नई दिल्ली,
कोरोना का प्रकोप एक बार फिर दुनिया में दहशत का सबब बनता जा रहा है. चीन में कोविड के बेकाबू होने से अन्य देशों में भी खतरा बढ़ गया है और भारत में भी इसे लेकर हलचल तेज हो गई है. आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग ने एक मीटिंग बुलाकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं. सरकार दावा कर रही है कि देश हर स्थिति से निपटने को तैयार है और पैनिक की जरूरत नहीं है. यहां बता दें कोरोना का बुरा असर भारत समेत दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं झेल चुकी हैं, ऐसे एक और झटका झेलना नुकसानदायक होगा. आइए जानते हैं देश में क्या तैयारियां हो रही हैं?
चीन से जापान तक कोरोना की दहशत
सबसे पहले बात करते हैं कोरोना के बढ़ते मामलों की, तो बता दें चीन समेत तमाम देशों में कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. दुनिया में पिछले एक हफ्ते में कोरोना के 36 लाख मामले सामने आए हैं, जबकि इस अवधि में 10 हजार लोगों की मौत हुई है. चीन समेत अर्जेंटीना, ब्राजील और जापान में संक्रमण में तेज उछाल आया है, वहीं अमेरिका, जर्मनी और ताइवान जैसे देशों में नए मामले बढ़ रहे हैं.
चीन में हालात हो रहे बेकाबू
अन्य देशों की तुलना में चीन में कोरोना से हालात बेकाबू नजर आ रहे हैं. चीन के चोंगकिंग शहर से कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. इनमें जो दृश्य देखने को मिल रहे हैं, उन्हें देखकर दहशत बढ़ रही है. इनमें देखा जा सकता है कि अस्पतालों में मरीजों के चेकअप के दौरान एक डॉक्टर किस तरह अचानक थककर सो जाता है. चीन से सामने आ रही इसी तरह की तस्वीरें और वीडियो परेशान कर देने वाले हैं. इससे चीन की इकोनॉमी के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया है.
World Bank ने घटाया ग्रोथ अनुमान
चीन में कोरोना के पैर पसारने का असर देश की इकोनॉमी पर दिखना भी शुरू हो गया है. विश्व बैंक ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चीन के विकास दर के अनुमान में बड़ी कटौती की है. मंगलवार को World Bank ने चीन के विकास दर का अनुमान घटाकर 2.7 फीसदी कर दिया. इससे पहले जून 2022 में इसके 4.3 फीसदी रहने का अनुमान जाहिर किया था. छह महीनों में 1.6 फीसदी की कटौती की गई है. यही नहीं विश्व बैंक ने कहा है कि अगले साल 2023 में ग्रोथ अनुमान को 8.1 फीसदी से 4.3 फीसदी कर दिया गया है.
बेरोजगारी दर में जोरदार बढ़ोतरी
विश्व बैंक ने नेविगेटिंग अनसर्टिनिटी, चाइना इकोनॉमी इन 2023 रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना महामारी के दौरान चीन की पब्लिक हेल्थ पॉलिसी बहुत कठोर रही है. लोगों के स्वास्थ्य को देखते हुए ये ठीक है, लेकिन अर्थव्यवस्था पर इसका नेगेटिव असर पड़ रहा है. रिपोर्ट की मानें तो चीन में बेरोजगारी दर अक्टूबर 2022 में बढ़कर 18 फीसदी पर पहुंच गई है. सिर्फ विश्व बैंक ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी पिछले हफ्ते चीन का ग्रोथ अनुमान घटाने का संकेत दिया था. इससे पहले अक्टूबर 2022 में विकास दर के अनुमान को 3.2 फीसदी तक घटाया गया था.
अर्थव्यवस्था पर ऐसे होता है असर
कोरोना महामारी की पुरानी लहरों में दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं का बुरा हाल हो गया था. दरअसल, कोरोना संक्रमण बढ़ने से आर्थिक गतिविधियां सुस्त पड़ जाती हैं. इसे बढ़ने से रोकने के लिए लगाए जाने वाली पाबंदियों या लॉकडाउन से काम-काज ठप हो जाते हैं और लोग अपने घरों में कैद हो जाते हैं, जबकि स्वास्थ्य खर्च में इजाफा होता है. इन सबका असर इकोनॉमी पर साफतौर पर दिखाई देता है.
भारत में पैनिक की जरूरत नहीं!
चीन में कोरोना केस बढ़ने के चलते भारत भी अलर्ट हो गया है. हालांकि, सरकार दावा कर रही है कि देश हर स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है. लेकिन साथ ही हिदायत भी दे रही है कि कोरोना अभी खत्म नहीं हुआ है. बुधवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ जरूरी बैठक की. इसमें शामिल नीति आयोग के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने बैठक के बाद कहा कि पैनिक की जरूरत नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने भीड़भाड़ में लोगों को मास्क लगाने और बूस्टर डोल जरूर लेने की सलाह दी है.
– लोग मास्क लगाएं.
– सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें.
– अगर कोरोना के लक्षण दिखते हैं तो चेकअप जरूर कराएं.
– कोरोना की पुष्टि होने पर कोविड नियम का पालन करें.
– भीड़-भाड़ वाली जगहों पर जानें से बचें.
– सभी लोग बूस्टर डोज जरूर लगवाएं.
जरूरी कदम उठाए जाएंगे
देश की अर्थव्यवस्था और लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय कोई चूक नहीं करना चाहता. डॉ. पाल ने बताया कि देश में कोरोना टेस्टिंग पर्याप्त मात्रा में हो रही है, बीच-बीच में मंत्रालय निर्णय लेगा कि इसे लेकर और क्या कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने लोगों से कहा कि कोविड को लेकर पहले जो नियम थे, वही लागू करने की जरूरत है. गौरतलब है कि कोरोना की बीती लहरों में भारतीय अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान हुआ था, हालांकि इसके बावजूद देश तेजी से उबरा और दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती इकोनॉमी बना है.
भारतीय इकोनॉमी ने झेला बड़ा नुकसान
पूर्व रिपोर्टों के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था को कोरोना की पिछली लहरों में भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा था. जहां कोविड-19 की पहली लहर में इकोनॉमी को 7 से 8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ था. वहीं इसे बाद की लहरों के दौरान ये आंकड़ा और भी बढ़ गया. कोरोना से हुए नुकसान को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 2021-22 की Report on Currency and Finance (RCF) में कहा गया था कि महामारी से इकोनॉमी को जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई में 15 साल का वक्त लगेगा.
अभी कोरोना की आहट भर से भारत में शेयर बाजार (Share Market) में उथल-पुथल मचनी शुरू हो गई है. सप्ताह के तीसरे कारोबारी दिन बुधवार को बीएसई का सेंसेक्स (Sensex) 635 अंक टूटकर 61,067 के लेवल पर बंद हुआ. जबकि एनएसई का निफ्टी (NIfty) 186 अंक टूटकर 18,199 के लेवल पर बंद हुआ. इस गिरावट के चलते स्टॉक मार्केट इन्वेस्टर्स के साढ़े चार लाख करोड़ रुपये डूब गए.
