-पैनल में युवा उम्मीदवारों की कतार,संस्था का चुनाव जीतने मांग रहे हैं वोट
भोपाल
इस बार भेल की थ्रिफ्ट सोसायटी के चुनाव 10 माह की देरी से होने के कारण हार-जीत के समीकरण काफी हद तक बदल गये हैं । पहले बनी पैनलों में कुछ दमदार उम्मीदवार बदल दिये गये इसलिये मुकाबला भी दिलचस्प हो गया है । कौन जीतेगा कौन हारेगा इसकी तस्वीर तो मतदान के एक दिन पहले ही साफ हो पायेगी हालांकि सभी पैनले पूरे दमखम के साथ चुनाव प्रचार में लगी हैं ।
हाल ही में सत्यमेव जयते पैनल भी युवा उम्मीदवारों के साथ चुनाव मैदान में उतरी हैं इस पैनल ने संस्था के कतिपय पदाधिकारियों पर जमकर आरोप लगाये हैं इसके चलते इस पैनल की लोकप्रियता तो बड़ी ही है लेकिन इस पैनल पुराने 5 उम्मीदवारों के नामांकन निरस्त होने के कारण कुछ नये प्रत्याशियों को पैनल में शामिल किया है जिनके नामांकन निरस्त हुये उनमें पैनल के संयोजक नरेश सिंह जादौन, संरक्षकगण राजेश परते, ओपी सिंह, अंजना,आशा मंडरे पैनल के उम्मीदवारों को जिताने की जी तोड़ कोशिश कर रहे हैं । इसमें संचालक पद के सभी उम्मीदवार युवा हैं और अपनी छवि को मतदाताओं के सामने रख वोट मांग रहे हैं ।
कैलाश नारायण मालवीय,विजेन्द्र पाटील,कृष्णा डोंगरे,विनय कुमार सिंह, दीपक गुप्ता, सादीक खान, निशांत नंदा, सुरेश कुमार जगत और राजकुमार इड़पाची अपना भाग्य आजमा रहे हैं । यहां यह बता देना जरूरी है कि पिछले प्रतिनिधि यूनियन के चुनाव में इन्हीं लोगों ने सीटू यूनियन को जिताकर एक सीट हासिल की थी यही नहीं कुछ ताकतवर यूनियनों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था ।
साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं इन लोगों के प्रति भेल कर्मचारी मतदाता के मन में जगह तो है लेकिन क्या कर्मचारी इन्हें थ्रिफ्ट के चुनाव में मौका देंगे या नहीं यह तो बाद में ही पता चलेगा । मतदाता यह भी आकलन कर रहा है कि पिछले 5 साल में यह संस्था सही ढंग से चली है या नहीं । इस पैनल के युवाओं के लिये अधिकारी वर्ग की सोच क्या है यह भी देखना होगा । फिलहाल इसमें युवा उम्मीदवार दिखाई दे रहे हैं इसलिये सत्समेव जयते पैनल आखिरी समय में क्या गुल खिलायेगी यह देखना बाकी है ।
उदयराज भी आजमा रहे हैं भाग्य
भेल कारखाने में सहायक अभियंता के पद पर काम कर रहे नेता जी उदयराज सिंह भी थ्रिफ्ट के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना भाग्य आजमा रहे हैं । उनका कहना है कि वह सहकारिता की भावना को लेकर संचालक पद के उम्मीदवार हैं । इसलिये किसी पैनल में नहीं बल्कि स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप मेें चुनाव लड़ रहे हैं । पिछले 10 माह से संस्था में जो नूरा कुश्ती हुई है इससे दुखी होकर चुनाव मैदान में उतरा हंू । मुझे भरोसा है कि मतदाता मेरा साथ देंगे ।
दीपक गुप्ता का कारखाने में प्रवेश बंद
यूं तो कारखाने में प्रचार एक तरह से बंद है लेकिन लुका छिपी का खेल जारी है । कुछ पैनलों के ताकतवर नेता प्रचार तो कर रहे हैं लेकिन गुप्त तरीके से । सत्यमेव जयते पैनल के युवा उम्मीदवार दीपक गुप्ता का तो कारखाने में चुनाव प्रचार तक प्रवेश ही बंद कर दिया है । ऐसा बताया जा रहा है कि उनका प्रवेश कार्ड मानव संसाधन विभाग ने ब्लॉक कर दिया है ऐसे में वह चुनाव के आखिरी समय तक न तो किसी अधिकारी से मिल सकेंगे औन न ही कर्मचारियों से ।
