघाड़ी गठबंधन के अस्तित्व में आने के बाद उन्हें धीरे-धीरे दरकिनार कर दिया गया। वो उद्धव ठाकरे की कोर टीम में तो बने रहे लेकिन उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी नहीं दी गयी।
शिवसेना नेताओं के आँख की किरकिरी कैसे बने नार्वेकर
शिवसेना में बगावत की एक वजह मिलिंद नार्वेकर को भी माना जाता है। जिसमें एक मुद्दा उद्धव ठाकरे तक नेताओं की सीमित पहुंच का भी है। कहते हैं कि नार्वेकर की वजह से शीर्ष नेताओं की भी ठाकरे से मुलाकात आसान नहीं होती है। कहा जाता है कि शिवसेना में जब-जब नेतृत्व के खिलाफ बगावत हुई, तो नार्वेकर को ही जिम्मेदार माना गया। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने भी उनका फोन नहीं उठाने और उसे उद्धव ठाकरे तक नहीं पहुंचाने के आरोप नार्वेकर पर लगाए थे। आरोप थे कि सलाहकार पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं, विधायकों और उद्धव ठाकरे के बीच संपर्क में दूरियां तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा राज ठाकरे ने भी पार्टी नेतृत्व के साथ तनातनी का जिम्मेदार नार्वेकर को बताया था।
नार्वेकर कैसे बने उद्धव ठाकरे के इतने करीबी
मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो मिलिंद नार्वेकर ग्यारहवीं तक पढ़े हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शिवसेना की छात्र मोर्चा भारतीय विद्यार्थी सेना (BVS) से की थी। 1990 के समय वह शाखा प्रमुख के पद के लिए इंटरव्यू देने मातोश्री पहुंचे थे। वहां उद्धव उनसे खासे प्रभावित हुए और निजी सहयोगी बनाने की पेशकश कर दी। कहा जाता है कि उद्धव ने उन्हें अचानक अपना निजी सचिव बनाने की पेशकश की थी। इसके बाद से ही बगैर सियासी बैकग्राउंड के नार्वेकर ने महाराष्ट्र की राजनीती में कदम रखा। आज उनकी सियासी पकड़ से पूरा राज्य वाकिफ है।
शिंदे-नार्वेकर की मुलाकात
गणेशोत्सव के दौरान महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के निजी सचिव मिलिंद नार्वेकर के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद यह कहा जा रहा था कि मिलिंद नार्वेकर भी अन्य बागी विधायकों की तरह एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं। हालांकि इन खबरों को उस वक्त नार्वेकर की तरफ से खारिज कर दिया गया था। बता दें कि एकनाथ शिंदे ने जब जून के महीने में शिवसेना नेतृत्व के खिलाफ बगावत की थी।
