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Thursday, March 26, 2026
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दिवाली पर रातभर चला धूम-धड़ाम, फिर भी दिल्लीवालों के लिए एक राहत की खबर है

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नई दिल्ली

इस बार भी राजधानी में पटाखों पर बैन था, लेकिन दिल्लीवाले नहीं माने। देर रात तक दिल्ली-एनसीआर में धुआंधार आतिशबाजी हुई। चोरी-छिपे पटाखे खरीदे गए और शाम होते ही बैन का कानून धुआं हो गया। जबकि दिल्ली के पर्यावरण मंत्री ने साफ कहा था कि दिवाली पर राष्ट्रीय राजधानी में पटाखे फोड़ने पर छह महीने की जेल और 200 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है। जैसे-जैसे रात होती गई, पटाखों की आवाज तेज होती गई। सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर कुछ लोगों ने पूछा भी कि कोई प्रतिबंध लगा भी है या नहीं। हालांकि इन सबके बावजूद एक राहत की खबर है। जी हां, राहत इस मामले में कि दिवाली की अगली सुबह यानी मंगलवार को प्रदूषण के पिछले पांच साल के आंकड़े देखें तो इस बार मीटर डाउन रहा।

दिवाली पर पटाखे फोड़ने की सदियों पुरानी परंपरा है। दिवाली के आसपास प्रदूषण बढ़ जाता है इसलिए दिल्ली में पर्यावरण संबंधी चिंताओं और स्वास्थ्य खतरे को देखते हुए प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था। पराली जलाने और पटाखे फोड़ने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ हो गई। हालांकि, 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 320-326 के आसपास रहा।

दिवाली की अगली सुबह का हाल
2022 (मंगलवार सुबह) 326 (AQI)
2021 462
2020 435
2019 367
2018 390
आंकड़ों से साफ है कि आज दिल्ली में हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ रही लेकिन यह पांच साल में सबसे बेहतर स्थिति है। ऐसे में सीएम अरविंद केजरीवाल का ट्वीट भी आया। उन्होंने लिखा, ‘प्रदूषण के क्षेत्र में दिल्लीवासी काफ़ी मेहनत कर रहे हैं। काफ़ी उत्साहजनक नतीजे आए हैं, पर अभी लंबा रास्ता तय करना है। दिल्ली को दुनिया का सबसे बेहतरीन शहर बनाएंगे।

सुबह 11 बजे दिल्ली-नोएडा का हाल
ताजा स्थिति की बात करें मंगलवार सुबह 11 बजे दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी AQI 353 था, जो काफी खराब स्थिति मानी जाती है। गुरुग्राम में 318 और नोएडा में AQI 370 था।

...पर यह हवा अच्छी नहीं है
हालांकि मंगलवार सुबह अपेक्षाकृत बेहतर वायु गुणवत्ता का मतलब यह नहीं है कि यह अच्छी हवा है। राष्ट्रीय राजधानी के 35 निगरानी केंद्रों में से 30 में सुबह सात बजे पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानक 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से पांच से छह गुना अधिक रहा। पीएम 2.5 महीन कण होते हैं जो 2.5 माइक्रोन या उससे कम व्यास के होते हैं और सांस की नली के माध्यम से शरीर में गहराई तक जा सकते हैं और फेफड़ों तक पहुंच कर रक्तप्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।

आतिशबाजी पर प्रतिबंध के बावजूद दिल्ली के कई हिस्सों में लोगों ने पटाखे चलाए, लेकिन पिछले दो वर्षों की तुलना में इसकी तीव्रता कम दिखाई दी। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के चेयर प्रोफेसर गुफरान बेग ने कहा पंजाब और हरियाणा में सोमवार को खेतों में पराली जलाई गई, लेकिन हवा तेज होने के कारण धुंआ छंट गया। इसलिए, दिल्ली के प्रदूषण में पराली जलाने का योगदान (लगभग 10 प्रतिशत) भी ‘बहुत अधिक’ नहीं रहा। हर साल दिवाली पर दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषकों में पटाखों और पराली जलाने का योगदान रहा है, लेकिन इस साल यह पूर्व के वर्षों की तुलना में अपेक्षाकृत कम रहा है।

आनंद विहार में पानी का छिड़काव
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कम होने की एक बड़ी वजह हवा चलना भी माना जा रहा है। तड़के कई इलाकों में हल्की हवा चल रही थी। उधर, हवा की गुणवत्ता खराब पाए जाने पर दिल्ली एमसीडी द्वारा आनंद विहार समेत कई इलाकों में पानी का छिड़काव शुरू कर दिया गया।

इससे पहले, दक्षिण दिल्ली के ईस्ट ऑफ कैलाश और पड़ोसी स्थानों जैसे नेहरू प्लेस और मूलचंद में पटाखों की रोशनी से आसमान पटा हुआ था। पूर्वी और उत्तर पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, शाहदरा, यमुना विहार समेत कई इलाकों में यही स्थिति रही। कुछ लोगों ने कहा कि इस बार पटाखों की आवाज़ पिछले साल से कम थी, लेकिन रात 9 बजे के बाद पटाखों की आवाज़ बढ़ गई। दक्षिण पश्चिम दिल्ली की मुनिरका में कथित रूप से तेज़ आवाज़ वाले पटाखे फोड़े गए हैं।

बिपाशा घोष (19) कुछ दिन पहले कोलकाता से दक्षिणी दिल्ली के कैलाश हिल्स इलाके में आई थीं। उन्होंने कहा, ‘मेरे क्षेत्र में यह रात 11 बजे के बाद शुरू हो गया। मैं हैरान थी कि क्या वास्तव में दिल्ली में पटाखे फोड़ने पर प्रतिबंध है। साथ ही, ऐसा करने वाले पर्यावरण के प्रति गैर-जिम्मेदार और असंवेदनशील हैं। ये लोग उनके प्रति भी असंवेदनशील हैं जिन्हें सांस संबंधी समस्या और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं।’ कई लोगों ने पटाखों के धुएं के कारण आंखों में जलन होने की शिकायत की।

AQI कब अच्छा-खराब, जान लीजिए
शून्य से 50 के बीच एक्यूआई को ‘अच्छा’, 51 और 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 और 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’, 401 और 500 के बीच AQI को ‘गंभीर’ श्रेणी में माना जाता है।

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