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बुलेट ट्रेन के साथ नहीं होंगे वंदे भारत एक्सप्रेस जैसे हादसे, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताई इसकी वजह

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नई दिल्ली

वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के साथ हाल में कई हादसे हुए हैं। खासकर मुंबई से गांधीनगर के बीच सितंबर के अंत में शुरू हुई नए जमाने की वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ कई हादसे हुए हैं। नवंबर की शुरुआत में गुजरात के आणंद में वंदे भारत ट्रेन की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई थी। इससे पहले यह अहमदाबाद, आणंद और वलसाड में मवेशियों से टकराई थी। इन दुर्घटनाओं में वंदे भारत ट्रेन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इन हादसों के कारण सोशल मीडिया पर वंदे भारत ट्रेन की खूब छिछालेदर हुई थी। यूजर्स का कहना था कि यह ट्रेन है या टिन का डिब्बा! कई सोशल मीडिया यूजर्स ने वंदे भारत को लेकर खूब मीम बनाए। इससे बुलेट ट्रेन की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए हैं जिसकी रफ्तार वंदे भारत से करीब दोगुनी होगी। लेकिन रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि बुलेट ट्रेन के साथ वंदे भारत एक्सप्रेस जैसे हादसे नहीं होंगे।

अश्विनी ने टाइम्स नाउ समिट  में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सुरक्षा के बारे में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि ये दुर्घटनाएं नहीं थीं बल्कि मवेशी ट्रेन से टकराए थे। उन्होंने कहा, ‘पूरी दुनिया में जब भी कोई रफ्तार से चलने वाली कार या ट्रेन बनती है तो उसमें हमेशा क्रंबल जोन वाला कॉन्सेप्ट होता है। अगर कोई चीज रफ्तार के साथ किसी दूसरी चीज से टकराती है तो काइनेटिक एनर्जी को सोखने के लिए उसमें एक हमेशा एक एलिमेंट रहता है ताकि गाड़ी न पलटे। वंदे भारत में आगे का हिस्सा डिसमेंटल के लिए डिजाइन किया गया है।’ वंदे भारत एक्सप्रेस की अधिकतम रफ्तार 180 किमी प्रति घंटा है लेकिन इसे अभी 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाया जा रहा है।

आगे नहीं होंगे ऐसे हादसे
उन्होंने कहा कि भारत में रेलवे ट्रैक जमीन पर है। ऐसे में पशुओं या इंसानों के ट्रैक पर आने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसे रोकना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती है। यह एक सामाजिक समस्या है। इस स्थिति से निपटने के लिए वंदे भारत ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि किसी चीज से टकराने ही इसका अगला हिस्सा डिसमेंटल हो जाए। जैसे गाड़ियों में बंपर लगाया जाता है, उसी तरह वंदे भारत ट्रेन में आगे का हिस्सा दुर्घटना को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है।

वैष्णव ने कहा, ‘लोगों और मवेशियों को ट्रैक पर आने से रोकने के लिए पिछले तीन साल से फेंसिंग लगाने का काम चल रहा है। इसमें कई तरह की दिक्कतें आती है लेकिन इसमें तेजी से काम चल रहा है। फेंसिंग होने से यह दिक्कत काफी हद तक दूर हो जाएगी। जहां तक बुलेट ट्रेन की बात है तो उसमें यह दिक्कत नहीं होगी। इसकी वजह यह है कि बुलेट ट्रेन का ट्रैक एलिवेटेड होता है। पिल्लर होते हैं, उसके ऊपर वायाडक्ट होती है और उसके ऊपर 320 किमी की स्पीड से बुलेट चलती है। उसके कंट्रोल और डायनैमिक्स अलग तरह के होते हैं।’

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
इस समय देश में पांच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। इनमें से दो पुरानी पीढ़ी की है जबकि तीन नई पीढ़ी की हैं। इसकी शुरुआत सबसे पहले नई दिल्ली और वाराणसी के बीच की गई थी। ऐसी दूसरी ट्रेन नई दिल्ली से कटड़ा के लिए चलाई गई थी। नई पीढ़ी की पहली वंदे भारत ट्रेन सितंबर के अंत में मुंबई और गांधीनगर के बीच चलाई गई। इसके बाद नई दिल्ली से हिमाचल प्रदेश के ऊना और फिर चेन्नई और मैसुरू के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस शुरू की गई। देश का पहला बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट मुंबई से अहमदाबाद के बीच बनाया जा रहा है।

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