नई दिल्ली
कश्मीर को लेकर कथित तौर पर विवादित टिप्पणी करने वाले केरल के विधायक केटी जलील को दिल्ली कोर्ट से राहत मिल गई है। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज की गई शिकायत को खारिज कर दिया। विधायक ने जो ट्वीट किया था, उसे बाद में डिलीट कर दिया गया था। शिकायत खारिज करते हुए राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट हरजोत सिंह जसपाल ने कहा, ‘अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता उन कदमों की रक्षा करती है जो समाज को बहुत अपमानजनक लग सकते हैं और अकेले समाज के आक्रोश के चलते अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का औचित्य नहीं है।’ कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि तथ्यात्मक शुद्धता और सच्चाई का त्याग कर विधायक ने अनुचित राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए जल्दबाजी में बयान दिया था।
यह शिकायत एडवोकेट जीएस मणि ने दाखिल की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि केटी जलील ने अपने ट्वीट के जरिए आईपीसी के तहत कई अपराध किए हैं और उसकी जांच की जानी चाहिए। आवेदक ने कथित तौर पर देश विरोधी टिप्पणी करने के लिए सेक्शन 124ए, 153ए, 153बी, 504, 505(1) और 505(2) के तहत आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। विधायक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर यह टिप्पणी की थी।
कोर्ट ने इस दलील को ठुकरा दिया कि आरोपी की कश्मीर और/या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर से संबंधित टिप्पणी से हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दुश्मनी पैदा होने की संभावना है। अदालत ने आगे कहा कि यह मानना बिल्कुल गलत और मूर्खतापूर्ण है कि दोनों समुदायों में से कोई भी कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग नहीं मानता है।
कोर्ट ने आगे यह भी कहा, ‘हिंदू और मुसलमान दोनों और सभी धर्मों के सभी नागरिक कश्मीर को भारत का एक अविभाज्य हिस्सा मानते हैं और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को ‘आजाद कश्मीर’ कहने के विचार से दोनों समुदायों या कहें कि हर समुदाय के प्रत्येक भारतीय को समान रूप से पीड़ा और नाराजगी होगी।’
जज ने आगे कहा कि लोकतांत्रिक भारत की पृष्ठभूमि में सामाजिक व्यवस्था, धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना और बंधुत्व की भावना इतनी कमजोर नहीं हो सकती है कि यह स्वार्थी राजनेताओं के बिना सोचे-समझे बयान से टूट जाए। उन्होंने आगे कहा कि मैं गर्व के साथ राष्ट्रीय एकता के बारे में भी यही कह सकता हूं।
