नई दिल्ली/भोपाल। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से देश की प्रमुख औद्योगिक परियोजनाओं की गति धीमी हो गई है। इसका सीधा असर मध्य प्रदेश में भी देखने को मिल रहा है, जहाँ अडानी पावर ने श्रम और एलपीजी (LPG) की भारी कमी के कारण अपने 1.6 गीगावाट के महान चरण-II संयंत्र के चालू होने की तिथि को वित्त वर्ष 2028 तक आगे बढ़ा दिया है।
इस गंभीर संकट को देखते हुए वित्त मंत्रालय ने 29 अप्रैल 2026 को एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को आधिकारिक तौर पर ‘फोर्स मेज्योर’ (Force Majeure) यानी अप्रत्याशित घटना के रूप में मान्यता दी है। इस कदम से उन ठेकेदारों को बड़ी राहत मिलेगी जिनके प्रोजेक्ट 28 फरवरी 2026 के बाद पूरे होने हैं। मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, संघर्ष के कारण होने वाले विलंब के लिए ‘लिक्विडेटेड डैमेज’ (LD) को माफ किया जा सकता है और बिना किसी जुर्माने के प्रोजेक्ट की समय-सीमा में 2 से 4 महीने का विस्तार (EoT) मिल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, विभिन्न प्रोजेक्ट साइट्स पर ईंधन की बढ़ती कीमतों और गैस की कमी के कारण ठेकेदार अब वैकल्पिक कटिंग गैसों (जैसे BMCG) के उपयोग की अनुमति मांग रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ईंधन संकट के कारण लेबर कैंटीनों और भोजनालयों में आ रही दिक्कतों की वजह से श्रमिकों का पलायन भी शुरू हो गया है। समुद्री माल ढुलाई में देरी और बढ़ते बीमा खर्च ने ईपीसी (EPC) सप्लाई चेन को और भी चुनौतीपूर्ण बना दिया है। जानकारों का कहना है कि भविष्य में परियोजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकारी निर्देशों के साथ-साथ डेवलपर्स और ठेकेदारों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे।
