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हार गई मैं, अपनी लाजो को इंसाफ नहीं दिला पाई। न्याय के इंतजार में जी रही थी मैं…

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नई दिल्ली

’11 साल बाद ये फैसला आया… हार गई मैं। अपनी लाजो को इंसाफ नहीं दिला पाई। न्याय के इंतजार में जी रही थी मैं… अब जीने की इच्छा ही खत्म हो गई है। अब तक सोच रही थी कि इंसाफ मिल जाएगा मेरी बेटी को… नहीं मिला। अब कहां जाऊं मैं।’ सुप्रीम कोर्ट ने जब छावला के फरवरी 2012 के गैंगरेप और हत्या के केस के तीनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया, तो मृतका की मां फूट-फूट कर रोते हुए यही कह रही थीं। इसी तरह कई संगठनों से जुड़े लोग भी जजमेंट सुनने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। लेकिन तीनों आरोपियों के बरी होने होने से सभी मायूस हो गए। एक दशक के लंबे समय से ये संगठन न्याय के लिए संघर्ष कर रहे थे।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद एक बहस छिड़ गई है। उत्तराखंड लोक मंच के अध्यक्ष बृजमोहन उप्रेती ने कहा कि अगर लोअर के बाद हाई कोर्ट से 2014 में फांसी की सजा पाने वाले ये तीनों आरोपी रेप और हत्या के दोषी नहीं हैं तो फिर कौन हैं? मेडिकल रिपोर्ट में बर्बरता और हत्या की पुष्टि हुई ही थी। अब ये कौन बताएगा कि कौन हत्यारे थे और किसने वीभत्स रेप को अंजाम दिया था। इसलिए सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी।

उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक और बीजेपी मयूर विहार के जिला अध्यक्ष विनोद बछेती ने कहा कि 2012 से लगातार न्याय के लिए संघर्ष किया है। इसलिए हार मानने का सवाल ही नहीं है। ये जरूर है कि इस फैसले से हैरानी तो हुई है, लेकिन वो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं। लेकिन इस फैसले के खिलाफ अपील की जाएगी और राष्ट्रपति तक से गुहार लगाई जाएगी। पूरा समाज मृतका के परिवार के साथ खड़ा है और न्याय दिलाने की लड़ाई जारी रहेगी।

उत्तराखंड कांग्रेस उपाध्यक्ष और प्रवक्ता धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि आरोपियों को द्वारका कोर्ट और हाई कोर्ट फांसी की सजा देने का फैसला दे चुकी थी। अगर तीनों आरोपी छूटे हैं तो सरकार की तरफ से कमजोर पैरवी हुई है। दिल्ली सरकार से मांग है कि इस फैसले के खिलाफ बड़ी बेंच में जाए। निर्भया कांड के दोषियों को फांसी हो चुकी है, लेकिन इससे पहले के दर्दनाक हत्याकांड के आरोपी बरी हो गए। उत्तराखंड के प्रवासी संगठनों से चर्चा की जाएगी, जिसके बाद आगे की लड़ाई का फैसला किया जाएगा।

दिल्ली नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष रह चुके जगदीश ममगाईं ने भी इस हत्याकांड के मामले में काफी धरने-प्रदर्शनों की अगुवाई की थी। उन्होंने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट के फैसले को सुनकर निशब्द हैं। गरीब नारी सुरक्षा और न्याय की उम्मीद कैसे करेगी। अपने बुजुर्ग माता-पिता का सहारा था वो बेटी। लेकिन जिस तरह से आरोपी छूटे हैं, उससे कैसे कहा जा सकता है कि समाज और देश बदल रहा है। सोशल मीडिया पर भी इस फैसले को लेकर भी लोगों की तरफ से निराशा जाहिर की गई है और लगातार पोस्ट हो रहे हैं।

उत्तराखंडी संगठनों की गढ़वाल भवन में बैठक आज
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आगे की रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को उत्तराखंड के सभी सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की बैठक पचकुइयां रोड स्थित गढ़वाल भवन में बुलाई गई है। उत्तराखंड एकता मंच के संयोजक विनोद बछेती ने बताया कि मंगलवार सुबह 11:00 बजे दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय सभी संगठनों के अध्यक्षों और महसचिवों को इस बैठक में आने का आह्वान किया गया है। इस बैठक के बाद इस मामले में आगे की रणनीति तय जाएगी।

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