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UN का मंच, CAA पर सवाल, भारत ने आपत्ति जताने वालों को सीधा-सीधा समझाया

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नई दिल्ली,

भारत सरकार UN समेत दुनिया के किसी भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर भारत को कठघरे में खड़ा करने के किसी भी कोशिश का जोरदार जवाब दे रही है. बता दें कि दुनिया के कुछ देश CAA का मुद्दा बनाकर भारत को घेरने की नाकाम कोशिश कर चुके हैं. गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जब कुछ देशों ने CAA का मुद्दा उठाया तो भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार कपूर ने इन देशों को विस्तार से भारत का पक्ष समझाया.

भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सीएए उन कानूनों की तरह हैं जो अलग-अलग देशों में नागरिकता के लिए मानदंड तैयार करते हैं. इस कानून में परिभाषित मानदंड भारत और उसके पड़ोस के लिए विशिष्ट है और ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखता है. जिनेवा में चल रही मानवाधिकार समीक्षा में कई सदस्य देशों ने भारत में सीएए के मुद्दे को लेकर चिंता जताई थी.

सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य भारत के पड़ोसी देशों अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के 6 अल्पसंख्यक समुदाय हिंदू, सिख, बौद्ध, पारसी, जैन और ईसाई लोगों को धार्मिक उत्पीड़न के आधार पर भारतीय नागरिकता मिलने में मदद करता है.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि ये कानून पड़ोसी देशों के धार्मिक आधार पर पीड़ित हुए लोगों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन जीने में सक्षम बनाएगा. यह अधिनियम न तो किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता छीनता है और न ही किसी भी धर्म से संबंधित किसी भी विदेशी को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने की मौजूदा प्रक्रिया में संशोधन करता है.

हेट स्पीच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी दिया जवाब
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर जवाब देते हुए मेहता ने कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार की गारंटी देता है. उन्होंने कहा कि किसी भी अन्य स्वतंत्रता की तरह, भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्रकृति में पूर्ण नहीं है और भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, दूसरे देशों के साथ संबंधों, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता या उसके हित में उचित प्रतिबंधों के अधीन है.

उन्होंने कहा कि इन प्रतिबंधों की कल्पना राष्ट्रीय और सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए की गई है और इन्हें काफी हद तक पूरा करने की आवश्यकता है. मेहता ने कहा कि उचित प्रतिबंध लगाने से हेट स्पीच और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को विनियमित करने में मदद मिलती है.

7-18 नवंबर तक होंगे सवाल-जवाब
बता दें कि संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग की यूनिवर्सल पीरियॉडिक रिव्यू एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों को बाकी सदस्य देशों के मानवाधिकार रिकॉर्ड की समीक्षा करने का अवसर दिया जाता है. ये समूह सात से 18 नवंबर के दौरान कई अन्य देशों के रिकॉर्ड की भी जांच करेगा.

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