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Wednesday, April 1, 2026
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जजों की रिटायरमेंट उम्र बढ़ी तो कर्मचारी भी कर सकते हैं मांग, सरकार के भीतर क्या चल रहा

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नई दिल्ली

जजों की रिटायरमेंट एज को लेकर सरकार के भीतर मंथन चल रहा है। सरकार को डर है कि अगर जजों के लिए उम्र सीमा बढ़ाई गई तो केंद्रीय और राज्यों के सरकारी कर्मचारी भी ऐसी मांग कर सकते हैं। न्याय विभाग ने एक संसदीय समिति को बताया है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की रिटायरमेंट की आयु बढ़ाने से बेहतर काम नहीं करने वाले जजों की सेवा के वर्षों का विस्तार हो सकता है। इतना ही नहीं, सरकारी कर्मचारियों द्वारा भी इसी तरह की मांग उठाने पर इसका व्यापक प्रभाव हो सकता है। विभाग ने कहा कि उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उपायों के साथ-साथ जजों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा।

कानून मंत्री किरेन रीजिजू ने संसद को सूचित किया था कि उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के जजों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। न्याय विभाग ने कार्मिक, कानून और न्याय पर संसदीय समिति के समक्ष एक प्रस्तुति दी। समिति की अध्यक्षता भाजपा के सांसद एवं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी कर रहे हैं।

विधि और न्याय मंत्रालय के विभाग ने प्रस्तुति दी, जिसमें उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने की संभावना सहित न्यायिक प्रक्रियाओं और सुधारों का विवरण शामिल था। विभाग ने कहा, ‘सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से कुछ अनुपयुक्त मामलों में सेवा की अवधि बढ़ाने के संदर्भ में लाभ बढ़ सकता है और बेहतर प्रदर्शन नहीं करने वाले और खराब प्रदर्शन करने वाले जजों की सेवाओं को जारी रखना पड़ सकता है।’

इसने यह भी सुझाव दिया कि लंबित मामलों को कम करने और न्यायपालिका में पारदर्शिता लाने के साथ-साथ न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने पर विचार किया जाना चाहिए। विभाग ने कहा कि सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाने से न्यायाधिकरण पीठासीन अधिकारी या न्यायिक सदस्यों के तौर पर सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से वंचित रह जायेंगे। इसने यह भी आगाह किया कि सेवानिवृत्ति की आयु का व्यापक प्रभाव हो सकता है।

उसने कहा, ‘न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति की आयु में वृद्धि का व्यापक प्रभाव होगा, क्योंकि केंद्र और राज्य स्तर पर सरकारी कर्मचारी, पीएसयू, आयोग आदि इसी तरह की मांग उठा सकते हैं। इसलिए, इस मुद्दे की समग्रता से जांच किए जाने की जरूरत है।’ उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं और देश के 25 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं

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