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हां! हुई है दवाओं की कमी… कोरोना से बेहाल चीन ने पहली बार कबूला सच, बेइज्जती वाली वजह भी बताई

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बीजिंग

चीन ने पहली बार स्वीकारा है कि पूरे देश में कोरोना महामारी के कारण दवाओं की कमी हुई है। चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) में शामिल वैज्ञानिकों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं और चिकित्सा आपूर्ति की कमी हुई है। इसका प्रभाव लोगों के ऊपर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर कमी महामारी के प्रकोप के शुरुआती चरण में अपर्याप्त तैयारी जैसे कारकों के कारण हुई है। चीन ने दिसंबर में कोरोना विस्फोट के बाद दावा किया था कि देश में हालात नियंत्रण में हैं और स्वास्थ्य सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सरकारी अधिकारियों का अपर्याप्त तैयारियों की बात कबूलना चीन के लिए शर्मिंदगी की वजह बन सकता है। चीन में कोरोना संक्रमण से हालात गंभीर बने हुए हैं। आज भी चीन के अस्पतालों में नए मरीजों के लिए कोई जगह नहीं है। चीन के शवदाह गृहों में भी मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगी हुई हैं।

विदेशी राजनयिकों को समझाया चीनी कोविड रिस्पांस
चीनी राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग में कोविड रिस्पांस पैनल के प्रमुख लियांग वानियन ने दावा किया कि चीन ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए एक्टिव रूप में काम किया है। इसमें वायरस के म्यूटेशन पर पूरा ध्यान दिया गया है और बेहतर नीतिओं और उपचार के तरीकों से लोगों की सहायता की गई है। 130 से ज्यादा विदेशी राजनयिकों को चीन के मौजूदा कोविड रोकधाम उपायों की जानकारी देते हुए लिआंग ने कहा कि कोविड-19 महामारी के प्रकोप के बाद से, चीन ने वायरस और संबंधित बीमारियों के परिवर्तन और विभिन्न स्थितियों के अनुसार रोकथाम के उपायों में बदलाव की बारीकी से निगरानी की है।

चीन ने महामारी पर नियंत्रण का किया दावा
चाइनीज सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुख्य महामारी विज्ञानी वू जुनयू ने कहा कि चीन ने हमेशा कोविड-19 महामारी पर आंकड़े एकत्र करने, उनका विश्लेषण करने और उनका आकलन करने के लिए काम किया है क्योंकि डेटा महामारी की रोकथाम नीतियों को तैयार करने और महामारी की स्थिति में बदलाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। वू ने कहा कि वुहान में महामारी के नियंत्रण में आने के बाद दिसंबर 2022 तक चीन में छिटपुट मामले ही आए। इनमें से ज्यादातक का संबंध विदेशों से संक्रमित लोगों के चीन पहुंचने से था। उन्होंने दावा किया की चीनी स्वास्थ्य मंत्रालय ने ऐसे मामलों को पहचाना और थोड़े ही समय में उनका निदान भी किया।

कोरोना के आंकड़ों में हेराफेरी पर भी की बात
चीनी अधिकारियों ने बताया कि उस अवधि के दौरान, हमने बड़े पैमाने पर न्यूक्लिक एसिड परीक्षण किया। इससे हम लगभग सभी संक्रमणों का पता लगा सके और इलाज और महामारी को और ज्यादा फैलने से रोकने की कोशिश की। कोरोना प्रतिबंधों में ढील के बाद सरकारी आंकड़ों और लोगों में संक्रमण के मामलों के बीच के अंतर को लेकर भी चीनी एक्सपर्ट ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि कुछ प्रमुख समूहों पर न्यूक्लिक एसिट परीक्षण कर उस इलाके में मौजूद लोगों के संक्रमण का अंदाजा लगाया गया। इसका अर्थ यह है कि न्यूक्लिक एसिड परीक्षणों से गुजरने वाले लोगों की संख्या कम थी, जिन्हें रिपोर्ट में शामिल किया गया।

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